Saturday , 12 September 2026

BRICS Summit 2026: भारत-चीन के बीच दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति पर हो सकता है ऐतिहासिक समझौता, जिनपिंग की यात्रा पर टिकी दुनिया की निगाहें

 नई दिल्ली।  ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में दुनिया के शीर्ष नेताओं का महामंथन शुरू होने जा रहा है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच भारत और चीन के रिश्तों में एक अहम रणनीतिक मोड़ देखने को मिल सकता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अति-महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की आपूर्ति को लेकर एक बड़े द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है।

12 सितंबर को मोदी-जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में लगेगी मुहर

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस रणनीतिक समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है। 12 सितंबर की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के दौरान इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। इससे पहले, चीन ने भारत को दुर्लभ खनिजों की निर्बाध आपूर्ति को लेकर आश्वस्त किया था। वहीं, कूटनीतिक व्यस्तताओं के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय वार्ता 11 सितंबर को तय है।

वैश्विक आपूर्ति पर चीन का 80 फीसदी दबदबा

आधुनिक तकनीक, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में कुल 17 तत्व आते हैं। इनमें से स्कैंडियम, सैमरियम, डिस्प्रोसियम, टेरबियम, इट्रियम, गैडोलिनियम और ल्यूटेशियम जैसे सात महत्वपूर्ण तत्व चीन में भारी मात्रा में मौजूद हैं। वैश्विक स्तर पर इन खनिजों के करीब 80 प्रतिशत उत्पादन और आपूर्ति पर अकेले चीन का नियंत्रण है, जिसके चलते दुनिया भर के देश अपनी औद्योगिक जरूरतों के लिए बीजिंग पर निर्भर हैं। यदि भारत के साथ यह समझौता अमल में आता है, तो भारतीय उद्योगों के लिए इन खनिजों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

भारत में 72.3 लाख टन का भंडार, दोहन बना बड़ी चुनौती

भूवैज्ञानिक अनुमानों के मुताबिक, दुनिया के कुल दुर्लभ खनिजों का लगभग छह प्रतिशत भंडार भारत के पास है और इस मामले में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर आता है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने देश के नौ प्रमुख राज्यों—आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र—में 7.23 मिलियन टन (72.3 लाख टन) दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी का पता लगाया है। हालांकि, तकनीकी सीमाओं के कारण अब तक इनका व्यावसायिक और पर्याप्त दोहन नहीं हो पाया है। घरेलू स्तर पर खोज और निष्कर्षण को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ भी शुरू किया है।

खोज और निष्कर्षण में रूस करेगा भारत की मदद

जहां एक तरफ चीन से तैयार खनिजों की आपूर्ति का रास्ता खुल रहा है, वहीं दूसरी तरफ रूस ने भारत की जमीन पर मौजूद इन खनिजों की खोज और खनन में तकनीकी सहयोग की पेशकश की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया है कि दुर्लभ खनिजों की खोज एक बेहद जटिल प्रक्रिया है और रूसी कंपनियों के पास इस क्षेत्र में दशकों की विशेषज्ञता है। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस सहयोग पर विस्तृत चर्चा होगी। यह संयुक्त प्रयास भारत की दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भर औद्योगिक विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

Check Also

दिल्ली में BRICS Summit का महामंथन: पुतिन-पेजेशकियान पहुंचे, पीएम मोदी के साथ मेगा मीटिंग शुरू; शी जिनपिंग पर भी टिकी नजरें

राजधानी दिल्ली इस समय 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के भव्य आयोजन के साथ वैश्विक …