
अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और चंदे की चोरी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। पुलिस और एसआईटी (SIT) की तफ्तीश में जो कड़ियां जुड़ रही हैं, वे किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं। ताजा खुलासे के अनुसार, यह कोई साधारण चोरी नहीं बल्कि एक सुसंगठित गिरोह (Organized Gang) द्वारा रची गई गहरी साजिश थी, जिसके तहत मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये का गबन किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव की शह पर यह पूरा काला खेल महीनों से बेखौफ चल रहा था।
ड्राइवर टिन्नू की हनक के आगे सुरक्षाकर्मी भी रहते थे पस्त
पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर चंपत राय का पूरा वरदहस्त था। टिन्नू न तो ट्रस्ट का कोई पदाधिकारी था और न ही किसी आधिकारिक इकाई का सदस्य, लेकिन इसके बावजूद मंदिर प्रबंधन और उसके आंतरिक कार्यों में उसका दखल शीर्ष स्तर पर था। उसकी हनक और दबदबा इस कदर था कि मंदिर के सुरक्षाकर्मी भी उसके आने-जाने या गतिविधियों पर कभी कोई सवाल उठाने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। इसी भारी दबदबे और छूट का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की भारी-भरकम नकदी को बेहद आसानी से गायब करने का खेल शुरू हुआ।
इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव ने तैयार किया था पूरा गिरोह, ऐसे बंटती थी रकम
इस पूरे महाघोटाले की रूपरेखा नोटों की गिनती करने वाले हॉल के इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव और ड्राइवर टिन्नू ने मिलकर तैयार की थी। साजिश के तहत, सुभाष श्रीवास्तव गणना हॉल में जानबूझकर टिन्नू के ही खास बंदों— अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्र की ड्यूटी लगाता था। चूंकि इस संवेदनशील काम में ड्यूटी लगाने को लेकर कोई आंतरिक टोका-टाकी या ऑडिट सिस्टम नहीं था, इसलिए ये आरोपी बेखौफ होकर नोटों की गड्डियां पार करते थे। दान पेटियों की चाबियों से लेकर पूरी निगरानी व्यवस्था टिन्नू के ही पास केंद्रित थी, जिसके चलते आरोपियों के मन से पकड़े जाने का डर पूरी तरह खत्म हो चुका था। चोरी की गई रकम को बाद में सभी आरोपियों में एक तय हिस्सेदारी के तहत बांट दिया जाता था।
बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को भी जाता था फिक्स हिस्सा!
इस पूरे खेल का सबसे सनसनीखेज पहलू बैंक कर्मियों की संलिप्तता को लेकर सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चंदा चोरी के इस बड़े नेक्सस में कुछ बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी पूरी तरह शामिल थे। टिन्नू और सुभाष इन बैंक वालों को चुप रखने और हेराफेरी को दबाने के लिए हर बार एक तय हिस्सा (कमिशन) दिया करते थे। एसआईटी को ऐसे पुख्ता साक्ष्य भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि कई बार बैंक कर्मियों ने खुद भी सीधी रकम पार करने में गिरोह की मदद की थी।
हाईटेक कैमरों के सामने करोड़ों की लूट, ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी शक की सुई
राम मंदिर जैसे अति-सुरक्षित और हाईटेक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों से लैस परिसर में इतने बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपये की रकम गायब हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। इतने संवेदनशील कार्य की पूरी कमान एक ड्राइवर के हाथों में सौंप देना और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों का आंखें मूंदे रहना, अब गहरी जांच का विषय बन गया है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि यह महज एक बड़ी लापरवाही थी या फिर इसमें अंदरूनी मिलीभगत शामिल थी? हालांकि, वर्तमान एफआईआर में ट्रस्ट के पदाधिकारियों का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन एसआईटी और पुलिस की विस्तृत विवेचना के केंद्र में पूर्व महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका भी शामिल है। जांच एजेंसी बारीकी से पड़ताल कर रही है कि इस महाघोटाले के तार और कहां तक जुड़े हुए हैं।
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