Tuesday , 23 June 2026

NEET Re-Exam 2026: बिहार के लखीसराय में बहुत बड़ा भंडाफोड़, AIIMS और BHU के MBBS छात्र मूल परीक्षार्थियों की जगह दे रहे थे परीक्षा, बायोमेट्रिक कर्मियों समेत 30 गिरफ्तार

लखीसराय।  मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के आयोजन को लेकर जारी विवादों के बीच बिहार के लखीसराय से एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ आयोजित हुई नीट पुनर्परीक्षा (NEET Re-Exam 2026) के दौरान बड़े पैमाने पर चल रहे ‘स्कॉलर गैंग’ और फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से फर्जी अभ्यर्थियों (डमी कैंडिडेट्स), उनके सॉल्वर सहयोगियों और धांधली में मदद करने वाले बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कर्मियों सहित कुल 30 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच की परतें खुलते ही अधिकारियों के होश उड़ गए हैं, क्योंकि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फैला एक बेहद संगठित परीक्षा माफिया नेटवर्क है।

चार परीक्षा केंद्रों पर एक साथ रेड, चक्रव्यूह की तरह दबोचे गए संदिग्ध

यह पूरी कार्रवाई रविवार 21 जून को लखीसराय जिले के 4 निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर नीट पुनर्परीक्षा के दौरान अमल में लाई गई। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद जिला प्रशासन को बेहद पुख्ता खुफिया इनपुट मिला कि वास्तविक परीक्षार्थियों के स्थान पर मोटी रकम लेकर भाड़े के तेजतर्रार स्कॉलर परीक्षा हॉल में बैठे हुए हैं। सूचना को बेहद संवेदनशील मानते हुए अनुमंडल अधिकारी (SDO) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के नेतृत्व में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया। टीम ने बिना वक्त गंवाए केआरके कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और उच्च विद्यालय हसनपुर समेत चारों केंद्रों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिससे परीक्षा केंद्रों के भीतर और बाहर हड़कंप मच गया।

AIIMS, BHU और UCMS दिल्ली के MBBS व नर्सिंग छात्र बने ‘सॉल्वर’

पुलिस की कड़ी पूछताछ और परीक्षा फॉर्म के साथ दस्तावेजों के मिलान के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने शिक्षा जगत को शर्मसार कर दिया है। गिरफ्तार किए गए फर्जी परीक्षार्थियों में देश के सबसे प्रतिष्ठित और प्रीमियम मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे MBBS, आयुर्वेदिक और नर्सिंग के छात्र शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के लिए भी यह बेहद हैरान करने वाला विषय है कि जो छात्र खुद इतनी कठिन परीक्षा पास कर देश के शीर्ष संस्थानों में उच्च शिक्षा पा रहे हैं, वे चंद रुपयों के लालच में इस घिनौने अपराध के दलदल में कैसे उतर गए।

जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार कथित स्कॉलरों में एम्स रायबरेली (AIIMS), बीएचयू (BHU) वाराणसी, यूसीएमएस दिल्ली (UCMS), एनएमसीएच (NMCH) पटना, न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज, एएनएमसीएच (ANMCH) गया, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना और ओडिशा के सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज के छात्र शामिल हैं। इन मेधावी छात्रों को परीक्षा माफियाओं ने लाखों रुपये का लालच देकर दूसरों के भविष्य से खिलवाड़ करने के लिए तैयार किया था।

फर्जी पहचान पत्र तैयार कर बायोमेट्रिक सिस्टम को किया हैक!

गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। असली अभ्यर्थियों की जगह इन वीवीआईपी डमी परीक्षार्थियों को परीक्षा हॉल के भीतर सुरक्षित बैठाने के लिए गिरोह ने कूट रचित (Forged) दस्तावेज और नकली पहचान पत्र तैयार किए थे। केवल कागजी दस्तावेज ही नहीं बदले गए, बल्कि डिजिटल सुरक्षा घेरे को तोड़ने की भी पूरी तैयारी थी। आरोपियों ने परीक्षा केंद्र के भीतर तैनात बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) करने वाली एजेंसी के कर्मचारियों के साथ पहले से ही बड़ी सेटिंग कर रखी थी, ताकि अंगूठे के निशान और फेशियल रिकग्निशन के वक्त फर्जीवाड़ा पकड़ा न जा सके। इसी वजह से पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मौके पर मौजूद बड़ी संख्या में बायोमेट्रिक ऑपरेटरों और उनके सुपरवाइजरों को भी नामजद करते हुए अरेस्ट किया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पूरी सूची (नामजद):

  • फर्जी परीक्षा दे रहे स्कॉलर छात्र: मंतोष कुमार (न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज), विवेक कुमार (एएनएमसीएच गया), हिमांशु कुमार (गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना), सौरभ जीझा (AIIMS रायबरेली), पूनम कुमारी (BHU नर्सिंग), अमन अग्रवाल (यूसीएमएस दिल्ली), रौशन कुमार (एनएमसीएच पटना), चंचल कुमारी (गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, ओडिशा) और जितेंद्र कुमार।

  • मूल अभ्यर्थी और मुख्य सहयोगी: संजीत कुमार (मूल परीक्षार्थी), उसके दो सक्रिय मददगार अर्पित सिंह और रंजीत कुमार।

  • बायोमेट्रिक टीम और सुपरवाइजर: बादल कुमार, कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुंद कुमार, उदय कुमार, अखिलेश कुमार, मयंक कश्यप, विशाल कुमार, राकेश कुमार, अंकित कुमार, मोहित कुमार, सुदर्शन कुमार, अमलेश कुमार, अदिति कुमारी, घनश्याम कुमार, शंकर कुमार वर्मा, आर्यन कुमार और चंदन कुमार।

प्रभावशाली हो या माफिया, किसी को नहीं बख्शेंगे: जिलाधिकारी

लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रारंभिक जांच में बहुत बड़े पैमाने पर और सोचे-समझे तरीके से किए गए फर्जीवाड़े के पुख्ता डिजिटल और दस्तावेजी प्रमाण मिले हैं। पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए एसआईटी को काम पर लगा दिया गया है। जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “देश की इस सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता और पवित्रता से किसी भी प्रकार का समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस रैकेट के पीछे चाहे कितनी भी बड़ी और प्रभावशाली राजनीतिक या प्रशासनिक ताकत क्यों न हो, उसे ढूंढकर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”

यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि नीट परीक्षा के जरिए हर साल लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे दिन-रात मेहनत कर डॉक्टर बनने का सपना संजोते हैं। ऐसे में पैसे के दम पर सीट चुराने वाले इस संगठित गिरोह के पकड़े जाने के बाद अब बिहार से लेकर दिल्ली तक के परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

Check Also

लखनऊ अलीगंज अग्निकांड: जांच के लिए बनी 2 सदस्यीय हाई-लेवल SIT; जानें कौन हैं जांच करने वाले ये ‘सुपर कॉप’ और ‘IAS’ अधिकारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का अलीगंज इलाका सोमवार को एक भयावह त्रासदी का …