Friday , 24 July 2026

शरद पवार का सियासी दांव: जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन को समर्थन के बाद पीएम मोदी से मुलाकात, अटकलें तेज

नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार एक बार फिर अपनी अनूठी राजनीतिक रणनीति को लेकर देशभर के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। मंगलवार को उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके से मुलाकात की और NEET पेपर लीक के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन को अपना खुलकर समर्थन दिया। इसके ठीक अगले ही दिन, पवार अपनी बेटी व सांसद सुप्रिया सुले के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे।

लगातार दो मुलाकातों से बढ़ा सस्पेंस, किस तरफ है पवार का रुख?

24 घंटे के भीतर दो विपरीत धुरों से हुई इन मुलाकातों ने देश की राजनीति में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों और चर्चाओं के मुताबिक, लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि पवार आखिर किस खेमे के करीब जाने की रणनीति बना रहे हैं। जानकारों का यह भी मानना है कि इन मुलाकातों के पीछे सिर्फ NEET और छात्र आंदोलन ही वजह नहीं है, बल्कि आगामी परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को लेकर भी पवार अपनी गहरी बिसात बिछा रहे हैं।

दोनों धड़ों से संपर्क में पवार, क्या परिसीमन बिल पर बनी रणनीति?

शरद पवार की पार्टी ने अब तक परिसीमन बिल को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है। माना जा रहा है कि वह विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों से संवाद कायम रखकर हर स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं। एक तरफ जंतर-मंतर पर उन्होंने NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों का समर्थन किया, तो वहीं तुरंत बाद पीएम मोदी से मुलाकात कर राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी। जून में जहां एनसीपी (एसपी) के कांग्रेस में विलय की खबरें आई थीं, वहीं जुलाई में उनके एनडीए के करीब जाने की चर्चाएं भी उठी थीं।

2019 में भी दिखा चुके हैं अपने राजनीतिक संतुलन का हुनर

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पवार अपने करियर के इस मोड़ पर पार्टी और अपने समर्थकों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रखना चाहते हैं। वर्तमान में उनकी पार्टी के पास लोकसभा में 8 सांसद और महाराष्ट्र विधानसभा में 10 विधायक हैं। इससे पहले 2019 में भी उन्होंने उद्धव ठाकरे और कांग्रेस को साथ लाकर विपक्षी गठबंधन बनाया था, जबकि उसी दौरान उनके भतीजे अजित पवार बीजेपी के संपर्क में थे। शरद पवार के बारे में कहा जाता है कि वह अंतिम क्षण तक अपनी रणनीति का खुलासा नहीं करते हैं।

सुप्रिया सुले ने अटकलों पर दिया जवाब

हाल ही में पार्टी नेता सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल और पार्टी की रणनीति पर कहा था कि शरद पवार का मानना है—”अगर किसी नेता की चर्चा हो रही है, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, तो इसका अर्थ है कि उसकी राजनीतिक हैसियत आज भी मजबूत है।” सुले ने यह भी संकेत दिए थे कि यदि सरकार कुछ उचित शर्तों के साथ परिसीमन बिल दोबारा लाती है, तो उस पर विचार संभव है। हालांकि, उन्होंने एनडीए में शामिल होने से जुड़ी सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया था।

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