नई दिल्ली। जापानी वाहन निर्माता कंपनी टोयोटा (Toyota) ने भारतीय बाजार में अपनी दमदार पिकअप ट्रक हाइलक्स का नया अपडेटेड फेसलिफ्ट (Hilux Facelift 2026) अवतार पेश कर दिया है। हालांकि, इस लॉन्च के बाद से ही ऑटोमोबाइल जगत और कार लवर्स के बीच इस बात की चर्चा गरम है कि भारतीय वेरिएंट में वो कई आधुनिक फीचर्स गायब हैं, जो इसके ग्लोबल (अंतर्राष्ट्रीय) मॉडल में दिए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इसे लेकर टोयोटा की आलोचना भी हो रही है, लेकिन अगर प्रैक्टिकल और ऑफ-रोडिंग के नजरिए से देखें तो इनमें से कई बदलाव भारत की विषम परिस्थितियों और रफ-टफ इस्तेमाल को ध्यान में रखकर किए गए प्रतीत होते हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन से 5 बड़े फीचर्स हैं जो भारतीय खरीदारों को नए मॉडल में नहीं मिले हैं:

1. लेदरेट सीट्स की जगह मिली फैब्रिक अपहोल्स्ट्री
2026 टोयोटा हाइलक्स फेसलिफ्ट में कंपनी ने लेदरेट सीट्स की जगह फैब्रिक सीट्स दी हैं। पहली नजर में यह कॉस्ट-कटिंग (लागत में कटौती) लग सकती है, लेकिन व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखें तो फैब्रिक सीट्स भारतीय मौसम के ज्यादा अनुकूल होती हैं। कड़ाके की धूप में फैब्रिक सीट्स लेदर की तरह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होतीं और न ही सर्दियों में बहुत ठंडी महसूस होती हैं, हालांकि इन्हें साफ करना लेदर के मुकाबले थोड़ा चुनौतीपूर्ण जरूर होता है।
2. पावर सीट्स गायब, दी गई मैन्युअल एडजस्टेबल फ्रंट सीट्स
पिछले मॉडल में ड्राइवर और फ्रंट पैसेंजर के लिए पावर-एडजस्टेबल सीट्स का विकल्प मिलता था, लेकिन नए फेसलिफ्ट मॉडल में कंपनी ने मैन्युअल सीट एडजस्टमेंट दिया है। भले ही टेक-लवर्स के लिए यह एक माइनस पॉइंट हो, लेकिन ऑफ-रोडिंग प्रेमियों के लिए यह बेहद उपयोगी है। जब पिकअप को गहरे पानी या कीचड़ (Water Wading) में उतारा जाता है, तो केबिन में पानी घुसने की स्थिति में इलेक्ट्रिकल सर्वो मोटर्स के खराब होने का डर बना रहता है। ऐसे में मैन्युअल सिस्टम ज्यादा भरोसेमंद साबित होता है।
3. 48V माइल्ड-हाइब्रिड (Neo Drive) सिस्टम भारत में शामिल नहीं
ग्लोबल मार्केट में बिकने वाली हाइलक्स में टोयोटा का नया 48V माइल्ड-हाइब्रिड सिस्टम ‘Neo Drive’ दिया गया है, जो कार के माइलेज और एक्सेलेरेशन को बेहतर बनाता है। हालांकि, भारत-स्पेसिफिक हाइलक्स में इस तकनीक को जगह नहीं दी गई है और यह केवल स्टैंडर्ड डीजल इंजन के साथ ही आती है। जानकारों का मानना है कि हार्डकोर ऑफ-रोडिंग के दौरान जितने कम इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और वायरिंग होगी, शॉर्ट सर्किट या नेटवर्क फेलियर का खतरा उतना ही कम रहेगा।
4. इलेक्ट्रॉनिक की जगह बरकरार रखा गया पुराना हाइड्रोलिक स्टीयरिंग
ग्लोबल हाइलक्स में अब इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग (EPS) दिया गया है, जिससे तंग गलियों और शहरों में भारी-भरकम गाड़ी को संभालना काफी आसान हो जाता है। इसके विपरीत, भारतीय मॉडल में कंपनी ने पुराना और मजबूत ‘हाइड्रोलिक पावर स्टीयरिंग’ ही बरकरार रखा है। भले ही इसे घुमाने में थोड़ी ज्यादा ताकत लगती है, लेकिन रफ-टफ रास्तों और ऑफ-रोडिंग के दौरान यह पहियों का सीधा, सटीक और डायरेक्ट फीडबैक ड्राइवर तक पहुंचाता है।
5. रियर डिस्क ब्रेक्स और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल की कमी
आजकल जहां बजट सेगमेंट की कारों में भी चारों पहियों पर डिस्क ब्रेक और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल देखने को मिल जाता है, वहीं लाखों रुपये की हाइलक्स के भारतीय मॉडल में पिछले पहियों पर ड्रम ब्रेक ही दिए गए हैं। इसके अलावा, सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि केबिन में ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल की जगह मैन्युअल एसी (Manual AC) नॉब्स दिए गए हैं।
voice of india
