
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हूती विद्रोहियों के हमलों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक व्यापार मार्ग गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर आवाजाही ठप पड़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में ओमान ने भारत के सामने अपने बेहद रणनीतिक सोहार पोर्ट (Sohar Port) के इस्तेमाल की मजबूत पेशकश की है। यह कदम न केवल भारत के लिए फारस की खाड़ी से कच्चा तेल मंगाना आसान बनाएगा, बल्कि अमेरिका, खाड़ी देशों और अफ्रीका तक भारतीय व्यापार को भी सुरक्षित और किफायती रास्ता देगा।
भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई धार भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के संदर्भ में ओमान के राजदूत ईसा सालेह अब्दुल्ला सालेह अलशिबानी ने एक विशेष प्रमोशनल कार्यक्रम के दौरान कहा कि सोहार और ओमान के प्रमुख बंदरगाह भारत के मैन्युफैक्चरिंग विस्तार के लिए मध्य-पूर्व और उससे आगे के विशाल क्षेत्रों के लिए एक बड़ा प्रवेश द्वार (Gateway) बन रहे हैं। उन्होंने भारतीय उद्योग जगत को इन अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया है।
पोर्ट के साथ फ्री ट्रेड जोन का दोहरा लाभ फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के डीजी और सीईओ डॉ. अजय सहाय के अनुसार, सोहार पोर्ट की भौगोलिक स्थिति भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद फायदेमंद है। सोहार में अत्याधुनिक बंदरगाह के साथ-साथ एक सुव्यवस्थित फ्री ट्रेड जोन (FTZ) भी मौजूद है। इससे भारतीय कंपनियां न केवल व्यापार कर सकती हैं, बल्कि वहां सीधे निवेश और विनिर्माण (Manufacturing) इकाइयां भी स्थापित कर सकती हैं। फ्री ट्रेड जोन में वेयरहाउसिंग हब बनाकर पूर्वी अफ्रीका और खाड़ी देशों को कम लागत में माल की आपूर्ति संभव हो सकेगी।
भारतीय उद्योग पहले से ही इकोसिस्टम का हिस्सा नई दिल्ली में आयोजित बैठक में सोहार फ्रीजोन के सीईओ और सोहार पोर्ट के डिप्टी सीईओ ने स्पष्ट किया कि सोहार के अंतरराष्ट्रीय निवेश ढांचे में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में भारतीय कारोबारी पहले से ही वहां के औद्योगिक तंत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित होने के कारण यह बंदरगाह सीधे तौर पर होर्मुज के संघर्ष क्षेत्र से दूर है, जिससे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होती है।
यूएई रेल नेटवर्क से जुड़ेगा सोहार, सऊदी अरब भी दे रहा प्राथमिकता सोहार पोर्ट का महत्व इसलिए भी तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि इसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। रेल कनेक्टिविटी शुरू होने से सीमा पार माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी। इससे पहले ओमान ने दुक्म और सलालाह बंदरगाहों की पेशकश की थी, लेकिन उत्तर-पूर्वी ओमान में स्थित सोहार भारत के सबसे ज्यादा अनुकूल बैठता है। यूएई की तेल पाइपलाइनों और पूर्वी सऊदी अरब से सटा होने के कारण यह वर्तमान संकट में जीवनरेखा साबित हो रहा है। लाल सागर में पाइपलाइनों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब भी कच्चे तेल के सुरक्षित परिवहन के लिए सोहार बंदरगाह को प्राथमिकता देने में जुटा है।
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