Wednesday , 9 September 2026

ताजमहल विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में: ‘तेजो महालय’ मंदिर होने के दावे पर वैज्ञानिक सर्वे की मांग, निचली अदालत के फैसले को चुनौती

प्रयागराज: आगरा स्थित दुनिया के सात अजूबों में शुमार और विश्व धरोहर ताजमहल (Taj Mahal) को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब देश की बड़ी अदालतों में से एक, इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की चौखट पर पहुंच गया है। ताजमहल परिसर को मूल रूप से ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय’ मंदिर होने का दावा करते हुए इसके वैज्ञानिक और न्यायिक सर्वेक्षण की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका आगरा की ट्रायल कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती देते हुए दायर की गई है, जिन्होंने परिसर का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया था।

साल 2015 से आगरा की अदालत में लंबित है मुख्य मुकदमा

इस पूरे विवाद की जड़ें करीब एक दशक पुरानी हैं। मामले के तथ्यों के अनुसार, साल 2015 में आगरा के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में एक दीवानी वाद (सिविल सूट) दायर किया गया था। इस मुकदमे में मुख्य रूप से यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि वर्तमान में जिसे ताजमहल परिसर कहा जाता है, वह असल में प्राचीन ‘तेजो महालय’ यानी तेजोलिंग महादेव मंदिर है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, वहां भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान हैं। यह मूल मुकदमा अभी भी आगरा की ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है। इसी मुकदमे की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से परिसर का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की गुहार लगाई थी।

निचली अदालतों से नहीं मिली राहत, अब हाईकोर्ट से उम्मीद

याचिकाकर्ताओं को आगरा की निचली अदालतों से तगड़ा झटका लगा था। सबसे पहले सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने ताजमहल परिसर के सर्वे की मांग वाले प्रार्थना पत्र को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ आगरा के ही अपर जिला जज (ADJ) की अदालत में अपील दायर की गई, लेकिन वहां भी याचिकाकर्ताओं की दलीलें काम नहीं आईं और अर्जी खारिज कर दी गई। दोनों निचली अदालतों द्वारा सर्वे की मांग को ठुकराए जाने के बाद अब याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग को लेकर सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

जानिए किसने दायर की है याचिका और कौन हैं प्रतिवादी?

हाईकोर्ट में यह महत्वपूर्ण याचिका संयुक्त रूप से दाखिल की गई है। इसमें खुद ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय’ को पक्षकार बनाया गया है। इनके साथ ही मशहूर अधिवक्ता हरि शंकर जैन और चार अन्य सनातन धर्मियों की ओर से यह याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने इस कानूनी लड़ाई में भारत सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अन्य संबंधित विभागों को प्रतिवादी (Opposite Party) बनाया है, जिनसे इस पूरे मामले पर जवाब मांगा जा सकता है।

वैज्ञानिक सर्वे से ही साफ होगा सच, याचिका में सीपीसी का हवाला

याचिकाकर्ताओं का पुरजोर तर्क है कि ताजमहल परिसर के वास्तविक स्वरूप, प्राचीन इतिहास और ऐतिहासिक तथ्यों को पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए न्यायालय की निगरानी में एक निष्पक्ष और वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाना बेहद जरूरी है। इसके बिना मामले का सही निस्तारण नहीं हो सकता। याचिका में उत्तर प्रदेश में संशोधित सिविल प्रोसीजर कोड (CPC) की धारा 115 का हवाला देते हुए कहा गया है कि पुनरीक्षण (Revision) कोर्ट को यह विशेष अधिकार प्राप्त है कि यदि कोई आदेश न्याय की विफलता का कारण बनता है या किसी पक्ष को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है, तो अदालत को उसमें तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, निचली अदालत का आदेश सीपीसी के नियमों के खिलाफ है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।

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