अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि मंदिर परिसर से जुड़े हालिया विवाद और सोशल मीडिया पर जारी दुष्प्रचार को लेकर अयोध्या के संत समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। मणिराम दास छावनी के श्री राम सत्संग भवन ‘धर्म मंडपम’ में आयोजित संत मंडल की महत्वपूर्ण संगोष्ठी में पूज्य संतों ने एक सुर में मंदिर विरोधी ताकतों और फर्जी नैरेटिव फैलाने वालों को आड़े हाथों लिया। संतों ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर के खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है और ऐसे असामाजिक व छद्मवेशी तत्वों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
संगोष्ठी के दौरान राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले चंपत राय का जोरदार समर्थन किया गया और हाल ही में गठित 5-सदस्यीय संत-महंतों की धार्मिक समिति का स्वागत किया गया।
राम मंदिर के खिलाफ ‘नैरेटिव वार’, संत समाज ने चेताया
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे श्री मणिरामदास छावनी के महंत कमलनयन दास जी महाराज ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि जो लोग हमेशा अदालतों में रामलला के विरोध में सबूत पेश करते थे, वे आज मंदिर में हुई घटना पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं। यह चोरी नहीं बल्कि विश्वासघात का मामला है, जिसका सच समय के साथ सामने आ जाएगा। संतों ने कहा कि सनातन धर्म और राम मंदिर की साख को नुकसान पहुंचाने के लिए विदेशों से फंडिंग के जरिए दुष्प्रचार चलाया जा रहा है, जिसे एकजुट होकर विफल किया जाएगा।
सिद्धिपीठ श्री हनुमंत निवास के आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण जी ने कहा कि देश में राम मंदिर और हिंदू समाज की एकजुटता के खिलाफ एक ‘नैरेटिव वार’ छिड़ा हुआ है। मीडिया और विरोधी ताकतें सेवादारों और ट्रस्ट पर सवाल उठाकर दाताओं के मन में भ्रम पैदा कर रही हैं। हमें ऐसी विरोधी ताकतों का मजबूती से प्रतिवाद करना होगा।
चंपत राय के त्यागपत्र और संतों की भूमिका पर चर्चा
संगोष्ठी के दौरान डांडिया मंदिर के महंत गिरीशदास जी महाराज ने चंपत राय के निस्वार्थ योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह मिथ्या और आधारहीन हैं। उन्होंने जनभावनाओं और रामलला की सेवा के प्रति समर्पण दिखाते हुए स्वयं प्रेरणा से त्यागपत्र दिया है।
वहीं, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत संजय दास और निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत गौरी शंकरदास जी ने कहा कि जिन्होंने रामजन्मभूमि के लिए 50 वर्षों तक संघर्ष किया, उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। संतों ने मांग की कि रामलला के दर्शन के लिए स्थानीय अयोध्यावासियों के पहचान पत्र/आधार कार्ड को ही प्राथमिकता का आधार बनाया जाना चाहिए।
संतों ने पारित किए प्रमुख सुझाव और भावी रणनीति
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मासिक संगोष्ठी: अयोध्या के संतों का एक साझा स्वर बनाने के लिए हर माह नियमित बैठक आयोजित की जाएगी।
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मीडिया प्रवक्ता का निर्धारण: टीवी और सोशल मीडिया पर अनाधिकृत बयानबाजी रोकने के लिए अधिकृत संतों की समिति बनेगी।
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धार्मिक समिति का समर्थन: ट्रस्ट में 5 प्रमुख महापुरुषों के चयन का स्वागत किया गया, जिससे मंदिर की पूजा-पद्धति और व्यवस्थाओं में सुचारुता आएगी।
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बहिष्कार का आह्वान: सनातन धर्म और अयोध्या धाम की छवि धूमिल करने वाले तथाकथित धर्मगुरुओं का कड़ा विरोध और सामाजिक बहिष्कार होगा।
इस विशाल संत-सभा में महंत डॉ. रामानंद दास, राजकुमार दासमी जी, महंत राघवेश दास, रामायणी रामकृष्ण दास, रामायणी कमला दास, महंत वैदेही वल्लभशरण, महंत शशिकांत दास समेत सैकड़ों संत-महंत उपस्थित रहे।
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