तेहरान/दुबई: कल्पना कीजिए कि आप सुबह उठें और आपके फोन में इंटरनेट न हो। एक दिन, दो दिन… लेकिन क्या आप 54 दिनों तक बिना इंटरनेट के रहने की कल्पना कर सकते हैं? ईरान इस वक्त दुनिया के सबसे लंबे और भयानक ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ का सामना कर रहा है। वैश्विक इंटरनेट मॉनिटर ‘नेटब्लॉक्स’ (NetBlocks) की चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में पिछले 1272 घंटों से इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। यह कोई तकनीकी खामी नहीं, बल्कि एक देश को पूरी दुनिया से ‘अदृश्य’ कर देने की सोची-समझी रणनीति है।
⏳ Metrics show #Iran has entered the 54th day of an internet blackout that has been in place for over 1272 hours.
The ongoing measure is inherently disproportionate and continues to conceal human rights violations on the ground. pic.twitter.com/b6GuCSMcKE
— NetBlocks (@netblocks) April 22, 2026
युद्ध और विद्रोह: क्यों ‘डिजिटल बंधक’ बना ईरान?
ईरान में इस ‘डिजिटल अंधेरे’ की कहानी जनवरी 2026 में शुरू हुई थी, जब सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया था। प्रशासन ने सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट की रफ्तार पर ब्रेक लगाया। लेकिन, असल संकट फरवरी के अंत में आया जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का सैन्य टकराव (US-Israel war on Iran) शुरू हो गया। बाहरी हमले का डर और आंतरिक विद्रोह के दोहरे दबाव ने सरकार को इंटरनेट का स्विच पूरी तरह बंद करने पर मजबूर कर दिया। आज हालात यह हैं कि ईरान की एक बड़ी आबादी अपने ही घरों में ‘डिजिटल कैदी’ बनकर रह गई है।
Iran’s internet blackout entered its 54th day on Wednesday, with more than 1,272 hours of disconnection from global networks, NetBlocks said.
“The ongoing measure is inherently disproportionate and continues to conceal human rights violations on the ground,” the internet…
— Iran International English (@IranIntl_En) April 22, 2026
ढहती अर्थव्यवस्था और खत्म होते रोजगार
इस शटडाउन ने केवल बातचीत के साधन नहीं छीने, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ई-कॉमर्स, फ्रीलांसिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पर निर्भर रहने वाले लाखों लोगों का रोजगार छिन गया है। छोटे व्यापारी से लेकर बड़े बिजनेस हाउस तक, हर कोई हर दिन करोड़ों का नुकसान झेल रहा है। जो देश डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहा था, वह इस पाबंदी के कारण अचानक दशकों पीछे धकेल दिया गया है। ऑनलाइन शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हैं, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर: सूचना के अधिकार का गला घोंटा गया
मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल और दुनिया भर के कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सूचना के अधिकार’ का क्रूर उल्लंघन करार दिया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोई सरकार युद्ध के नाम पर अपने ही नागरिकों को इस कदर पंगु बना सकती है? नागरिकों में आक्रोश है क्योंकि वे न तो अपनों की खैरियत जान पा रहे हैं और न ही दुनिया को अपना हाल बता पा रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सरहदों पर मिसाइलों से नहीं, बल्कि ‘इन्फॉर्मेशन फ्लो’ को रोककर भी लड़े जा रहे हैं।
ब्लैक मार्केट में वीपीएन और सैटेलाइट इंटरनेट की जंग
जैसे-जैसे शटडाउन लंबा खिंच रहा है, ईरान में ‘वैकल्पिक संचार’ की एक समानांतर दुनिया खड़ी हो गई है। तकनीकी जानकार युवा और एक्सपर्ट्स अब वीपीएन (VPN) और सैटेलाइट इंटरनेट के महंगे और जोखिम भरे रास्तों की तलाश कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी सख्ती के कारण ये विकल्प भी सीमित हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक समुदाय पर हैं कि क्या वे ईरान सरकार पर दबाव बनाकर इस डिजिटल पाबंदी को खत्म करा पाएंगे? फिलहाल, ईरान की जनता के लिए हर गुजरता घंटा एक अनिश्चित भविष्य की ओर इशारा कर रहा है।
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