Friday , 10 July 2026

खाड़ी में महायुद्ध की शुरुआत: 24 घंटे में अमेरिका ने किए 170 भीषण हमले, ईरान के 150 ठिकाने तबाह..अब ट्रंप को सता रहा जान का डर?

तेहरान/वाशिंगटन। जिस खामोशी को पूरी दुनिया एक बड़ा युद्धविराम समझकर राहत की सांस ले रही थी, वह वास्तव में एक महाविनाशकारी तूफान से पहले की भयानक शांति थी। युद्धविराम के समझौते की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि मिसाइलों की गड़गड़ाहट ने एक बार फिर पश्चिम एशिया के आसमान को चीर कर रख दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कड़े आदेश के बाद अमेरिकी सेना ने पिछले 24 घंटों में ईरान पर अब तक का सबसे भीषण प्रहार किया है, जिसने दोनों देशों के बीच शांति के तमाम रास्तों पर पूरी तरह से पूर्ण विराम लगा दिया है। यह हमला ठीक उस वक्त हुआ जब ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा था। इस टाइमिंग ने पूरी खाड़ी को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है।

ट्रंप का ट्रेलर: समंदर से बरसीं मिसाइलें, चाबहार से तेहरान तक हाहाकार

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के निर्देश पर अरब सागर और ओमान की खाड़ी में तैनात अमेरिकी युद्धपोतों से फाइटर जेट्स और स्टील्थ बमवर्षकों ने उड़ान भरी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के चप्पे-चप्पे पर घातक मिसाइलों की बौछार कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए खुलेआम कहा:

“हमने ईरान पर बेहद जोरदार और उसकी सोच से 20 गुना ज्यादा ताकत से पलटवार किया है। ईरान ने हमारे दो नहीं, बल्कि तीन जहाजों को निशाना बनाया था, जिसका जवाब उसे मिल चुका है। सैन्य मोर्चे पर ईरान पूरी तरह पस्त हो चुका है, अब उनके पास कुछ नहीं बचा। वे किसी भी तरह समझौता करना चाहते हैं और उन्होंने कुछ देर पहले ही फोन भी किया था, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।”

अमेरिकी फाइटर जेट्स ने इस ऑपरेशन में ईरान के करीब 150 से ज्यादा सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर 170 से ज्यादा मिसाइलें दागीं। इस दौरान ईरान के प्रमुख व्यापारिक केंद्र चाबहार पोर्ट, बुशह्र पोर्ट और बंदर अब्बास पोर्ट पर भयंकर धमाके हुए। राजधानी तेहरान के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मुख्य रनवे इस हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यही नहीं, अमेरिकी बमवर्षकों ने तेहरान और मशहद को जोड़ने वाले मुख्य रेलवे नेटवर्क और दो बड़े पुलों को भी जमींदोज कर दिया, जिससे अयातुल्लाह खामेनेई के जनाजे में जा रहे 50 हजार से ज्यादा जायरीन बीच रास्ते में ही फंस गए। शुरुआती दावों के मुताबिक, इन हमलों में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

ईरान का पलटवार: अमेरिकी सैन्य बेसों को मिसाइलों से दहलाया

अमेरिकी हमलों के आगे घुटने टेकने के बजाय ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की झड़ी लगा दी। ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के मुख्य बेस ‘जुफैर’ और ‘शेख ईसा’ एयरबेस को निशाना बनाया, जिससे वहां भारी नुकसान का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा कुवैत के ‘अली अल सलेम’ बेस और जॉर्डन के ‘अजराक एयर बेस’ पर भी ईरान की मिसाइलें आकर गिरीं। खाड़ी क्षेत्र में इस समय 20 से ज्यादा अमेरिकी वॉरशिप गश्त कर रहे हैं और आसमान में लड़ाकू विमानों की आवाजें गूंज रही हैं।

ईरान की हिटलिस्ट में नंबर-1 बने डोनाल्ड ट्रंप, मशहद में लगे ‘मौत के बैनर’

