अनिल मिश्र समेत बड़े अफसरों पर लापरवाही के आरोप, FIR की सिफारिश
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी और गबन मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उत्तर प्रदेश शासन को सौंपी गई नौ पृष्ठों की इस गोपनीय रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ने की बात सामने आई है। एसआईटी ने अपनी जांच में पाया कि बैंक और ट्रस्ट के बीच तय सुरक्षा प्रोटोकॉल (SOP) का पालन करने में गंभीर चूक हुई, जिसके चलते गणनाकर्मियों ने बेखौफ होकर चोरी की वारदातों को अंजाम दिया। रिपोर्ट में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्र समेत प्रभारियों को घोर लापरवाही का दोषी मानते हुए कार्रवाई और संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की गई है।
सीसीटीवी फुटेज ने खोली पोल: कपड़ों और जूतों में नोटों की गड्डियां छिपाते दिखे कर्मचारी
SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चोरी कोई एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि इसे एक सोचे-समझे पैटर्न के तहत अंजाम दिया जा रहा था। जांच टीम ने जब 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, तो उनके होश उड़ गए। इस अवधि के भीतर लगभग 70 ऐसी संदिग्ध घटनाएं कैमरे में कैद मिलीं, जिनमें नोट गिनने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले पैसे बेहद चालाकी से अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते साफ दिखाई दे रहे हैं।
जांच दल ने इन छह गणनाकर्मियों को चोरी में सीधे तौर पर संलिप्त पाया है:
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अविनाश शुक्ला
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अनुकल्प मिश्र
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लवकुश मिश्र
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मनीष कुमार यादव
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करुणेश पाण्डेय
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रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू
शुरुआती जांच में इन सभी आरोपियों के बैंक खातों में इनकी तय आय से कहीं अधिक नकदी जमा होने और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के पुख्ता संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि आरोपी मनीष कुमार यादव की नियुक्ति दूसरे आरोपी रामाशंकर यादव की सिफारिश पर ही कराई गई थी।
नियमों की उड़ी धज्जियां: न ड्रेस कोड लागू था, न होती थी तलाशी
विशेष जांच दल ने ट्रस्ट द्वारा बनाई गई सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए बताया कि गणना कक्ष (Counting Room) में सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जा रही थी। कमरे में आने और बाहर जाने वाले कर्मचारियों की कोई तलाशी नहीं ली जाती थी। इतना ही नहीं, नियमों के बावजूद कर्मचारियों के लिए कोई निर्धारित ड्रेस कोड लागू नहीं था और उनके निजी सामान को अंदर ले जाने पर भी रोक नहीं लगाई गई थी। कैमरे लगे होने के बाद भी सीसीटीवी निगरानी का कोई प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा था, जिससे चोरों के हौसले बुलंद थे।
डॉ. अनिल मिश्र और प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
SIT ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों डॉ. अनिल मिश्र और गणना कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि परिसर में सुरक्षा उपायों को लागू कराने, सख्त निगरानी रखने और तय एसओपी का पालन सुनिश्चित कराने की सीधी जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों के स्तर पर थी। गणना कक्ष में मौजूद पर्यवेक्षकों और प्रभारियों ने समय रहते इन गंभीर अनियमितताओं पर कोई एक्शन नहीं लिया, जिससे इस बड़े अपराध को बढ़ावा मिला।
आपराधिक षड्यंत्र और विश्वासघात की धाराओं में केस दर्ज करने की सिफारिश
प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ चोरी, आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust), आपराधिक षड्यंत्र और अपराध को सुगम बनाने जैसी संगीन धाराओं में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, कर्तव्य में लापरवाही बरतने और अपराध को मौन बढ़ावा देने के आरोप में जिम्मेदार अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
जांच दल ने साफ किया है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है; आरोपियों की धरपकड़, बरामदगी, फोरेंसिक परीक्षण और बैंक खातों की विस्तृत वित्तीय जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी।
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