Friday , 23 October 2026

यूपी में भ्रष्टाचार पर सीएम योगी का महा-ऐक्शन: तहसीलदार से एसडीएम बने PCS अधिकारी करन सिंह सस्पेंड, सरकारी जमीन घोटाले में नपे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रशासनिक गलियारे को हिलाकर रख देने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े आदेश पर उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए, हाल ही में तहसीलदार से प्रमोट होकर उपजिलाधिकारी (SDM) बने पीसीएस अधिकारी करन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इसके साथ ही आरोपी अधिकारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। उन पर संभल जिले की गुन्नौर तहसील में तैनाती के दौरान नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की सरकारी जमीन बंदरबांट करने का बेहद गंभीर आरोप है।

संभल के डीएम अंकित खंडेलवाल (IAS) की रिपोर्ट पर गिरी गाज

शासन को भेजी गई बेहद गोपनीय और विस्तृत जांच रिपोर्ट में संभल के जिलाधिकारी (DM) और आईएएस अधिकारी अंकित खंडेलवाल ने पूरे मामले का पर्दाफाश किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीसीएस अधिकारी करन सिंह वर्ष 2017 में गुन्नौर तहसील में तहसीलदार के पद पर तैनात थे। इसी दौरान उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए गुन्नौर तहसील के ग्राम सुखैला असदपुर में स्थित सरकारी भूमि के आवंटन में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और अनियमितता को अंजाम दिया था।

प्रतिबंधित ‘झाऊ’ और ‘रेता’ की सुरक्षित जमीनों को चेहतों में बांटा

डीएम संभल की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच के अनुसार, ग्राम सुखैला असदपुर में उत्तर प्रदेश भूमि राजस्व संहिता के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए श्रेणी-5(3) के तहत दर्ज ‘झाऊ’ की भूमि और श्रेणी-6(4) के तहत दर्ज ‘रेता’ की बेशकीमती सरकारी जमीन का नियम विरुद्ध आवंटन कर दिया गया।

भूमि राजस्व संहिता के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, इस विशिष्ट श्रेणी की जमीनों का किसी भी निजी व्यक्ति को आवंटन करना पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। यह जमीनें प्राकृतिक संतुलन, पर्यावरण संरक्षण और विशुद्ध रूप से सरकारी व सार्वजनिक उपयोग के लिए हमेशा आरक्षित रहती हैं।

पात्रता मानकों की अनदेखी और नियमों का कत्लेआम

आईएएस अंकित खंडेलवाल की जांच में यह साफ हो गया कि तत्कालीन तहसीलदार करन सिंह ने इस पूरे आवंटन खेल में किसी भी तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए अपने चहेतों और भू-माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए यह अवैध आवंटन किया।

प्रयागराज कमिश्नर दफ्तर से किया संबद्ध, विस्तृत विभागीय जांच शुरू

संभल के जिलाधिकारी की इस पुख्ता रिपोर्ट के आधार पर शासन ने बिना कोई समय गंवाए तत्काल प्रभाव से एसडीएम करन सिंह के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान उन्हें प्रयागराज मंडलायुक्त (कमिश्नर) कार्यालय से संबद्ध (अटैच) किया गया है।

शासन ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे महाघोटाले की विस्तृत विभागीय जांच कराई जा रही है, ताकि यह साफ हो सके कि इस अवैध आवंटन में तत्कालीन तहसीलदार के अलावा और कौन-कौन से बड़े अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी लोग शामिल थे।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस; लापरवाही पर सख्त संदेश

यूपी के प्रशासनिक हलकों में शासन की इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। शासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सरकारी भूमि की सुरक्षा और उसका संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सार्वजनिक संपत्ति के साथ खिलवाड़ करने या इसमें किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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