
नई दिल्ली / भोपाल। केंद्र सरकार की ओर से 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने की घोषणा के बाद देश के खुदरा बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बनने लगा है। नई व्यवस्था प्रभावी होने से पहले ही दिल्ली, भोपाल समेत देश के कई बड़े शहरों में इसका सीधा असर दिखना शुरू हो गया है। बाजारों में कई व्यापारियों ने काउंटर से डिजिटल पेमेंट के क्यूआर कोड हटाने शुरू कर दिए हैं और ग्राहकों से साफ शब्दों में नकद भुगतान की मांग की जा रही है।
‘कैश लाओ, तभी सामान मिलेगा’—दुकानों से लौटने लगे ग्राहक राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों के प्रमुख शहरों में किराना दुकानों, फल विक्रेताओं और चाय स्टॉलों तक पर इसका असर दिख रहा है। कई दुकानदारों ने डिजिटल पेमेंट लेने से मना करते हुए खरीदारों से कह दिया कि पहले नकद लेकर आएं, तभी खरीदारी होगी। सरकार के नए निर्देश के अनुसार 2,000 रुपये तक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे, जबकि इससे ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर (अधिकतम 300 रुपये तक) वसूला जाएगा। हालांकि, महीने में एक लाख रुपये से कम का यूपीआई लेन-देन करने वाले छोटे कारोबारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन इसके बावजूद व्यापारी वर्ग में गहरा असंतोष है।
त्योहारी सीजन में बढ़ेगा संकट, व्यापार मंडलों ने दी आंदोलन की चेतावनी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ समेत कई जिलों में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडलों ने आपातकालीन बैठकें बुलाकर कड़ा ऐतराज जताया है। व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारी सीजन सिर पर है और थोक से लेकर खुदरा खरीद में बड़ा हिस्सा ऑनलाइन भुगतान का होता है। अगर कोई ग्राहक 5,000 रुपये का सामान लेता है, तो अतिरिक्त एमडीआर शुल्क का सीधा बोझ दुकानदार पर पड़ेगा। भोपाल के कचौड़ी विक्रेता सुरेश के मुताबिक, ग्राहक अब जेब में कैश नहीं रखते; ऐसे में ऑनलाइन भुगतान बंद होने से दुकानदारी बुरी तरह प्रभावित होगी।
पर्स भूलने की आदत पर लगा ब्रेक, फिर बढ़ेगी ATM की दौड़ यूपीआई के इस नए नियम से आम उपभोक्ता भी परेशान हैं। इंदौर और भोपाल के ग्राहकों का कहना है कि मोबाइल से भुगतान उनकी दिनचर्या बन चुका था, जिससे कैश चोरी या गुम होने का डर खत्म हो गया था। अब अगर दुकानदार क्यूआर कोड हटाते हैं, तो मजबूरी में जेब में नकदी रखनी होगी और लोगों को एक बार फिर नकदी निकासी के लिए एटीएम के चक्कर काटने पड़ेंगे।
‘डिजिटल इंडिया के साथ धोखा’: देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने इस प्रस्ताव को डिजिटल इंडिया की मूल भावना पर कुठाराघात बताया है। संगठन के प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप गंगा और प्रदेश संगठन मंत्री हरिकिशन अग्रवाल ने कहा कि देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने के लिए छोटे और मझोले व्यापारियों ने आगे बढ़कर डिजिटल लेन-देन को अपनाया था। अब लेन-देन पर शुल्क लगाना उनके साथ विश्वासघात जैसा है। व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो देश भर में बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा, क्योंकि इस कदम से अर्थव्यवस्था में फिर से नकद लेन-देन बढ़ेगा।
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