Saturday , 11 July 2026

भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़: 2030 तक 35 हजार करोड़ के व्यापार का लक्ष्य,  इन सेक्टरों को फायदा

नई दिल्ली/ऑकलैंड: भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मुकाम पर ले जाते हुए इसे ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत करने का बड़ा ऐलान किया है। इस ऐतिहासिक कदम के तहत दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने न्यूजीलैंड के समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ ऑकलैंड में आयोजित एक बेहद महत्वपूर्ण शिखर वार्ता का नेतृत्व किया। इस बैठक के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने ‘रोडमैप टू 2030’ का औपचारिक रूप से अनुमोदन किया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह रोडमैप अगले चार सालों में दोनों देशों के बीच सहयोग की नई दिशा तय करेगा और इसे मजबूत करने के लिए एक साझा कार्ययोजना का मुख्य आधार बनेगा।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगी ताकत, समुद्री सुरक्षा संवाद की शुरुआत

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की इस बेहद खास मुलाकात के बाद कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वैश्विक पटल पर यह दोस्ती काफी असरदार साबित होने वाली है। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एक नए ‘समुद्री सुरक्षा संवाद’ की शुरुआत की जाएगी। इसके साथ ही, न्यूजीलैंड अब ‘इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव’ (IPOI) के समुद्री सुरक्षा स्तंभ में शामिल होने के लिए तैयार हो गया है। वैश्विक मंच पर भारत की एक और बड़ी पहल को आगे बढ़ाते हुए न्यूजीलैंड ‘ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस’ में भी शामिल होने जा रहा है।

नागालैंड और उत्तराखंड में उगेंगे कीवी, कृषि और शिक्षा में बड़ा करार

इस द्विपक्षीय समझौते में भारत के किसानों और छात्रों के लिए भी बड़ी खुशखबरी है। कृषि क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष ‘कीवीफ्रूट एक्शन प्लान’ की शुरुआत की जाएगी। इसके अंतर्गत भारत के दो राज्यों—नागालैंड और उत्तराखंड में कीवी फल के दो अत्याधुनिक ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (Centers of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। शिक्षा और अनुसंधान की बात करें तो गोवा स्थित राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (NCPOR) और न्यूजीलैंड की कैंटरबरी यूनिवर्सिटी के बीच अंटार्कटिक रिसर्च को लेकर हाथ मिलाया गया है। वहीं, निफ्टेम-कुंडली (NIFTEM) और मैसी विश्वविद्यालय के बीच खाद्य प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, छात्र आदान-प्रदान और शैक्षणिक सहयोग के लिए भी एक बड़ी सहमति बनी है।

रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में 4 बड़े समझौते, कुल 18 मोर्चों पर सहमति

प्रधानमंत्री मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई इस शिखर वार्ता में कुल 18 समझौतों और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। इनमें सबसे महत्वपूर्ण रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े चार प्रमुख समझौते हैं। इन समझौतों में समुद्री सहयोग, हाइड्रोग्राफी एवं नौटिकल कार्टोग्राफी, भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक सहायता (Mutual Logistic Support) तथा आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism) की स्थापना जैसे बड़े कदम शामिल हैं।

खेल, संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा नया पंख

रक्षा और व्यापार के अलावा दोनों देशों ने अन्य क्षेत्रों में भी अपने कदमों को आगे बढ़ाया है। एक महत्वपूर्ण समझौता आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किया गया है, जबकि पशुपालन एवं डेयरी, पर्यटन तथा सांस्कृतिक सहयोग को लेकर भी एक-एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। खेल प्रेमियों के लिए ‘भारत-न्यूजीलैंड संयुक्त कार्य योजना’ को अपनाया गया है, जिससे दोनों देशों के खेल संबंधों को नया आयाम मिलेगा। इसके साथ ही, भारत के गौरवशाली इतिहास को सहेजने के लिए गुजरात के लोथल में बन रहे ‘राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर’ के विकास के लिए न्यूजीलैंड मैरीटाइम म्यूजियम के साथ एक विशेष व्यवस्था की गई है, जो कला, विरासत और सांस्कृतिक पहलों के आदान-प्रदान को और मजबूत करेगी।

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