
लखनऊ उत्तर प्रदेश के करीब 80 हजार उचित दर विक्रेताओं (राशन कोटेदारों) के लिए मंगलवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में संपन्न हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में राशन डीलरों के आर्थिक सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न पर कोटेदारों को 25 रुपये प्रति कुंतल अतिरिक्त राज्य मार्जिन देने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से अब प्रदेश के कोटेदारों का कुल लाभांश बढ़कर 125 रुपये प्रति कुंतल हो गया है।
आधारभूत लाभांश के बाद अब मिला अतिरिक्त स्टेट मार्जिन कैबिनेट के फैसलों की जानकारी साझा करते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि सरकार राशन डीलरों के हितों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। इससे पहले सरकार ने 1 सितंबर 2026 के शासनादेश के तहत आधारभूत लाभांश को 90 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति कुंतल किया था। अब कैबिनेट ने इसमें 25 रुपये प्रति कुंतल का अतिरिक्त राज्य मार्जिन जोड़ने की स्वीकृति दे दी है। इस प्रकार कोटेदारों को मिलने वाली कुल कमीशन राशि अब 125 रुपये प्रति कुंतल हो जाएगी, जिससे उनकी शुद्ध मासिक आय में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
वितरण खर्च से राहत, बढ़ेगी मासिक बचत राज्य में खाद्यान्न की सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी व्यवस्था लागू होने के बावजूद राशन वितरण के दौरान कोटेदारों को तौल, ई-पॉस मशीन के संचालन, इंटरनेट डेटा, दुकान के रख-रखाव और सहायक कर्मियों पर कई तरह के प्रशासनिक व व्यावहारिक खर्च वहन करने पड़ते थे। इन स्थानीय खर्चों के कारण उनकी मासिक बचत बेहद सीमित रह जाती थी। लंबे समय से कोटेदार संगठन कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अतिरिक्त मार्जिन मिलने से कोटेदारों को सीधी आर्थिक मदद मिलेगी और उनके परिवारों के भरण-पोषण की राह आसान होगी।
जुलाई 2026 से प्रभावी, राजकोष पर आएगा 168.75 करोड़ का भार कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई यह नई व्यवस्था भूतलक्षी प्रभाव यानी 1 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष 9 महीनों (जुलाई 2026 से मार्च 2027 तक) के लिए राज्य सरकार के खजाने पर 168.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। वहीं एक पूर्ण वित्तीय वर्ष में इस मद पर सरकार लगभग 225 करोड़ रुपये व्यय करेगी। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत प्रतिवर्ष औसतन 90 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का वितरण गरीब परिवारों को किया जाता है। सरकार के इस कदम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता को भी मजबूती मिलेगी।
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