Wednesday , 17 June 2026

आखिरी घंटे में रुका ईरान पर सबसे बड़ा हमला! इजरायली एयरफोर्स चीफ का बड़ा खुलासा, जानिए ट्रंप के एक फोन ने कैसे टाला महायुद्ध

तेल अवीव: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले हफ्ते ईरान पर एक ऐसा विनाशकारी हमला होने वाला था जो पूरे क्षेत्र का भूगोल बदल सकता था, लेकिन ऐन वक्त पर इसे रोक दिया गया। इस बात की पुष्टि खुद इजरायल के वायुसेना प्रमुख मेजर जनरल ओमर तिश्लर (Maj. Gen. Omer Tischler) ने की है। उन्होंने खुलासा किया कि इजरायली वायुसेना के लड़ाकू विमान उड़ान भरने ही वाले थे, पायलटों की ब्रीफिंग चल रही थी, लेकिन हमले से ठीक एक घंटे पहले आए एक आदेश ने सब कुछ रोक दिया।

सैकड़ों लक्ष्यों पर तबाही बरसाने को तैयार थे इजरायली फाइटर जेट्स

इजरायली वायुसेना प्रमुख मेजर जनरल ओमर तिश्लर ने बताया कि 8 जून 2026 की दोपहर को वायुसेना बल एक बेहद व्यापक और बड़े हमले के लिए पूरी तरह मुस्तैद था। यह हमला ईरान के भीतर एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों ठिकानों पर एक साथ होने वाला था। यह घटना पिछले हफ्ते इजरायल और ईरान के बीच अचानक भड़के भीषण संघर्ष के दौरान की है, जो अप्रैल 2026 की शुरुआत में हुए सीजफायर के बाद दोनों देशों के बीच पहला सबसे बड़ा टकराव था।

मेजर जनरल ओमर तिश्लर के मुताबिक, “अगले दिन दोपहर में पूरी वायुसेना एक व्यापक हमले के लिए उड़ान भरने को तैयार थी। हमले के आदेश से कुछ घंटे पहले ही अलर्ट पीरियड को छोटा कर दिया गया था। पूरे बेड़े को आर्मिंग, प्लानिंग और हथियारों से लैस करते हुए सैकड़ों लक्ष्यों को तबाह करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन जब स्क्वाड्रनों में पायलटों की फाइनल ब्रीफिंग चल रही थी, तभी अचानक ऑपरेशन रोकने का आदेश आ गया।”

जानिए क्यों रुक गया हमला? डोनाल्ड ट्रंप की उस ‘आखिरी चेतावनी’ की इनसाइड स्टोरी

इस खौफनाक हमले के टलने के पीछे की असली वजह दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्राध्यक्ष का एक फोन कॉल था। जब इजरायल की पूरी वायुसेना ईरान को दहलाने के लिए रनवे पर आ चुकी थी, तभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक के बाद एक कई फोन किए। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को दो टूक शब्दों में सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इजरायल ने अब हमले बढ़ाए और जंग को आगे खींचा, तो अमेरिका उसे इस युद्ध में बिल्कुल अकेला छोड़ देगा। ट्रंप की इस सख्त हिदायत के बाद नेतन्याहू बैकफुट पर आए और उन्होंने तुरंत एयरफोर्स को हमला रोकने का फरमान सुनाया। इसके फौरन बाद अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल कूटनीतिक समझौता हुआ, जिससे इस महायुद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिशें शुरू हुईं।

पिछले हफ्ते आखिर ऐसा क्या हुआ था कि छिड़ गई थी जंग?

दरअसल, इस पूरे तनाव की शुरुआत तब हुई जब हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे थे। इसके जवाब में इजरायली सेना ने बेरूत के दहियेह इलाके पर भीषण एयरस्ट्राइक कर दी। इसके बाद भड़के ईरान ने इजरायल पर सीधे 24 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं, जबकि यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल को निशाना बनाकर दो मिसाइलें चलाईं। इजरायल ने पलटवार करते हुए ईरान के भीतर घुसकर प्रहार किया। इजरायली एयरफोर्स ने अपने बेस से 1500 किलोमीटर दूर जाकर ईरान की हवाई सुरक्षा प्रणालियों (एयर डिफेंस सिस्टम) को तहस-नहस कर दिया और कुछ फैक्ट्रियों को मलबे में तब्दील कर दिया। हालांकि, यह सिर्फ ट्रेलर था, जो असली और सबसे विनाशकारी हमला होने वाला था, वह ट्रंप के दखल के बाद टल गया।

इजरायली एयरफोर्स की दो लहरों ने ईरान में मचाई थी भारी तबाही

भले ही 8 जून का महाहमला टल गया हो, लेकिन इससे पहले इजरायली वायुसेना ने ईरान के भीतर दो अलग-अलग लहरों (Waves) में खतरनाक हमले किए थे। पहली लहर के तहत इजरायली विमानों ने पश्चिमी और मध्य ईरान में स्थित नौ अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद आई दूसरी लहर में दक्षिण-पश्चिमी ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की उन तीन बड़ी फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया, जो मिसाइलों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करती थीं। इजरायल के इन हमलों ने ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को भारी चोट पहुंचाई है।

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