
लखनऊ/झांसी: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके और उनके परिजनों के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए लखनऊ और झांसी स्थित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है. ईडी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों और उनके करीबियों में हड़कंप मच गया है. बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी को इस रेड के दौरान कई बेहद अहम सुराग हाथ लगे हैं.
सुबह-सुबह पहुंची ED की टीम, जब्त हुए डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी की अलग-अलग टीमों ने तड़के सुबह ही दीप नारायण सिंह यादव और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी. यह पूरी कार्रवाई उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट (UP Vigilance Establishment) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को आधार बनाकर की जा रही है. छापेमारी के दौरान जांच टीम ने घर और दफ्तरों को खंगाला, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बेनामी संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस (मोबाइल, लैपटॉप आदि) जब्त किए गए हैं. इन दस्तावेजों की स्क्रूटनी से कई नए खुलासे होने की उम्मीद है.
डकैती से लेकर आय से अधिक संपत्ति तक, दर्ज हैं 60 से ज्यादा केस
झांसी की गरौठा विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके दीप नारायण सिंह यादव पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. उन पर डकैती, रंगदारी, मारपीट और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने जैसे करीब 60 आपराधिक मामले दर्ज हैं. फिलहाल वह जेल की सलाखों के पीछे हैं. उनके पूरे राजनीतिक और व्यापारिक साम्राज्य पर इस समय ईडी, यूपी विजिलेंस और उत्तर प्रदेश पुलिस का त्रिकोणीय शिकंजा कसा हुआ है. प्रशासन इससे पहले भी उनकी करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियों को कुर्क कर चुका है.
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर, मुलायम सिंह के करीबी नेताओं में रहे शुमार
21 जुलाई 1969 को झांसी में जन्मे दीप नारायण सिंह यादव ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत एक छात्र नेता के रूप में की थी. उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के टिकट पर बुंदेलखंड इंटर कॉलेज से छात्रसंघ का चुनाव जीता. इसके बाद साल 1992 में वह बुंदेलखंड कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए. इसी दौरान वह समाजवादी पार्टी के संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए और सपा का दामन थाम लिया.
दो बार रहे गरौठा से विधायक, सपा में संभाले कई बड़े पद
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद दीप नारायण का कद लगातार बढ़ता गया. साल 1991 में वह समाजवादी युवजन सभा के झांसी जिलाध्यक्ष बने. इसके बाद 1998 तक वह झांसी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद पर काबिज रहे. सपा संगठन में उन्होंने जिलाध्यक्ष, प्रदेश सचिव से लेकर लोहिया वाहिनी के प्रदेश और राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली. साल 2007 में पार्टी ने उन्हें गरौठा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां से जीतकर वह पहली बार विधानसभा पहुंचे. इसके बाद 2012 की सपा लहर में भी उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी, हालांकि 2017 के चुनाव में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था.
पुश्तैनी जमीन हड़पने और रंगदारी मांगने का है ताजा मामला
दीप नारायण सिंह यादव के जेल जाने और वर्तमान मुश्किलों के पीछे पिछले साल दर्ज हुआ एक गंभीर मामला है. नवंबर महीने में मोंठ के भुजौंद गांव के रहने वाले प्रेम सिंह पालीवाल ने पूर्व विधायक दीप नारायण, उनके साले अनिल मामा और अन्य सहयोगियों के खिलाफ संगीन धाराओं में केस दर्ज कराया था. आरोप था कि पूर्व विधायक और उनके गुर्गे प्रेम सिंह की पुश्तैनी जमीन पर कब्जा करना चाहते थे. विरोध करने पर पीड़ित के साथ मारपीट की गई, जान से मारने की धमकी दी गई, लूटपाट हुई और 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई. इस मामले में कई दिनों तक फरार रहने के बाद दीप नारायण ने सरेंडर किया था, जिसके बाद से वह लगातार जेल में हैं.
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