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अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी का इनसाइड स्टोरी: हिडन कैमरों से खुला नोट उड़ाने का ‘बाथरूम कांड’; गड्डियों से ऐसे पार होते थे लाखों !

अयोध्या: राम नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रोजाना देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने और अपनी अटूट श्रद्धा के साथ दान पेटी में चढ़ावा चढ़ाने पहुंचते हैं। लेकिन इसी पावन धाम के भीतर बैठे कुछ जिम्मेदार लोगों ने भक्तों की आस्था और भरोसे का ऐसा जनाजा निकाला, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ही कुछ रसूखदार कर्मचारी चढ़ावे के पैसों और सोने-चांदी के जेवरातों पर हाथ साफ कर अपने महंगे शौक पूरे कर रहे थे।

इस महापाप के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज हो चुकी है और मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे दिन काट रहे हैं। लेकिन यह पूरा गंदा खेल आखिर कब से चल रहा था और कैसे हुआ इसका खौफनाक खुलासा? आइए आपको बताते हैं इस पूरी साजिश की अंदरूनी कहानी।

जब 6 लाख वाली दान पेटी में कम होने लगीं 500 की गड्डियां

इस सनसनीखेज चंदा चोरी का खुलासा मई महीने के आखिरी सप्ताह में हुआ। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े उच्च पदाधिकारियों ने जब बैंक में जमा हो रही रकम के सालाना और मासिक ब्यौरे का मिलान किया, तो उन्हें रोजाना खाली होने वाली दान पेटियों के आंकड़ों में भारी अंतर नजर आया।

आमतौर पर मंदिर की एक दान पेटी से एक बार में करीब 6 से 7 लाख रुपये की रकम निकलती थी। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से इन पेटियों से निकलने वाली 500 रुपये के नोटों की गड्डियों में लगातार कमी देखी जा रही थी। जब अधिकारियों का शक गहराया, तो उन्होंने बिना किसी को भनक लगे नोट गिनने वाले अति-सुरक्षित कमरे में कुछ गुप्त (Hidden) कैमरे लगवा दिए।

सीसीटीवी के सामने ‘दीवार’ बनकर खड़े होते थे साथी, कपड़ों में छिपती थी रकम

जब ट्रस्ट के अधिकारियों ने हिडन कैमरों की महज एक हफ्ते की फुटेज खंगाली, तो उनके होश उड़ गए। फुटेज में साफ दिखा कि नोट गिनने की प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी एक सोची-समझी साजिश के तहत काम कर रहे थे।

जब एक कर्मचारी नोटों की चोरी करता, तो उसका दूसरा साथी कमरे में पहले से लगे मुख्य सीसीटीवी कैमरे के ठीक सामने आकर ‘दीवार’ बनकर खड़ा हो जाता था ताकि चोरी की लाइव हरकत कैमरे में कैद न हो सके। इसी का फायदा उठाकर दूसरा आरोपी तैयार नोटों की गड्डियों से सीधे 500-500 के नोटों के बंडल उड़ाकर अपने कपड़ों में छुपा लेता था।

‘बाथरूम कांड’: पहले टॉयलेट में छिपाते थे गड्डियां, फिर घर पर बंटती थी डकैती की रकम

हिडन कैमरे की कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस को पता चला कि मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उसके अन्य साथी रकम पार करने के तुरंत बाद नोटों की गड्डियों को सीधे मंदिर के बाथरूम में ले जाकर छिपा देते थे। इसके बाद, जैसे ही ड्यूटी खत्म होती या मौका मिलता, वे सुरक्षा खामियों का फायदा उठाकर इन नोटों को मंदिर परिसर से बाहर निकाल लेते थे। इसके बाद अयोध्या के ही एक गुप्त मकान में इस चोरी की रकम का आपस में बराबर बंटवारा किया जाता था। जांच में सामने आया है कि यह काला खेल पिछले दो से तीन साल से लगातार जारी था।

