Tuesday , 23 June 2026

ओडिशा बैंक शर्मनाक कांड: मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचे बेबस भाई के मामले में बड़ा एक्शन, ब्रांच मैनेजर सस्पेंड, देशभर के ग्रामीण बैंकों के लिए कड़े नियम जारी

भुवनेश्वर/नई दिल्ली।  ओडिशा से कुछ समय पहले सामने आई एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसने हमारे बैंकिंग सिस्टम की संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी थीं। एक बेबस और मजबूर आदिवासी व्यक्ति को अपनी मृत बहन के सेविंग्स अकाउंट से उसकी जमा पूंजी निकालने के लिए सबूत के तौर पर उसका ‘कंकाल’ लेकर बैंक शाखा पहुंचना पड़ा था। इस अमानवीय और बेहद शर्मनाक घटना पर अब केंद्र सरकार ने कड़ा संज्ञान लेते हुए बेहद सख्त कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित बैंक के ब्रांच मैनेजर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है, साथ ही देशभर के ग्रामीण बैंकों के लिए कड़े नियम और निर्देश जारी किए गए हैं।

यह पूरी बड़ी कार्रवाई केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को लिखे गए एक आधिकारिक पत्र के बाद सार्वजनिक हुई है। दरअसल, नवीन पटनायक ने बीती 2 मई को केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर बैंक में प्रक्रियात्मक देरी और नियमों की आड़ में एक गरीब आदिवासी परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का मुद्दा बेहद आक्रामक ढंग से उठाया था।

खाते में नॉमिनी न होने के चलते फंसा था पैसा, नियम बने थे काल

नवीन पटनायक के पत्र का बिंदुवार जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि ओडिशा ग्रामीण बैंक (OGB) के माध्यम से इस पूरे संवेदनशील मामले की गहन और उच्च स्तरीय जांच कराई गई। बैंक की आंतरिक रिपोर्ट के मुताबिक, मृत महिला खाताधारक ‘कालरा मुंडा’ के अकाउंट में कोई भी जीवित नॉमिनी (Nominee) दर्ज नहीं था। बैंकिंग नियमों के तहत ऐसी स्थिति में क्लेम के निपटारे के लिए डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाण पत्र) या कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) के प्रामाणिक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य था, जिसे लेकर बैंक कर्मचारी अड़े हुए थे।

केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि इस अमानवीय विवाद के मीडिया में आने और स्थानीय प्रशासन के तुरंत हस्तक्षेप के बाद युद्धस्तर पर जरूरी कानूनी दस्तावेज तैयार कराए गए। इसके बाद मृतका के खाते में जमा कुल 19,402 रुपये की क्लेम राशि उसके भाई जीतू मुंडा और दो अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों को सम्मानपूर्वक सौंप दी गई।

मल्लिपोसी ब्रांच के मैनेजर पर गिरा सस्पेंशन का हंटर

केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने अपने पत्र में साफ तौर पर लिखा कि फाइनेंशियल सर्विसेज डिपार्टमेंट (DFS) ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। यह सच है कि बैंकिंग कामकाज में तय कानूनी प्रक्रियाओं और सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि इन नियमों को पूरी संवेदनशीलता, सहानुभूति और प्रभावी मानवीय बातचीत के साथ लागू किया जाए, खासकर तब जब ग्राहक ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के सीधे-साधे लोग हों।

इस घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के लिए सबसे पहले ओडिशा ग्रामीण बैंक (OGB) ने कड़ा कदम उठाते हुए घटना वाली मल्लिपोसी ब्रांच के मैनेजर को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा, बैंक बोर्ड की मंजूरी के बाद OGB ने अपने सभी फील्ड कर्मचारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है, ताकि भविष्य में ग्राहकों को पारदर्शी, त्वरित और सम्मानजनक सेवाएं मिल सकें।

देश के सभी 28 ग्रामीण बैंकों (RRB) के लिए सख्त एडवाइजरी जारी

ओडिशा की इस भयावह घटना का असर अब देश के बैंकिंग रिफॉर्म्स (बैंकिंग सुधारों) पर भी साफ तौर पर दिखने लगा है। देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks) में नागरिकों को केंद्र में रखकर बैंकिंग सेवाएं बेहतर करने और ऐसी अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति को हमेशा के लिए रोकने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।

विभाग ने देश के सभी RRB को एक सख्त और नॉन-नेगोशिएबल एडवाइजरी जारी कर निर्देश दिया है कि वे ग्रामीण, आदिवासी और समाज के अन्य कमजोर व पिछड़े वर्गों के ग्राहकों के साथ डील करते समय तेजी से जवाब देने वाली, संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और पारदर्शी सेवा प्रणाली सुनिश्चित करें। नियमों का हवाला देकर किसी भी जरूरतमंद को परेशान करने वाले कर्मचारियों पर अब सीधे बर्खास्तगी की गाज गिरेगी।

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