Thursday , 28 May 2026

करोड़पति बनने के चक्कर में लुटा बैठा लाखों: फेसबुक विज्ञापन के जरिए नेपाली शेफ के साथ ‘786 नंबर’ वाली बड़ी ठगी

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में एक सनसनीखेज साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां ‘786’ अंक वाले विशेष नोटों के बदले लाखों रुपए पाने के लालच में एक व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठा। ठगों ने फेसबुक विज्ञापन का जाल बिछाकर एक प्रतिष्ठित 4 स्टार होटल के शेफ को निशाना बनाया और उनसे रजिस्ट्रेशन व टैक्स के नाम पर करीब 3.66 लाख रुपए ऐंठ लिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस की शरण ली है।

फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का खेल

नानाखेड़ा थाना पुलिस के अनुसार, ठगी का शिकार हुए मोहन (44 वर्ष), जो मूल रूप से नेपाल के निवासी हैं, उज्जैन के इंदौर रोड स्थित एक होटल में बतौर शेफ कार्यरत हैं। मोहन को फेसबुक पर एक विज्ञापन दिखा था, जिसमें दावा किया गया था कि यदि किसी के पास ‘786’ सीरीज या कोई अन्य ‘यूनिक’ नंबर वाला नोट है, तो उसके बदले लाखों रुपए दिए जाएंगे। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर संपर्क करने पर ठगों ने उन्हें झांसा दिया कि उनके पास मौजूद तीन विशेष नोटों की कीमत 86 लाख रुपए है, जो उन्हें होम डिलीवरी के जरिए भेजे जाएंगे।

GST और TDS के नाम पर वसूले साढ़े तीन लाख से ज्यादा

शेफ मोहन को भरोसा दिलाने के लिए साइबर ठगों ने पेशेवर तरीका अपनाया। उन्होंने 86 लाख रुपए की बड़ी रकम भेजने से पहले डिलीवरी चार्ज, जीएसटी (GST), रजिस्ट्रेशन फीस और टीडीएस (TDS) जमा करने की शर्त रखी। भारी मुनाफे के लालच में आकर मोहन ने 28 जनवरी से 10 फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग किश्तों में कुल 3,66,546 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। जब पैसे देने के बाद भी कोई डिलीवरी नहीं हुई और संपर्क टूट गया, तब मोहन को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।

1930 हेल्पलाइन पर दर्ज कराई शिकायत

ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित ने तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करवाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य साइबर सेल ने जांच के बाद केस नानाखेड़ा थाना पुलिस को ट्रांसफर किया। टीआई नरेंद्र यादव ने बताया कि प्राप्त ई-एफआईआर (E-FIR) के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 319(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

साइबर पुलिस की चेतावनी

पुलिस इस मामले में बैंक ट्रांजेक्शन और मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर ‘नोटों की खरीद-फरोख्त’ या ‘जल्दी अमीर बनाने’ वाले विज्ञापनों पर भरोसा न करें। आरबीआई (RBI) कभी भी पुराने नोटों या यूनिक नंबर के नोटों के लिए इस तरह के भुगतान की अनुमति नहीं देता है।

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