Wednesday , 8 July 2026

कानपुर में ‘सुंदर दुल्हनिया’ के नाम पर महाठगी: फर्जी वैवाहिक साइट बनाकर अधेड़ कुंवारों को फंसाती थी हसीना, किराये के मकान में खोला कॉल सेंटर

उत्तर प्रदेश के कानपुर से साइबर ठगी और टप्पेबाजी का एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ढलती उम्र में शादी और सुंदर पत्नी की चाहत रखने वाले कुंवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर करोड़ों का सिंडिकेट चलाने वाले एक हाईटेक गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस गैंग की कमान कानपुर की ही एक शातिर हसीना के हाथ में थी, जिसने छत्तीसगढ़ के एक कंप्यूटर एक्सपर्ट के साथ मिलकर बाकायदा कॉल सेंटर खोल रखा था। पुलिस ने गैंग की मास्टरमाइंड लड़की सहित उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया है।

नौकरी नहीं मिली तो चुना ठगी का शॉर्टकट, सोशल मीडिया से बनाया गैंग

डीसीपी पश्चिम सैय्यद मोहम्मद कासिम आबिदी के मुताबिक, गिरफ्तार मुख्य आरोपी लड़की की पहचान कल्याणपुर के आवास विकास निवासी 25 वर्षीय अनुराधा के रूप में हुई है। अनुराधा ने ग्रेजुएशन करने के बाद लंबे समय तक अच्छी नौकरी की तलाश की, लेकिन जब उसे मनमुताबिक सैलरी वाली जॉब नहीं मिली, तो उसने रातों-रात अमीर बनने के लिए अपराध का शॉर्टकट चुन लिया। अनुराधा ने ठगी का साम्राज्य खड़ा करने के लिए सोशल मीडिया पर लोगों को नौकरी का ऑफर दिया, जिसके जरिए उसकी मुलाकात छत्तीसगढ़ के कंप्यूटर एक्सपर्ट विक्रम खूटे से हुई। इसके बाद अनुराधा की सहेली प्रियंका (निवासी रामपाटी, बिल्हौर) भी इस काले धंधे में शामिल हो गई।

‘ऑनलाइन मैच प्वाइंट’ नाम से बनाई फर्जी मैट्रोमोनियल साइट

इन तीनों ने मिलकर इंटरनेट पर ‘ऑनलाइन मैच प्वाइंट’ (Online Match Point) नाम से एक फर्जी मैट्रोमोनियल वेबसाइट बनाई। इसके बाद शुरू हुआ असली और नामचीन वैवाहिक वेबसाइटों पर जीवनसाथी की तलाश में भटक रहे उम्रदराज और अधेड़ कुंवारों को जाल में फंसाने का खेल। शिकार ढूंढने के लिए अनुराधा और विक्रम ने बड़ी-बड़ी मैट्रोमोनियल साइट्स पर अपने फर्जी अकाउंट्स बना रखे थे। जैसे ही इन्हें कोई ऐसा शख्स मिलता जिसकी शादी की उम्र निकली जा रही हो, ये तुरंत उसका नंबर अपने कॉल सेंटर की लड़कियों को थमा देते थे।

इंटरनेट से हसीनाओं की तस्वीरें डाउनलोड कर भेजते थे फर्जी प्रोफाइल

गैंग का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। कॉल सेंटर की लड़कियां टारगेट किए गए कुंवारों से मीठी-मीठी बातें कर उन्हें रिझाती थीं। इसके बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया से बेहद खूबसूरत लड़कियों की तस्वीरें डाउनलोड करके लड़के वालों को फर्जी प्रोफाइल बनाकर वॉट्सऐप पर भेजी जाती थीं। सुंदर लड़की की फोटो देखकर ढलती उम्र के कुंवारे शादी के लिए बेताब हो जाते थे।

जैसे ही बातचीत आगे बढ़ती, अनुराधा, प्रियंका और विक्रम खुद को वेबसाइट का मैनेजर बताकर कभी रजिस्ट्रेशन फीस, कभी डेटिंग चार्ज तो कभी अन्य कागजी खर्चों के नाम पर 5 से 10 हजार रुपये वसूल लेते थे। रकम खाते में आते ही पीड़ित का नंबर तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता था।

कम रकम की टप्पेबाजी: बदनामी के डर से चुप रह जाते थे पीड़ित

इस गैंग की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि ये किसी भी शिकार से बहुत बड़ी रकम नहीं ऐंठते थे। 5 से 10 हजार रुपये गंवाने के बाद पीड़ित युवक या उसके परिजन समाज में जगहंसाई और बदनामी के डर से पुलिस के पास जाने के बजाय चुपचाप बैठ जाते थे। इसी सामाजिक ताने-बाने और लोकलाज का फायदा उठाकर अनुराधा के इस गिरोह ने पिछले एक साल के भीतर देश भर के सैकड़ों कुंवारों को अपनी ठगी का शिकार बनाया और लाखों रुपये बटोरे।

2 महीने में बदल देते थे कॉल सेंटर का स्टाफ, NCRB पोर्टल ने खोला राज

मास्टरमाइंड अनुराधा का दुस्साहस इतना था कि वह बेखौफ होकर रकम वसूली के लिए अपने एक्सिस बैंक (Axis Bank) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के पर्सनल सेविंग अकाउंट का क्यूआर कोड भेजती थी। इस गोरखधंधे की भनक किसी को न लगे, इसके लिए उन्होंने किराए के मकान में जो कॉल सेंटर खोला था, वहां काम करने वाले लड़के-लड़कियों को 2-3 महीने से ज्यादा नौकरी पर नहीं रखा जाता था।

गैंग को लगा था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे, लेकिन नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRB) पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आई शिकायतों की जब कानपुर की पश्चिम जोन पुलिस ने कड़ियां जोड़ीं, तो इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ हो गया। पुलिस ने कॉल सेंटर पर छापेमारी कर मौके से 9 कंप्यूटर सेट, 105 मोबाइल सिम कार्ड, फिंगर स्कैनर मशीन, प्रिंटर, जाली मुहरें और कई बैंकों की चेकबुक बरामद की हैं।

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