Monday , 13 July 2026

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट फिर विवादों में: चंपत राय पर लगा करोड़ो के गबन और मंदिर हथियाने का संगीन आरोप!

अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चढ़ावे में चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एक और बड़े विवाद में घिर गए हैं। इस बार उन पर अयोध्या के ही एक ऐतिहासिक मंदिर की करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने, अवैध कब्जे और वित्तीय हेरफेर के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। अयोध्या निवासी हरिशंकर सफरीवाला ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) को एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

देवोत्तर संपत्ति को जबरन खरीदने और बेचने का सनसनीखेज आरोप

शिकायतकर्ता हरिशंकर सफरीवाला का दावा है कि वह रामकोट (अयोध्या) स्थित ‘श्री राम निवास मंदिर, बरहटा’ की पंच समिति के प्रमुख और मुख्य कार्यपालक हैं। उनकी नियुक्ति 30 दिसंबर 1987 को तत्कालीन महंत रामगोपाल दास ने की थी। आरोप के मुताबिक, चंपत राय को पूरी जानकारी थी कि यह मंदिर और उसकी जमीन एक ‘देवोत्तर संपत्ति’ (भगवान की संपत्ति) है, जिसे कानूनी रूप से खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद, चंपत राय और उनके सहयोगियों ने मिलकर इस बेशकीमती जमीन का सौदा लगभग 5 करोड़ 80 लाख रुपये में तय कर लिया।

शिकायत में कहा गया है कि चंपत राय की फोटो लगे एक पंजीकृत बयानामा (बिना कब्जा नाम का दस्तावेज) के जरिए 70 लाख रुपये बतौर पेशगी (एडवांस) दिए गए। आरोप है कि यह भारी-भरकम रकम मंदिर के आधिकारिक खाते में जमा ही नहीं हुई और इसका पूरी तरह से गबन कर लिया गया।

भगवान के आभूषण और सोने-चांदी के बर्तन गायब करने का दावा

सफरीवाला ने अपनी शिकायत में सीधे तौर पर चंपत राय और उनके करीबियों पर मंदिर पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, मंदिर प्रबंधन से जुड़े मूल पंचों का परिसर में प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है और मंदिर कार्यालय पर कब्जा कर लिया गया है। यही नहीं, शिकायतकर्ता का आरोप है कि मंदिर की आलमारी और कीमती फर्नीचर के साथ-साथ भगवान की प्राचीन मूर्तियां, उनके जेवर, सोने की परत चढ़ा पलंग और सोने-चांदी के बेशकीमती बर्तन भी कब्जे में ले लिए गए हैं। इन आभूषणों का वर्तमान में कोई हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है। इस संबंध में अगस्त 2024 में एक कानूनी नोटिस भी भेजा गया था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला।

दुकानों से नकद वसूली और भारी मुआवजे की मांग

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंदिर के अधीन आने वाली दुकानों और भवनों को खाली कराने के नाम पर किरायेदारों से चेक या ड्राफ्ट के अलावा भारी मात्रा में नकद (कैश) धनराशि वसूली गई, जिसका कोई भी लेखा-जोखा ट्रस्ट के रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद अब एसआईटी का दरवाजा खटखटाया गया है।

SIT से शिकायतकर्ता ने की ये 6 बड़ी मांगें:

  • मूल कब्जा वापस मिले: श्री राम निवास मंदिर का पूरा नियंत्रण और कब्जा उसकी मूल प्रबंधन समिति (पंचायत समिति) को तुरंत वापस दिलाया जाए।

  • मूर्तियों और आभूषणों की सुरक्षा: मंदिर के सभी देवी-देवताओं की मूल मूर्तियां और गायब आभूषण सुरक्षित वापस कराए जाएं और उनकी गहन जांच हो।

  • कार्यालय की बहाली: मंदिर परिसर को खाली कराकर पंचायत समिति का कार्यालय, फर्नीचर और अन्य आवश्यक सामान लौटाया जाए।

  • 70 लाख की रिकवरी: फर्जी बयानामे के आधार पर दी गई 70 लाख रुपये की पेशगी रकम को दोबारा ट्रस्ट के खाते में जमा कराया जाए।

  • गहन वित्तीय जांच: एसआईटी इस बात का पता लगाए कि इस पूरे घोटाले में ट्रस्ट के कौन-कौन से पदाधिकारी शामिल हैं और कुल कितने करोड़ का गबन हुआ है।

  • 5 करोड़ रुपये का मुआवजा: मंदिर प्रबंधन समिति को हुए भारी मानसिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए कम से कम 5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया जाए।

 

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