वाउचर और एक्स्ट्रा नोटों का वो शातिर खेल, जिसे देख बैंक भी खा गया धोखा

इस सिंडिकेट ने चोरी का एक और बेहद शातिर तरीका खोज निकाला था। नोट गिनने वाले ये धोखेबाज कर्मचारी हर असली गड्डी में कुछ एक्स्ट्रा (अतिरिक्त) नोट जमा कर देते थे। नियम के मुताबिक, जब बैंक के पास यह रकम पहुंचती, तो बैंक अधिकारी हर एक गड्डी के एक-एक नोट को अलग से गिनने के बजाय सिर्फ गड्डियों की संख्या गिनते थे और उसी आधार पर वाउचर तैयार कर देते थे।

असली खेल तब होता था जब यह रकम मंदिर परिसर से बैंक ले जाई जा रही होती थी। रास्ते में आरोपी हर गड्डी में लगाए गए उन एक्स्ट्रा नोटों को चुपके से निकाल लेते थे। इस तरह बैंक के वाउचर से कुल रकम का मिलान भी बिल्कुल परफेक्ट बैठ जाता था और बीच रास्ते में लाखों की चोरी भी हो जाती थी। मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा खुद चढ़ावे के वाउचर बनाने की प्रक्रिया का इंचार्ज था और वह इस हेराफेरी को अपने सगे बहनोई लव कुश मिश्रा के जरिए अंजाम दे रहा था।

भाई-भतीजावाद और सिफारिश का खेल: चंपत राय के ड्राइवर ने भाई को रखवाया

जब पुलिस ने इस नेटवर्क को खंगाला, तो पता चला कि नोट गिनने के इस संवेदनशील काम में भारी लापरवाही बरती गई थी। इस काम में लगे लगभग सभी कर्मचारी किसी न किसी रसूखदार के परिचित थे और सिफारिश के दम पर अंदर घुसे थे।

मिसाल के तौर पर, चंपत राय का निजी ड्राइवर टिन्नू यादव (राम शंकर यादव) मंदिर का व्यवस्थापक बना बैठा था। इसी टिन्नू यादव ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने वाली टीम में शामिल करवा दिया था। ठीक इसी तरह, सालों से ट्रस्ट में काम कर रहे शातिर अनुकल्प मिश्रा ने अपने सगे बहनोई लव कुश मिश्रा की भर्ती करवा दी थी। मामला खुलने के बाद पुलिस ने लव कुश मिश्रा के घर पर छापेमारी कर करीब 10 लाख रुपये कैश बरामद किए हैं।

बिना तलाशी के वापस जाते थे चोर; भगवान राम के कंगन और पैजनिया भी लूटे

इस पूरे मामले में ट्रस्ट की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि ड्यूटी खत्म होने के बाद वापस जाते समय किसी भी कर्मचारी की शारीरिक तलाशी (Frisking) नहीं ली जाती थी। इसी ढील का फायदा उठाकर ये लोग उसी कमरे में डकैती डालने लगे जहां दान पेटियां खुलती थीं।

पकड़े गए एक अन्य आरोपी अविनाश पांडे का जब सीसीटीवी फुटेज देखा गया और उसके बैंक खातों को खंगाला गया, तो ट्रस्ट के पैरों तले जमीन खिसक गई। पदाधिकारियों ने पूछताछ और खातों का मिलान कर पुष्टि की है कि चढ़ावा चोरी की रकम का एक बहुत बड़ा हिस्सा अविनाश सीधे अपने पर्सनल बैंक खाते में जमा करवा रहा था।

शर्म की बात तो यह है कि ये चोर सिर्फ कैश ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा दान किए जाने वाले सोने-चांदी के जेवरातों को भी गायब कर देते थे। मासूम बाल रूप रामलला के लिए आए सोने के कंगन, पैजनिया, नथ, झुमकी और कान की बाली जैसे आभूषणों को भी इन दरिंदों ने नहीं छोड़ा। चोरी की वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले और बाद में ये लोग लिखा-पढ़ी में भी हेरफेर करते थे। इस पूरे रैकेट में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष चंद्र दो ऐसे मुख्य मोहरे हैं, जो लगातार उस प्रतिबंधित कमरे में आते-जाते थे, जहां रामलला की दान पेटियां खोली जाती थीं।

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