अयातुल्लाह अली खामेनेई के सुपुर्द-ए-खाक कार्यक्रम के बीच हुए इस हमले ने ईरानी जनता के भीतर अमेरिका और खासकर डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ गुस्से की आग को भड़का दिया है। मशहद शहर के एक मुख्य चौराहे पर ट्रंप की तस्वीर के साथ एक बड़ा बैनर लगाया गया है, जिस पर साफ अक्षरों में लिखा है— “हम तुम्हें मार देंगे ट्रंप”। पूरा ईरान इस समय प्रतिशोध की मांग कर रहा है। दरअसल, ईरान ट्रंप को अपना सबसे बड़ा और शाश्वत दुश्मन मानता है, क्योंकि:

  1. वो ट्रंप ही थे जिनके आदेश पर ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की बगदाद में ड्रोन हमले में हत्या की गई थी।

  2. वो ट्रंप ही हैं जिन्होंने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर उस एयरस्ट्राइक की अनुमति दी थी, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की जान चली गई थी।

  3. ट्रंप ने ही ईरान पर कड़े वैश्विक आर्थिक प्रतिबंध लगाए और ऐतिहासिक परमाणु डील (JCPOA) को एकतरफा तोड़ दिया था।

खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से यह स्वीकार किया है कि वे इस समय ईरान की हिटलिस्ट में पहले पायदान पर हैं और उनकी जान को गंभीर खतरा है।

मिसाइल के डर से बीच आसमान में बदला राष्ट्रपति का विमान

ईरानी खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तुर्किये में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन लौटते वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में एक अभूतपूर्व बदलाव देखा गया। ट्रंप कतर के अमीर द्वारा तोहफे में मिले 400 मिलियन डॉलर के आलीशान और अत्याधुनिक कस्टमाइज्ड विमान से नाटो समिट पहुंचे थे। लेकिन वापसी के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला कि इस नए विमान का सुरक्षा अपग्रेडेशन अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है और इसमें कई एंटी-मिसाइल सिस्टम लगने बाकी हैं।

इसके बाद, जैसे ही ट्रंप का विमान ईरान की मिसाइल रेंज के दायरे में आया, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने प्लान बदल दिया। ट्रंप को रास्ते में ही यूनाइटेड किंगडम (UK) में उतारा गया और वहां वे कतर वाले विमान को छोड़कर करीब तीन दशक पुराने ‘एयर फोर्स वन’ (Air Force One) में सवार हुए। पुराने एयर फोर्स वन में अत्यधिक उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम, न्यूक्लियर ब्लास्ट रेसिस्टेंस टेक्नोलॉजी और लेजर जैमर्स लगे हैं, जो दुश्मन की मिसाइलों का रास्ता भटकाने में सक्षम हैं। विमान बदलने के बाद ही ट्रंप को सुरक्षित वाशिंगटन पहुंचाया गया।

वाशिंगटन में हाई अलर्ट: ‘मुख्तार यूनिट’ और मेक्सिकन कार्टेल रच रहे हत्या की साजिश!

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA और FBI) के मुताबिक, वाशिंगटन डीसी और व्हाइट हाउस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया गया है। खुफिया इनपुट्स हैं कि ईरान ने अमेरिका के भीतर मौजूद अपने ‘स्लीपर सेल्स’ को एक्टिव कर दिया है। इजरायली खुफिया चैनल (Channel C14) की एक बेहद गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, IRGC की कुद्स फोर्स ने ट्रंप के खात्मे के लिए एक बेहद खतरनाक हाइब्रिड विंग तैयार की है, जिसे ‘मुख्तार यूनिट’ का नाम दिया गया है।

यह यूनिट एक सामान्य सैन्य टुकड़ी नहीं है, बल्कि इसमें ईरान के सबसे शातिर और अनुभवी स्नाइपर्स, टॉप-लेवल के साइबर हैकर्स, लॉजिस्टिक एक्सपर्ट्स और जासूस शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि यह मुख्तार यूनिट ट्रंप की हर पल की लोकेशन ट्रैक करने के लिए अमेरिकी खुफिया प्रणालियों को हैक करने की कोशिश कर रही है। साथ ही, अमेरिका की सीमा में घुसपैठ करने के लिए मेक्सिकन ड्रग कार्टेल्स और विदेशों में बसे कट्टरपंथी ईरानियों के नेटवर्क का भी सहारा लिया जा रहा है। खाड़ी में शुरू हुआ यह बारूदी खेल अब सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति के दरवाजे तक पहुंच चुका है, जिससे पूरी दुनिया सहमी हुई है।

 

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