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जेल सुरक्षा पर सवाल : कन्नौज के बाद अब अयोध्या जेल से कैदी फरार…आखिर सिस्टम में कहां हो रही चूक?

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की जेलें क्या अपराधियों के लिए सबसे सुरक्षित आरामगाह बन चुकी हैं? यह सवाल एक बार फिर अयोध्या जिला जेल से दो खूंखार कैदियों के फिल्मी स्टाइल में फरार होने के बाद गर्मा गया है. कन्नौज जेल ब्रेक की घटना अभी पुरानी भी नहीं हुई थी कि अयोध्या में हत्या और दुष्कर्म जैसे संगीन मामलों में बंद दो कैदियों ने 20 फुट ऊंची दीवार को भेदकर पूरी व्यवस्था के मुंह पर कालिख पोत दी. इस घटना ने ‘हाईटेक जेल’ के दावों की पोल खोलकर रख दी है और एक बार फिर जेल प्रशासन की भारी लापरवाही को उजागर किया है.

आधी रात का ऑपरेशन, सोता रहा जेल प्रशासन

यह सनसनीखेज वारदात बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात की है. सुल्तानपुर निवासी शेर अली और अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि, जो हत्या और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में बंद थे, उन्हें जेल की स्पेशल सेल नंबर-4 में रखा गया था. बुधवार शाम की गिनती के बाद दोनों को बैरक में बंद कर दिया गया. लेकिन गुरुवार सुबह जब गिनती के लिए बैरक का ताला खोला गया तो अंदर कोई नहीं था. जेल प्रशासन के होश तब उड़े जब उन्होंने देखा कि बैरक का रोशनदान टूटा हुआ है और पीछे की दीवार में एक बड़ा सा छेद है, जिसमें से दर्जनों ईंटें निकली हुई थीं. यह साफ था कि दोनों कैदी रात के अंधेरे का फायदा उठाकर नौ दो ग्यारह हो चुके थे.

एक रात का खेल या महीनों की प्लानिंग?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पूरी प्लानिंग एक रात में हुई? मजबूत दीवार को काटना, दर्जनों ईंटें निकालना और फिर 20 फीट ऊंची दीवार फांदकर भाग जाना बिना किसी तैयारी और मदद के लगभग नामुमकिन है. आखिर कैदियों के पास दीवार काटने के औजार कहां से आए? जब वे दीवार तोड़ रहे थे तो उसकी आवाज किसी को क्यों नहीं सुनाई दी? जेल के अंदर लगे हाईटेक सीसीटीवी कैमरे क्या सिर्फ शोपीस बनकर रह गए? इस घटना ने जेल के अंदर मुखबिर तंत्र के फेल होने पर भी मुहर लगा दी है, क्योंकि इतनी बड़ी प्लानिंग की भनक किसी को कानों-कान नहीं लगी.

लखनऊ तक हिला सिस्टम, हुई बड़ी कार्रवाई

मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया. एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर और डीएम निखिल टिकाराम फौरन जेल पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजी जेल पी.सी. मीणा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में वरिष्ठ जेल अधीक्षक उदय प्रताप मिश्रा, डिप्टी जेलर जितेंद्र कुमार यादव समेत दस जेलकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. लेकिन सवाल जस का तस है कि निलंबन की कार्रवाई क्या जेलों को अपराधियों के लिए ‘अभेद्य’ बना पाएगी? 

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