
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित वसुंधरा पुलिस चौकी में हुए रहस्यमयी विस्फोट के मामले में एक बेहद सनसनीखेज पहलू सामने आया है। शुक्रवार रात हुए धमाके के बाद अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक धमकी भरी पोस्ट वायरल हो रही है। ‘गाजी 2’ नाम के एक अज्ञात हैंडल से की गई इस पोस्ट में ‘तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान’ नामक कथित संगठन की ओर से वसुंधरा पुलिस चौकी को निशाना बनाने और विस्फोट की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है। हालांकि, पुलिस व खुफिया एजेंसियां इस वायरल दावे की सत्यता और प्रामाणिकता की गहन तकनीकी जांच कर रही हैं।
‘गाजी 2’ हैंडल से किया गया पोस्ट, आतंकी संगठन का नाम लेकर दी चुनौती
सोशल मीडिया पर सामने आई इस विवादित पोस्ट में सीधे तौर पर वसुंधरा पुलिस चौकी को उड़ाने की धमकी दी गई है और विस्फोट की पूरी जिम्मेदारी कथित तौर पर तहरीक-उल-मुजाहिदीन हिंदुस्तान संगठन के सिर मढ़ी गई है। पोस्ट सामने आने के बाद पुलिस महकमे और साइबर सेल की टीमें तुरंत हरकत में आ गई हैं। साइबर एक्सपर्ट्स आईपी एड्रेस, यूजर लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह हैंडल कौन संचालित कर रहा है, इसे कहां से पोस्ट किया गया और इस दावे में कितनी सच्चाई है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों ने इस संगठन की वास्तविक संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इसे किसी असामाजिक तत्व की शरारत या भटकाने की साजिश के कोण से भी देखा जा रहा है।
शुक्रवार रात हुआ था जोरदार ब्लास्ट, डिलीवरी ब्वॉय हुआ था जख्मी
पूरा मामला इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली वसुंधरा पुलिस चौकी से जुड़ा है। शुक्रवार रात करीब 9 बजे चौकी भवन के पिछले हिस्से में अचानक तेज धमाका हुआ। जिस जगह विस्फोट हुआ, वहां जब्त की गई पुरानी और कबाड़ गाड़ियां खड़ी रहती हैं। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि चौकी की खिड़कियों के शीशे टूटकर चारों तरफ बिखर गए और परिसर की एक दीवार में भी हल्की दरार आ गई। हादसे के वक्त पार्सल देने पहुंचा एक डिलीवरी ब्वॉय कांच के नुकीले टुकड़े लगने से घायल हो गया, जबकि चौकी में मौजूद सब-इंस्पेक्टर बाल-बाल बच गए।
आगरा भेजी गई फोरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी का अभाव बनी बड़ी चुनौती
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और फोरेंसिक विशेषज्ञ दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। फील्ड यूनिट ने कबाड़ वाहनों के पास से जरूरी साक्ष्य, अवशेष और मिट्टी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए आगरा स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेज दिए हैं ताकि रासायनिक परीक्षण से यह साफ हो सके कि धमाके में किस विस्फोटक या ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल हुआ था।
इस पूरी जांच में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती घटनास्थल पर कैमरों का अभाव होना है। चौकी के पिछले हिस्से में, जहां कबाड़ गाड़ियां खड़ी थीं, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। मुख्य द्वार पर लगे कैमरे में धमाके से पहले या बाद में कौन-कौन संदिग्ध गुजरे, इसकी फुटेज की पड़ताल की जा रही है। इलाके में लगे आसपास के अन्य निजी व सार्वजनिक कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगालकर संदिग्ध गतिविधियों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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