Tuesday , 28 July 2026

Digital Arrest: ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ से टूटी साइबर ठगों की कमर, CBI की 16 राज्यों में एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी, भारतीय ही नहीं, विदेशी नागरिक भी थे….

नई दिल्ली। देश भर में मासूम नागरिकों को डरा-धमकाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के नाम पर करोड़ों रुपये ऐंठने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। ठगों के पूरे तकनीकी और वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद करने के लिए सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ (Operation Chakra-VI) लॉन्च किया। इसके तहत देश के 16 राज्यों में एक साथ 60 विशेष टीमों को मैदान में उतारा गया। सीबीआई की इन टीमों ने पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा सहित देश भर के 80 से अधिक रणनीतिक ठिकानों पर एक साथ छापा मारकर पूरे रैकेट को हिलाकर रख दिया है।

चेन्नई और कोलकाता से मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 2 करोड़ का घोटाला उजागर

इस सघन और राष्ट्रव्यापी छापेमारी के दौरान सीबीआई को बड़ी सफलता हाथ लगी है। टीम ने चेन्नई और कोलकाता से दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी इस पूरे सिंडिकेट के वित्तीय स्तंभ थे। ये दोनों फर्जी शेल कंपनियां (कागजी कंपनियां) बनाने और अवैध ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ (दूसरों के नाम पर या फर्जी दस्तावेजों पर खोले गए डमी खाते) को संचालित करने के मुख्य दोषी हैं। शुरुआती तफ्तीश के मुताबिक, इन संदिग्ध बैंक खातों का इस्तेमाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए मासूम पीड़ितों से डरा-धमकाकर ऐंठे गए लगभग 2 करोड़ रुपये की काली कमाई को देश-विदेश में ठिकाने लगाने और उसकी मनी लॉन्ड्रिंग (वैध बनाने) के लिए किया जा रहा था।

माननीय सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाकर चल रहा था बड़ा खेल

सीबीआई की इस हाई-टेक जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा हुआ है। जांचकर्ताओं को पता चला है कि इन डिजिटल लुटेरों ने भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट की ऑफिशियल वेबसाइट से हूबहू मिलता-जुलता एक फ्रॉड डोमेन (URL) और नकली वेबसाइट तैयार कर रखी थी। जालसाज इस फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल पीड़ितों के मन में कानून का खौफ पैदा करने और उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ की आड़ में पूरी तरह अपने जाल में फंसाने के लिए करते थे। जैसे ही भारत के सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस धोखाधड़ी की भनक लगी, उनकी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने तुरंत संबंधित धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले की कड़ियां जोड़ना शुरू कर दिया।

नकली कोर्ट ऑर्डर और एडवांस्ड फोरेंसिक टूल्स का जाल

इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को भेदने के लिए सीबीआई ने आधुनिक फोरेंसिक उपकरणों और उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता (Technical Expertise) का सहारा लिया। इसके जरिए एजेंसी ने सबसे पहले भारत और विदेशों में फैले इस आपराधिक नेटवर्क के मुख्य तकनीकी केंद्रों (टेक्निकल हब) को लोकेट किया। जांच में पता चला कि ये अपराधी अपने शिकार को असली जैसा भरोसा दिलाने के लिए जाली और बनावटी कानूनी दस्तावेज इंटरनेट पर अपलोड करते थे। इनमें विभिन्न अदालतों और शीर्ष जांच एजेंसियों के नाम पर जारी किए गए नकली वारंट, समन और जाली कोर्ट ऑर्डर शामिल होते थे, जिन्हें देखकर कोई भी आम नागरिक डर जाता था।

इस तलाशी अभियान के दौरान सीबीआई ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, दर्जनों संदिग्ध डिजिटल डिवाइस, स्मार्टफोन और करोड़ों रुपये के अवैध बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं, जिनकी इस समय विस्तृत फोरेंसिक जांच की जा रही है।

भारतीय ही नहीं, विदेशी नागरिक भी थे इस महाठगी के निशाने पर

सीबीआई की पड़ताल में यह अंतरराष्ट्रीय एंगल भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट के निशाने पर सिर्फ भारतीय नागरिक ही नहीं थे, बल्कि वे कई विकसित देशों के नागरिकों को भी इसी तरह ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार बनाकर उनसे मोटी रकम वसूल रहे थे। इस इनपुट के सामने आने के बाद सीबीआई अब उन संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) से संपर्क साध रही है और उन्हें इस नेटवर्क को लेकर अलर्ट जारी कर रही है, ताकि इस ग्लोबल साइबर क्राइम सिंडिकेट को पूरी तरह जड़ से उखाड़ा जा सके।

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