अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। इस संवेदनशील मामले की तफ्तीश कर रही विशेष जांच दल (SIT) की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है और वह जल्द ही इसे उत्तर प्रदेश शासन को सौंप सकती है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राम मंदिर से जुड़े कई रसूखदार और बड़े लोग कानूनी जांच के दायरे में आ सकते हैं। फिलहाल, रिपोर्ट सौंपने से पहले एसआईटी सभी तकनीकी और वित्तीय निष्कर्षों की दोबारा बारीकी से समीक्षा कर रही है।
महज चोरी नहीं, पूरे मैनेजमेंट के खेल का पर्दाफाश
शुरुआत में यह जांच केवल चढ़ावे की नकदी चोरी होने तक ही सीमित मानी जा रही थी, लेकिन जैसे-जैसे एसआईटी ने फाइलों को खंगाला, यह पूरा मामला दान प्राप्त करने, उसकी गिनती करने, रकम को सुरक्षित रखने और बैंक में जमा करने वाली पूरी व्यवस्था की बड़ी गड़बड़ी में तब्दील हो गया। एसआईटी ने अपनी इस विस्तृत जांच के दौरान मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड, महीनों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, सुरक्षा प्रोटोकॉल, बैंकिंग प्रक्रियाओं और संदिग्धों के बयानों का गहन परीक्षण किया है।
सिर्फ छोटे कर्मचारी नहीं, सीनियर अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही
इस रिपोर्ट में केवल संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर नियुक्त नकदी गिनने वाले उन छोटे कर्मचारियों की भूमिका का जिक्र नहीं है जिन्हें गिरफ्तार किया गया था, बल्कि चढ़ावा प्रबंधन की निगरानी करने वाले बड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर भी बेहद कड़े निष्कर्ष शामिल किए गए हैं। एसआईटी ने अपनी जांच में साफ कर दिया है कि ऑन-ड्यूटी रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की महज ‘असावधानी’ या ‘अनुपस्थिति’ को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त होने का बहाना नहीं माना जा सकता।
प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आई थी ट्रस्ट और SBI की लापरवाही
आपको बता दें कि पिछले महीने 23 जून को एसआईटी ने सरकार को अपनी एक प्रारंभिक (शुरुआती) रिपोर्ट सौंपी थी। उस रिपोर्ट में कथित तौर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा तय किए गए सुरक्षा मानकों के बार-बार उल्लंघन की बात उजागर हुई थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर 6 संविदा नकदी गिनने वाले कर्मियों और 2 सुपरवाइजरों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाई गई थी, लेकिन तब वरिष्ठ अधिकारियों पर उंगली नहीं उठाई गई थी। अब अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बड़े किरदारों की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू यादव का कनेक्शन, ट्रस्ट के बड़े चेहरों से घनिष्ठता
जांच में कई स्तरों पर संस्थागत भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही के पुख्ता संकेत मिले हैं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि मंदिर परिसर में इतनी बड़ी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बावजूद जिम्मेदार लोग जानबूझकर अनजान बने रहे। एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट में इस बात का प्रमुखता से उल्लेख है कि चोरी में शामिल मुख्य आरोपी—अनुकल्प मिश्रा और टिन्नू यादव, राम मंदिर ट्रस्ट में बैठे कुछ बेहद शक्तिशाली और वरिष्ठ लोगों के बेहद करीबी थे। रिपोर्ट में मुख्य आरोपियों की ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ घनिष्ठता का पूरा ब्योरा दर्ज किया गया है।
फाइनल रिपोर्ट के बाद बढ़ेगा पुलिस कार्रवाई का दायरा
एसआईटी की इस अंतिम रिपोर्ट के शासन तक पहुंचते ही अयोध्या पुलिस की इन्वेस्टीगेशन का दायरा बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है। राम मंदिर ट्रस्ट की फंक्शनिंग (कार्यप्रणाली) में पाई गई व्यापक लापरवाही और भ्रष्टाचार के इस गठजोड़ के उजागर होने से कई नए रसूखदार किरदार इस जांच की आंच में सीधे तौर पर झुलसेंगे। अब देखना यह होगा कि रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सबमिट होने के बाद सरकार इस पर क्या कड़ा एक्शन लेती है।
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