
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां चुनाव आयोग ने फिल्म, खेल और व्यापार जगत की कई शीर्ष हस्तियों को नोटिस थमा दिया है। आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया है। नोटिस पाने वालों में अभिनेता महेश बाबू, फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली, दिग्गज पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण और स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल जैसे हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं। मतदाता सूची की गहन जांच और सुधार के तहत जारी किए गए इस नोटिस से हड़कंप मच गया है।
साउथ सिनेमा से लेकर खेल और कॉरपोरेट जगत के दिग्गजों के नाम शामिल
मिली जानकारी के अनुसार, इस जांच के दायरे में टॉलीवुड से लेकर भारतीय खेल जगत के कई जाने-माने चेहरे आए हैं। सूत्रों के मुताबिक नोटिस पाने वालों की फेहरिस्त में शामिल हैं:
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सिनेमा जगत: महेश बाबू और उनकी पत्नी नम्रता शिरोडकर, ‘बाहुबली’ और ‘RRR’ फेम डायरेक्टर एसएस राजामौली, दिग्गज अभिनेता वेंकटेश दग्गुबाती और उनकी बेटियां, अभिनेत्री समांथा रुथ प्रभु, अभिनेता विजय देवरकोंडा और आनंद देवरकोंडा।
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खेल जगत: पूर्व भारतीय टेस्ट क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण, महिला क्रिकेट की दिग्गज मिताली राज, मुख्य राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद और ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल।
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बिजनेस व अन्य क्षेत्र: दिवीज लेबोरेटरीज के मुरली कृष्ण प्रसाद दिवि और अपोलो हॉस्पिटल्स की वाइस चेयरपर्सन उपासना कामिनेनी कोनिडेला।
आखिर क्यों जारी किए गए नोटिस?
यह पूरी कवायद मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित और अपडेट करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन के दौरान कई विसंगतियां सामने आई हैं:
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कुछ मतदाताओं के खुद के नाम या उनके माता-पिता के नाम की स्पेलिंग में अंतर पाया गया है।
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कई प्रमुख हस्तियों का मौजूदा रिकॉर्ड पिछले एसआईआर (SIR) डेटाबेस से पूरी तरह मेल नहीं खा रहा है।
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कुछ मामलों में नियमित जांच के तहत डेटा मिलान न होने के कारण सत्यापन नोटिस जारी किए गए हैं।
वेरिफिकेशन के लिए नहीं होना होगा परेशान, प्रतिनिधि भी हो सकेंगे पेश
चुनाव अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिन लोगों को यह नोटिस मिले हैं, उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है। वे स्वयं उपस्थित होकर आवश्यक पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज जमा करके अपना सत्यापन करा सकते हैं। यदि किसी के नाम, पते या अन्य विवरण में कोई त्रुटि है, तो उसे मौके पर ही दुरुस्त कर दिया जाएगा।
व्यस्त शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए आयोग ने यह छूट भी दी है कि यदि कोई हस्ती व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकती, तो वह अपने किसी अधिकृत प्रतिनिधि को आवश्यक दस्तावेजों के साथ सुनवाई और सत्यापन के लिए भेज सकती है।
वोटर आईडी रद्द नहीं हुआ, यह सिर्फ रूटीन सुधार प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने मतदाताओं का भ्रम दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है या उसे मतदान के लिए अयोग्य ठहराया गया है। यह ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल (प्रारूप मतदाता सूची) जारी होने के बाद की एक सामान्य, पारदर्शी और वैधानिक समीक्षा प्रक्रिया है, ताकि अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले हर तरह की गड़बड़ी को ठीक किया जा सके।
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