Thursday , 28 May 2026

VIDEO : गले लगाया, आशीर्वाद लिया और… कौन हैं वो बुजुर्ग शख्स जिनके पीएम मोदी ने छुए पैर?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत में आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है। कोलकाता का ब्रिगेड परेड ग्राउंड उस समय जयकारों से गूंज उठा जब भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भावी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मंच पर पहुंचे। लेकिन इस भव्य आयोजन के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक सबका ध्यान खींच लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर पहुंचते ही एक बुजुर्ग के पैर छुए और उन्हें गले लगा लिया। आखिर कौन हैं वो बुजुर्ग जिनके सामने खुद प्रधानसेवक नतमस्तक हो गए?

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ फहराया था तिरंगा: मिलिए 98 वर्षीय माखनलाल सरकार से

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस बुजुर्ग का आशीर्वाद लिया, उनका नाम माखनलाल सरकार है। 98 वर्ष के माखनलाल जी पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे वरिष्ठ और समर्पित कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। वे केवल एक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन के जीवंत इतिहास हैं। साल 1952 में जब जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में तिरंगा फहराने का आंदोलन छेड़ा था, तब माखनलाल उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे। इस दौरान उन्हें गिरफ्तारी का भी सामना करना पड़ा था।

जब पीएम ने झुकाया शीश, तो छलक आए बुजुर्ग कार्यकर्ता के आंसू

मंच का नजारा बेहद भावुक था। जैसे ही पीएम मोदी माखनलाल सरकार के करीब पहुंचे, उन्होंने आदरपूर्वक उनके पांव छुए और उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। प्रधानमंत्री ने काफी देर तक उन्हें गले लगाए रखा, जिससे माखनलाल जी की आंखें भर आईं। यह दृश्य उस निष्ठा का सम्मान था जो उन्होंने दशकों तक कठिन परिस्थितियों में पार्टी के लिए दिखाई। पीएम मोदी का यह व्यवहार कार्यकर्ताओं के बीच एक कड़ा संदेश दे गया कि भाजपा में पद से बड़ा ‘परिश्रम’ और ‘अनुभव’ होता है।

संगठन के वो ‘शिल्पी’, जिन्होंने एक साल में जोड़े 10 हजार सदस्य

माखनलाल सरकार का योगदान बंगाल भाजपा के लिए नींव के पत्थर जैसा है। 1980 में भाजपा के गठन के बाद उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों का संगठन समन्वयक बनाया गया था। उन्होंने महज एक साल के भीतर रिकॉर्ड 10 हजार नए सदस्यों को पार्टी से जोड़कर सबको हैरान कर दिया था। 1981 से लगातार सात वर्षों तक वे जिला अध्यक्ष रहे, जो उस दौर के संगठनात्मक नियमों के लिहाज से एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है।

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