नई दिल्ली/अयोध्या। अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि में कथित तौर पर हुई बड़ी वित्तीय अनियमितता और गबन का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। इस पूरे कथित घोटाले की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर दायर एक बेहद अहम जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज, यानी 13 जुलाई को सुनवाई करने जा रहा है। पूरे देश की निगाहें इस वक्त शीर्ष अदालत की इस कार्यवाही पर टिकी हुई हैं।
इस संवेदनशील और हाईप्रोफाइल मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वीएस मोहना की विशेष पीठ करने वाली है। अदालत ने इस मामले को वरिष्ठ वकील अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से संयुक्त रूप से दायर याचिका पर विचार करने के लिए सूचीबद्ध (List) किया है।
गौरतलब है कि इससे पहले जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) के सामने आया था, तब अदालत ने इस पर जल्द सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया था। लेकिन अब नियमित पीठ इस पर विचार करने जा रही है। शीर्ष अदालत में दायर इस याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की निगरानी में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए। यह समिति बारीकी से जांच करे कि रामलला के चरणों में अर्पित किए गए दान की राशि में कोई गबन, भ्रष्टाचार या वित्तीय धोखाधड़ी हुई है या नहीं, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
यूपी में ताबड़तोड़ एक्शन, आरोपियों पर कसा शिकंजा
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई एक ऐसे नाजुक मोड़ पर हो रही है, जब उत्तर प्रदेश में इस कथित गबन को लेकर पहले से ही प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है। यूपी पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले में लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही हैं। बीते 7 जुलाई को अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए कुल आठ आरोपियों में से तीन मुख्य आरोपियों—अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को एक दिन की पुलिस कस्टडी (रिमांड) में भेजा था ताकि उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा सके। इससे पहले, बीती 29 जून को स्थानीय अदालत ने इस मामले के सभी आठ आरोपियों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया था।
SIT की जांच में चौंकाने वाले खुलासे, कपड़ों और जूतों में छिपाया जा रहा था कैश
राम मंदिर के दान में भारी हेराफेरी के गंभीर आरोप सामने आने के बाद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बीते 13 जून को एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इस एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त (डिविजनल कमिश्नर) विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन जैसे बेहद कड़क और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने हर किसी को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, राम मंदिर के काउंटिंग रूम (कैश गिनती कक्ष) में सुरक्षा व्यवस्था की बेहद गंभीर और खतरनाक चूक सामने आई है। एसआईटी का स्पष्ट सुझाव है कि मंदिर में दान की यह चोरी कोई अचानक या एक बार में हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह बेहद ‘सिस्टेमैटिक’ यानी एक सोची-समझी साजिश के तहत बार-बार अंजाम दी जा रही थी।
सूत्रों के मुताबिक, जब जांच टीम ने मंदिर परिसर के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाला, तो आंखें फटी की फटी रह गईं। 27 अप्रैल से लेकर 5 जून के बीच करीब 70 ऐसी संदिग्ध घटनाएं कैमरे में कैद हुईं, जिसमें पैसे गिनने वाला स्टाफ (Counting Staff) कथित तौर पर नोटों के बंडल को बड़ी चालाकी से अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अपने अन्य निजी सामानों में छिपाते हुए साफ नजर आया।
सुरक्षा में भारी चूक, एंट्री-एग्जिट पर नहीं होती थी स्टाफ की तलाशी
एसआईटी की तफ्तीश में यह भी बात सामने आई है कि जहां देश के सबसे बड़े और वीवीआईपी मंदिरों में से एक की सुरक्षा इतनी अभेद्य होनी चाहिए थी, वहीं काउंटिंग हॉल के एंट्री (प्रवेश) और एग्जिट (निकास) पॉइंट पर पैसे गिनने वाले कर्मचारियों की कोई ढंग से शारीरिक तलाशी ही नहीं ली जाती थी। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के बैग और अन्य निजी सामानों की मॉनिटरिंग के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम मौजूद नहीं थे, जिसका फायदा इन आरोपियों ने उठाया।
इस बड़े विवाद के बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सम्मानित सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने चल रही एसआईटी जांच पर पूरा भरोसा जताया है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के वीआईपी दर्शन पास (VIP Darshan Pass ID) को ब्लॉक कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच पारदर्शी तरीके से चल रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यूपी की सियासत में भूचाल, सीएम योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
रामलला के चढ़ावे में चोरी और वित्तीय अनियमितता के इस कथित मामले ने उत्तर प्रदेश की सियासत के पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सूबे की मुख्य विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट पर हमलावर हैं और इस महाघोटाले पर जवाबदेही तय करने की मांग कर रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि आस्था के केंद्र में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त से बाहर है।
दूसरी ओर, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। सीएम योगी ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राम मंदिर के लिए देश-विदेश से आए पवित्र दान की राशि का गलत इस्तेमाल करने वाले या इसमें सेंध लगाने वाले किसी भी व्यक्ति को कतई बख्शा न जाए। ऐसे तत्वों के खिलाफ ऐसी सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो एक मिसाल बनेगी।
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