Friday , 10 July 2026

ITR Filing 2026: क्या हर NRI के लिए ITR में विदेशी संपत्ति का खुलासा करना जरूरी है? जानें टैक्स एक्सपर्ट्स का जवाब

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन अपने शबाब पर है। ऐसे में विदेशों में रह रहे भारतीयों (NRIs) और विदेशी संपत्ति रखने वाले करदाताओं के मन में एक बड़ा असमंजस है कि क्या उन्हें भी अपनी विदेशी संपत्तियों का ब्योरा टैक्स विभाग को देना होगा? टैक्स विशेषज्ञों की मानें तो इसका सीधा जवाब है— ‘नहीं’

केवल NRI होने मात्र से ITR में Schedule FA (Foreign Assets) भरना अनिवार्य नहीं हो जाता। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित वित्त वर्ष में आपका टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस (Residential Status) क्या रहा है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि टैक्स कानून इस बारे में क्या कहता है।

किसे भरना होगा Schedule FA?

आयकर कानून के मुताबिक, विदेशी संपत्तियों का खुलासा करने की जिम्मेदारी हर किसी की नहीं होती।

  • Resident and Ordinarily Resident (ROR): केवल वे करदाता जो भारत के ‘निवासी और साधारण निवासी’ (ROR) की श्रेणी में आते हैं, उनके लिए ITR में Schedule FA भरना अनिवार्य है।

  • NRI या RNOR: यदि कोई व्यक्ति नॉन-रेसिडेंट इंडियन (NRI) या ‘निवासी लेकिन असाधारण निवासी’ (RNOR) की श्रेणी में आता है, तो सामान्य परिस्थितियों में उसे Schedule FA भरने की कोई आवश्यकता नहीं होती।

काम की बात: अपना रिटर्न दाखिल करने का प्रोसेस शुरू करने से पहले किसी प्रोफेशनल की मदद से अपना सही रेजिडेंशियल स्टेटस जरूर कैलकुलेट कर लें।

विदेशी संपत्ति की कौन-कौन सी जानकारी देनी होती है?

जिन करदाताओं के लिए Schedule FA भरना तकनीकी रूप से जरूरी है, उन्हें अपनी निम्नलिखित विदेशी संपत्तियों का पूरा कच्चा-चिट्ठा देना होता है:

  • विदेशी बैंक खाते (Foreign Bank Accounts)

  • कस्टडी या डिपॉजिटरी अकाउंट

  • विदेशी कंपनियों के शेयर, म्यूचुअल फंड और बॉन्ड्स

  • विदेश में स्थित अचल संपत्ति (जैसे- घर, जमीन आदि)

  • विदेशी संपत्तियों से होने वाली कोई भी आय और खातों का अधिकतम बैलेंस (Peak Balance)

जानकारी छुपाने पर लग सकता है ‘ब्लैक मनी एक्ट’

टैक्स एक्सपर्ट्स सचेत करते हैं कि विदेशी संपत्ति की जानकारी छुपाना या ITR में गलत विवरण देना आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। ऐसी चूक होने पर ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत सख्त जांच हो सकती है। इसमें भारी-भरकम जुर्माने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। इसलिए नियमों के दायरे में आने वाले लोग पूरी सावधानी बरतें।

सही ITR फॉर्म का चुनाव है बेहद जरूरी

अगर आप पर Schedule FA लागू होता है, तो फॉर्म चुनते समय सावधानी रखें। आप ITR-1 या ITR-4 के जरिए अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते, क्योंकि इन फॉर्म्स में विदेशी संपत्तियों का विवरण देने का विकल्प ही नहीं होता। ऐसी स्थिति में करदाताओं को आमतौर पर ITR-2 या अन्य लागू फॉर्म का उपयोग करना पड़ता है। भविष्य में आयकर विभाग के किसी भी नोटिस या कानूनी झंझट से बचने के लिए अपने रेजिडेंशियल स्टेटस और विदेशी निवेश की सही जांच के बाद ही कदम बढ़ाएं।

 

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