भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चर्चित मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत ने स्पष्ट किया है कि उनकी नियुक्ति की भी गहन जांच कराई जाएगी। दूसरी तरफ, घटना के 9 दिन बाद भी मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसे लेकर अब यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद विभाग का बड़ा एक्शन
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग से रिपोर्ट मिली थी कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (क्रमांक-2) की अध्यक्ष गिरीबाला सिंह के खिलाफ भोपाल के कटारा हिल्स थाने में अपराध बीएनएस और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासनिक नियंत्रणकर्ता होने के नाते विभाग ने मामले की बारीकी से जांच के लिए रजिस्ट्रार को पत्र लिखा है और गिरीबाला सिंह को पद से हटा दिया है।
शॉर्ट पीएम रिपोर्ट ने खोली पोल, पुलिस की 5 बड़ी लापरवाही आई सामने
गर्भवती ट्विशा शर्मा की 12 मई की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ससुराल पक्ष इसे फांसी लगाने का मामला बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने सीधे तौर पर हत्या का आरोप लगाया है। इस मामले में भोपाल एम्स की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट घटना के 24 घंटे के भीतर ही पुलिस को मिल गई थी, जिसमें ट्विशा के शरीर पर चोटों के कई गंभीर निशानों का साफ जिक्र था। इसके बावजूद पुलिस की पांच बड़ी चूकों की वजह से आरोपी समर्थ सिंह को भागने का मौका मिल गया। अब किरकिरी होने के बाद पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने आरोपी पर इनाम की राशि 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी है और लुक-आउट नोटिस जारी कर 6 टीमें तैनात की हैं।
हाई कोर्ट पहुंचा मामला, निष्पक्षता पर सवाल उठा CBI जांच की मांग
अग्रिम जमानत के लिए जिला अदालत से झटका खाने के बाद आरोपी पति समर्थ सिंह ने अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है। समर्थ के वकील मृगेंद्र सिंह का दावा है कि ट्विशा के परिजनों के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और शव का अंतिम संस्कार न कर मामले को नाटकीय रूप दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में इस केस की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है, इसलिए वे इस मामले को सीबीआई (CBI) को सौंपने के लिए एक अलग याचिका दायर कर रहे हैं। वहीं, ट्विशा के परिवार के वकील अंकुर पांडे ने सास गिरीबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को कानून के विपरीत बताते हुए उसे रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट में अपील की है।
‘जस्टिस फॉर ट्विशा’: अखिलेश यादव से लेकर कंगना रनौत तक ने उठाई आवाज
ट्विशा शर्मा को न्याय दिलाने के लिए अब देश की जानी-मानी राजनीतिक और फिल्मी हस्तियां भी मैदान में उतर आई हैं। सोशल मीडिया पर ‘जस्टिस फॉर ट्विशा’ कैंपेन तेजी पकड़ रहा है:
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अखिलेश यादव (अध्यक्ष, सपा): उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि यूपी की बेटी की भोपाल में हुई दहेज हत्या के मामले की बेहद गंभीर जांच होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए।
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कंगना रनौत (अभिनेत्री व भाजपा सांसद): कंगना ने दुख जताते हुए कहा कि भारतीय समाज में शादी के बाद बेटियों को अकेला छोड़ दिया जाता है, जिसके कारण वे ऐसी घुटन भरी जिंदगी में फंस जाती हैं।
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किरण बेदी (पूर्व उपराज्यपाल): उन्होंने मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम और ब्लड टेस्ट जैसे वैज्ञानिक सबूत ही कोर्ट में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।
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माधुरी पटले व दिशा पाटनी की बहन खुशबू पाटनी: मिसेज यूनिवर्स इंडिया रहीं माधुरी ने आत्महत्या के एंगल पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी आत्मविश्वासी लड़की के पास जब अच्छा सपोर्ट सिस्टम था, तो वह सुसाइड क्यों करेगी? वहीं खुशबू पाटनी ने समाज में लड़कियों पर शादी के बढ़ते दबाव को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
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