Tuesday , 18 August 2026

NEET Protest Case: ‘हमने अत्यधिक बल प्रयोग नहीं किया’, सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का हलफनामा; संसद मार्च और कीलों वाली लाठी पर दी सफाई

नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बर्बरता और अत्यधिक बल प्रयोग के गंभीर आरोप लगे थे, जिन्हें पुलिस ने शीर्ष अदालत में जवाबी हलफनामा दायर कर सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि भीड़ के उग्र होने और संसद की ओर जबरन बढ़ने के बाद ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित कार्रवाई की गई थी।

बैरिकेड्स तोड़कर संसद की तरफ बढ़ने से बिगड़े हालात डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) सचिन शर्मा द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया है कि 3 किलोमीटर के दायरे में 30 हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे, जिन्हें संभालने के लिए लगभग 5,000 पुलिसकर्मी तैनात थे। पुलिस के मुताबिक, संसद मार्च की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं थी, इसलिए यह जमावड़ा पूरी तरह गैर-कानूनी था। जब भीड़ के कुछ तत्वों ने कई लेयर के बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन की ओर बढ़ना शुरू किया, तब हालात बेकाबू हो गए। इसके चलते हुई हिंसक झड़प में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मियों व वर्दीधारी अधिकारियों के साथ करीब 200 नागरिक व प्रदर्शनकारी घायल हुए।

असामाजिक तत्वों की घुसपैठ और अधूरी वीडियो क्लिप का दावा दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि याचिकाएं चुनिंदा तस्वीरों, अधूरी वीडियो क्लिप और सोशल मीडिया की अपुष्ट रिपोर्टों पर टिकी हैं, जो एकतरफा तस्वीर पेश करती हैं। पुलिस का तर्क है कि प्रदर्शनकारियों की आड़ में असामाजिक तत्व और हिस्ट्रीशीटर भी शामिल हो गए थे। यह भी उल्लेख किया गया कि लगभग 2,873 संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, बलात्कार और पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनकी जांच दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) करेगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत द्वारा गठित किसी भी जांच समिति को पूरा सहयोग दिया जाएगा।

कीलों वाली लाठियों और सादे कपड़ों में स्पॉटर्स की तैनाती पर स्थिति स्पष्ट सोशल मीडिया पर वायरल कीलों वाली लाठी के आरोपों पर पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसी लाठी पुलिस के पास नहीं, बल्कि एक प्रदर्शनकारी के हाथ में थी, जिस पर राष्ट्रीय ध्वज लगा हुआ था। सामान्य लाठियों को भीड़ नियंत्रण का मान्य साधन बताते हुए पुलिस ने कहा कि अधिकारियों पर बिना उकसावे के हमले किए गए, जिसके वीडियो मौजूद हैं। वहीं, सादे कपड़ों में लाठी लिए पुलिसकर्मियों (स्पॉटर्स) की मौजूदगी पर कहा गया कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे बड़े आयोजनों की तरह स्पेशल ब्रांच, क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल के कर्मियों को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया था, जो पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को बताया आनुपातिक कदम प्रदर्शन स्थल पर फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों पर पुलिस ने कहा कि यह कदम पूरी तरह आनुपातिक पुलिसिंग के तहत उठाया गया था। पुलिस के अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी का निजी डेटा जुटाने या सामान्य निगरानी के लिए नहीं किया जाता। यह सॉफ्टवेयर केवल गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए काम में लिया जाता है, जिसके बाद जमीनी सत्यापन (फील्ड वेरिफिकेशन) भी अनिवार्य रूप से किया जाता है।

 

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