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वास्तु शास्त्र: घर में भूलकर भी इन 5 जगहों पर न लगाएं पूर्वजों की तस्वीरें, वरना बढ़ सकती है आर्थिक और मानसिक परेशानी

हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में पितरों यानी पूर्वजों को देवताओं के समान पूजनीय माना गया है। ऐसा माना जाता है कि पूर्वजों का आशीर्वाद घर में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आता है। यही वजह है कि लोग अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीरें घर में लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में पूर्वजों की तस्वीरें लगाने के कुछ बेहद कड़े नियम हैं?

एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि अगर इन तस्वीरों को घर की गलत दिशा या गलत जगह पर रख दिया जाए, तो घर का वास्तु संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है और परिवार के सदस्यों को भारी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार वे कौन सी 5 जगहें हैं, जहाँ पूर्वजों की तस्वीरें कभी नहीं लगानी चाहिए।

1. बेडरूम (शयनकक्ष) में रखने से बचें, छिन सकती है रात की नींद

वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीरें कभी भी बेडरूम में, खासकर बिस्तर के पास या अपनी निजी जगहों पर नहीं लगानी चाहिए। बेडरूम पूरी तरह से आराम, प्राइवेसी और दांपत्य जीवन के सुकून के लिए होता है। ऐसी जगहों पर दिवंगत पूर्वजों की तस्वीरें लगाने से कमरे की शांति और सकारात्मक ऊर्जा में बाधा पहुंचती है, जिससे परिवार के सदस्यों में तनाव और अनिद्रा की समस्या पैदा हो सकती है।

2. किचन (रसोईघर) में न रखें तस्वीरें, माना जाता है भारी अनादर

किचन को घर का सबसे पवित्र और पोषण देने वाला स्थान माना जाता है। यहाँ अग्नि, जल और मां अन्नपूर्णा का साक्षात वास होता है। वास्तु के नियमों के मुताबिक, किचन में पूर्वजों की तस्वीरें लगाना उनका भारी अनादर माना जाता है। रसोई में तस्वीरें लगाने से घर में अन्न और धन की कमी होने लगती है और ऊर्जा का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो जाता है।

3. देवताओं की जगह यानी उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा से बचें

घर का उत्तर-पूर्व कोना या ईशान कोण सबसे पवित्र माना जाता है, जो देवताओं, पूजा-पाठ और ध्यान के लिए आरक्षित होता है। वास्तु विज्ञान कहता है कि इस दिशा में भूलकर भी पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने से आध्यात्मिक असंतुलन पैदा होता है, क्योंकि दैवीय ऊर्जा और पूर्वजों की ऊर्जा आपस में मिल जाती है, जिसे वास्तु में दोष माना गया है।

4. घर के ठीक बीचों-बीच (ब्रह्मस्थान) में न दें स्थान

ब्रह्मस्थान यानी घर का बिल्कुल केंद्रीय हिस्सा, जिसे घर की ऊर्जा का मुख्य केंद्र बिंदु या नाभि माना जाता है। वास्तु के अनुसार, ब्रह्मस्थान को हमेशा खाली, साफ-सुथरा और बिना किसी रुकावट के खुला रखना चाहिए। यदि इस केंद्रीय स्थान पर पूर्वजों की तस्वीरें रखी जाती हैं, तो पूरे घर में फैलने वाली सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे तरक्की के रास्ते बंद हो सकते हैं।

5. दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) दिशा से भी बनाएं दूरी

घर के दक्षिण-पूर्व कोने को ‘आग्नेय कोण’ कहा जाता है, जो अग्नि तत्व और भारी उष्मिक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। पितरों की प्रकृति शांत और सौम्य मानी जाती है, इसलिए इस अत्यधिक गर्म और ऊर्जा वाले कोने में उनकी तस्वीरें लगाना सही नहीं माना जाता। यहाँ तस्वीरें रखने से पितर रुष्ट हो सकते हैं और घर में कलह-क्लेश का माहौल बन सकता है।

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