Wednesday , 1 July 2026

वेनेजुएला में भारतीय नाविक की मौत या अंगों की तस्करी? शव से दिल, दिमाग और किडनी गायब; 43 टांकों के बीच छिपा खौफनाक राज!

देवरिया। वेनेजुएला से भारत पहुंचे एक मर्चेंट नेवी के नाविक के शव ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले 33 वर्षीय नाविक राकेश चौहान की सुदूर लातनी अमेरिकी देश वेनेजुएला में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जब कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनका पार्थिव शरीर भारत लाया गया, तो एक ऐसा डरावना और रूह कंपा देने वाला सच सामने आया जिसे सुनकर हर कोई दंग है। भारत में हुए दोबारा पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ है कि राकेश के शरीर से दिल, दिमाग, फेफड़े और किडनी समेत सभी मुख्य आंतरिक अंग पूरी तरह से गायब हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पीड़ित परिवार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव अंगों की तस्करी (ऑर्गन ट्रैफिकिंग) का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। वहीं, फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया (FSUI) ने भी इस मामले में वेनेजुएला सरकार की जवाबदेही तय करने और भारतीय दूतावास से तुरंत दखल देने की गुहार लगाई है।

मर्चेंट नेवी में नौकरी के लिए गए थे वेनेजुएला, पीछे छोड़ गए 6 महीने का मासूम

यह दर्दनाक और रहस्यमयी मामला देवरिया जिले के लगड़ा बाजार टोला का है। यहां के रहने वाले राकेश चौहान अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी शादी साल 2023 में हुई थी और उनका एक 6 महीने का छोटा बेटा भी है। परिवार के बेहतर भविष्य का सपना लेकर राकेश नवंबर 2025 में ‘एक्सफिनिटी’ (Xfinity) नाम की कंपनी के जरिए मर्चेंट नेवी के एक जहाज पर नौकरी करने वेनेजुएला गए थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन मई 2026 में अचानक आई एक खबर ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं।

मौत की वजह पर कंपनी के बयानों में भारी ‘झोल’, बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के भेजा शव

राकेश की मौत को लेकर शिपिंग कंपनी के अधिकारियों के बयानों ने पहले दिन से ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। परिजनों के मुताबिक, कंपनी से पहली कॉल आई कि राकेश जहाज पर पैर फिसलने से गिर गए हैं, उन्हें चोटें आई हैं और अस्पताल में इलाज चल रहा है। अगली सुबह दूसरी कॉल आई कि उनके बचने की उम्मीद सिर्फ 5 प्रतिशत ही है। इसके बाद उसी शाम तीसरी कॉल पर उनकी मौत की खबर दे दी गई। जब परिजनों ने मौत का कारण पूछा, तो फोन पर कहा गया कि सिर और शरीर में लगी गंभीर चोटों की वजह से जान गई है। लेकिन जब शव के कागजात सामने आए, तो कंपनी का बयान पूरी तरह पलट चुका था। कागजों पर मौत की वजह ‘कार्डियक अरेस्ट’ (दिल का दौरा पड़ना) दर्ज थी। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि वेनेजुएला के अधिकारियों ने शव तो भारत भेज दिया, लेकिन उसके साथ कोई आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट या मेडिकल दस्तावेज संलग्न नहीं किए।

भारतीय डॉक्टरों के सामने खुली खौफनाक सच्चाई: 43 टांकों में सिमटा था खोखला जिस्म

शव के साथ आए दस्तावेजों में विसंगतियां देखकर भारत में डॉक्टरों की एक टीम ने दोबारा पोस्टमार्टम करने का फैसला किया। इसके बाद जो सच सामने आया, उसने डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए। एफएसयूआई (FSUI) ने सोशल मीडिया पर इस डरावनी सच्चाई को साझा किया है। राकेश के शरीर के अंदर एक भी मुख्य अंग मौजूद नहीं था। उनका दिमाग, दिल, दोनों फेफड़े, लिवर, किडनी, पेट और आंतें तक गायब थीं।

शव की हालत देखकर साफ लग रहा था कि वेनेजुएला में उनके साथ क्रूरता की गई है। राकेश के शव पर गर्दन से लेकर पेट के निचले हिस्से तक 22 टांके और एक कान से दूसरे कान तक सिर पर 21 टांके लगे हुए थे। डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर पूरी तरह से खोखला हो चुका था। अंगों के न होने के कारण भारतीय डॉक्टर भी चाहकर राकेश की मौत की असली वजह का वैज्ञानिक पता नहीं लगा पाए।

अंगों की तस्करी का आरोप; पीड़ित परिवार और FSUI ने सरकार से लगाई न्याय की गुहार

राकेश के बुजुर्ग पिता रामदेव चौहान और गांव के पूर्व प्रधान घनश्याम सिंह ने सीधे तौर पर शिपिंग कंपनी और वेनेजुएला के स्थानीय प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राकेश की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई है और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय ऑर्गन स्मगलिंग रैकेट के तहत उनके अंगों को निकाल कर बेच दिया गया है। रोते-बिलखते परिवार ने भारत सरकार से इस अंतरराष्ट्रीय मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, दोषी कंपनी पर सख्त कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।

इस बीच, भारतीय नाविकों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन FSUI ने इस मुद्दे को वैश्विक मंच और सोशल मीडिया पर प्रमुखता से उठाया है। यूनियन का कहना है कि यह विदेश जाने वाले भारतीय कामगारों की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है। यूनियन ने विदेश मंत्रालय से मांग की है कि वेनेजुएला स्थित भारतीय दूतावास तुरंत वहां की सरकार पर दबाव बनाए ताकि सच सामने आ सके और भविष्य में किसी और भारतीय नाविक के साथ ऐसा खौफनाक खिलवाड़ न हो।

 

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