वाशिंगटन: दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब एक नए मोड़ पर आ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान द्वारा पाकिस्तान के जरिए भेजे गए नए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने हमेशा की तरह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की शर्तें उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं।
ईरान ने खेला था ‘शांति कार्ड’, ट्रम्प बोले- यह पसंद नहीं आया
दरअसल, ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक तेहरान ने रविवार को पाकिस्तान के माध्यम से वाशिंगटन को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में युद्ध समाप्त करने, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रतिबंधों को हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर नए सिरे से बातचीत की पेशकश की गई थी। हालांकि, ट्रम्प ने इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “मैंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
अमेरिका की 14 सूत्रीय शर्त: यूरेनियम सौंपने पर फंसा पेंच
इस पूरे विवाद की जड़ वह 14 सूत्रीय प्रस्ताव है, जो अमेरिका ने इस हफ्ते की शुरुआत में ईरान को भेजा था। इस कड़े प्रस्ताव के तहत अमेरिका ने शर्त रखी थी कि ईरान को कम से कम 12 साल तक यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) रोकना होगा। साथ ही, ईरान को अपने पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करना होगा। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने, फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति को छोड़ने और बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने के लिए तैयार था।
परमाणु कार्यक्रम पर झुकने को तैयार नहीं तेहरान
ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार पर पूरी तरह समझौता करने के मूड में नहीं है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि उनका जवाब ‘सकारात्मक और व्यावहारिक’ है और अब गेंद अमेरिका के पाले में है। हालांकि, ट्रम्प ने ईरान पर पहले भी ‘खेल खेलने’ का आरोप लगाया था और अब इस प्रस्ताव को खारिज कर उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
8 अप्रैल का सीजफायर: क्या फिर दहकेगी जंग?
तनाव के चरम पर होने के बावजूद एक राहत भरी बात यह है कि दोनों देशों ने फिलहाल 8 अप्रैल से लागू सीजफायर (युद्धविराम) के खत्म होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन जिस तरह से कूटनीतिक संवाद विफल हो रहे हैं, उससे मध्य पूर्व (Middle East) में शांति की उम्मीदें धुंधली पड़ती दिख रही हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ट्रम्प का अगला कदम क्या होगा और ईरान इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
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