Friday , 11 September 2026

बिना इंटरनेट और बिना पिन के होगा UPI पेमेंट: NPCI ने लॉन्च किए ‘Tap & Pay’ और AI-पावर्ड ‘MyUPI’ फीचर्स, जानें कैसे करेंगे काम

डिजिटल लेनदेन की दुनिया में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए दो नए और क्रांतिकारी फीचर्स—’UPI Tap and Pay’ और ‘MyUPI’ पेश किए हैं। अब दुकान पर भुगतान करते समय अगर आपके फोन में इंटरनेट डेटा खत्म हो गया है, या आप ऐप खोलकर क्यूआर कोड स्कैन करने और पिन डालने के झंझट से बचना चाहते हैं, तो यह नई व्यवस्था आपके लिए बेहद मददगार साबित होगी। एनपीसीआई के इस कदम का सीधा मकसद रोजमर्रा के भुगतानों को और अधिक सुगम, तेज तथा सुरक्षित बनाना है।

फोन सिर्फ टैप करें और पेमेंट पूरा: कैसे काम करेगा Tap and Pay?

NPCI द्वारा 10 सितंबर को पेश किए गए ‘UPI Tap and Pay’ फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर के पास एनएफसी (NFC – Near Field Communication) सपोर्ट वाला स्मार्टफोन होना अनिवार्य है। इस तकनीक के तहत आपको बस अपना फोन अनलॉक करना होगा और उसे दुकानदार के एनएफसी-इनेबल्ड पीओएस (POS) टर्मिनल पर हल्के से टैप करना होगा।

इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ग्राहक के फोन में मोबाइल इंटरनेट की कोई आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरा ट्रांजैक्शन मर्चेंट की पीओएस मशीन के इंटरनेट कनेक्शन के जरिए प्रोसेस किया जाएगा। हालांकि, इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि बिना इंटरनेट के हर जगह यूपीआई चलेगा; इसके लिए जरूरी शर्त यह है कि फोन में एनएफसी हो और सामने वाली पीओएस मशीन एक्टिव इंटरनेट से जुड़ी हो।

₹5,000 तक नो-पिन सुविधा: कॉन्टैक्टलेस कार्ड जैसा मिलेगा अनुभव

रोजमर्रा की छोटी और मध्यम स्तर की खरीदारी को रफ्तार देने के लिए एनपीसीआई ने इसमें पिन-फ्री लिमिट की भी व्यवस्था की है। 5,000 रुपये तक के भुगतानों के लिए यूजर को कोई यूपीआई पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 5,000 रुपये से अधिक की राशि होने पर ही सुरक्षा के लिहाज से पिन अनिवार्य होगा। यह फीचर बैंक खातों के अलावा यूपीआई से जुड़े रुपे (RuPay) क्रेडिट कार्ड्स पर भी लागू होगा। इससे यूजर्स को ठीक वैसा ही अनुभव मिलेगा जैसा आमतौर पर वाई-फाई वाले कॉन्टैक्टलेस डेबिट या क्रेडिट कार्ड को मशीन पर टैप करते वक्त मिलता है।

MyUPI क्या है: AI आधारित स्मार्ट कस्टमर सपोर्ट प्लेटफॉर्म

टैप एंड पे के साथ ही एनपीसीआई ने ‘MyUPI’ प्लेटफॉर्म का भी अनावरण किया है। यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेडिकेटेड कस्टमर सपोर्ट सिस्टम है, जिसे एनपीसीआई के इन-हाउस ‘FiMI Small Language Model’ पर विकसित किया गया है। वर्तमान समय में ऑटो-पे मैंडेट, सब्सक्रिप्शन या किसी पुराने ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री चेक करने के लिए यूजर्स को अलग-अलग बैंकों या अलग-अलग यूपीआई ऐप्स के चक्कर लगाने पड़ते हैं। MyUPI इन सभी जानकारियों को एक ही एकीकृत डैशबोर्ड पर लाकर यूजर को सिंगल-विंडो सॉल्यूशन देगा।

गलत खातों में ट्रांसफर रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा और ट्रांजैक्शन रीप्ले

MyUPI महज डेटा देखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पैसे ट्रांसफर करने से पहले रिसीवर यानी बेनेफिशियरी के बारे में अतिरिक्त और प्रामाणिक ब्योरा भी स्क्रीन पर दिखाएगा। इससे अनजाने में गलत व्यक्ति या फ्रॉड अकाउंट में पैसे जाने की आशंका काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही पात्र ट्रांजैक्शंस के लिए ऑटोमेटेड चार्जबैक प्रोसेसिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे अटका हुआ पैसा आसानी से वापस मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त ‘ट्रांजैक्शन रीप्ले’ विकल्प की मदद से यूजर किसी भी पुराने भुगतान को बिना दोबारा डिटेल्स भरे एक क्लिक में दोहरा सकेंगे।

सेफ्टी स्विच और नंबर डीलिंक: यूजर्स के हाथ में होगा पूरा कंट्रोल

साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुरक्षा के स्तर पर दो बड़े टूल्स दिए गए हैं:

  • सेफ्टी स्विच (Safety Switch): किसी भी संदिग्ध डेबिट ट्रांजैक्शन की स्थिति में यूजर तुरंत इसे एक्टिवेट कर संदेहास्पद निकासी को रिजेक्ट करने का अनुरोध दर्ज करा सकेंगे। यदि कभी अकाउंट के साथ कोई छेड़छाड़ महसूस होती है, तो यह फीचर तुरंत सुरक्षा कवच का काम करेगा।

  • यूपीआई नंबर डीलिंक (UPI Number Delink): यदि कोई यूजर अपने मोबाइल नंबर से जुड़े यूपीआई पेमेंट रिसीव करने की सुविधा को अस्थायी या स्थायी रूप से बंद करना चाहता है, तो वह आसानी से अपना नंबर डीलिंक कर सकेगा।

एनपीसीआई के अनुसार, MyUPI एक मजबूत ‘ट्रस्ट एंड कंट्रोल लेयर’ की तरह काम करेगा, जिसमें 24×7 बहुभाषी (मल्टीलिंगुअल) सहायता और सेल्फ-सर्विस टूल्स मिलेंगे, ताकि ग्राहकों को छोटी-मोटी तकनीकी दिक्कतों के लिए बैंक के कस्टमर केयर पर निर्भर न रहना पड़े।

 

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