उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाज के वंचित, शोषित और विशेष जरूरत वाले वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार की इस नई पहल के अंतर्गत, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा प्रदेश में संचालित किए जाने वाले सभी अल्पकालीन (Short-term) कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्येक बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित कर दी गई हैं। सरकार के इस कदम से विशेष रूप से सक्षम युवाओं को हुनरमंद बनने और स्वावलंबी होने के समान अवसर मिल सकेंगे।
एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांग श्रेणी में विशेष प्राथमिकता, मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने दिए निर्देश
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने इस ऐतिहासिक निर्णय की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ के नियमों और प्रावधानों के अनुरूप अब एसिड अटैक पीड़ितों को भी दिव्यांगजन की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसी के दृष्टिगत, उत्तर प्रदेश के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में तेजाब हमले की शिकार महिलाओं और पीड़ितों को विशेष प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। मंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी एसिड अटैक पीड़ित महिला प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छुक और पात्र है, तो उनका पंजीकरण प्राथमिकता के आधार पर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
कौशल विकास केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और नई पहचान का जरिया
कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने इस योजना के मानवीय दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कौशल विकास केवल आजीविका या रोजगार कमाने का एक माध्यम भर नहीं है, बल्कि यह पीड़ित महिलाओं के खोए हुए आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान को वापस लौटाने का एक सशक्त जरिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का मुख्य लक्ष्य यह है कि बेहतरीन प्रशिक्षण और सम्मानजनक रोजगार के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में बिना किसी भेदभाव के समान अवसर और एक नई पहचान मिल सके, ताकि वे सिर उठाकर जी सकें।
मिशन निदेशक पुलकित खरे का एक्शन: सभी जिलों की इकाइयों को जारी हुए सख्त निर्देश
इस कल्याणकारी योजना को जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने बड़ी पहल की है। उनके निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (DPMU) को बाकायदा गाइडलाइन जारी कर दी गई है। जारी निर्देशों के मुताबिक, नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में गठित होने वाले सभी प्रशिक्षण बैचों में दिव्यांगजनों और एसिड अटैक पीड़ितों के लिए तय आरक्षित सीटों पर केवल और केवल पात्र लाभार्थियों का ही चयन सुनिश्चित किया जाएगा, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
महिला कल्याण विभाग के साथ मिलकर तैयार होगा डेटाबेस, अधिक से अधिक पीड़ितों को जोड़ने का लक्ष्य
योजना के प्रभावी और सफल क्रियान्वयन के लिए कौशल विकास मिशन ने अंतर्विभागीय समन्वय की रणनीति तैयार की है। इसके तहत सभी जिला इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि वे महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारियों (DPOs) के साथ लगातार संपर्क और समन्वय स्थापित करें। इस समन्वय का उद्देश्य जनपदवार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का एक सटीक और प्रामाणिक विवरण (डेटाबेस) तैयार करना है, ताकि सरकारी तंत्र खुद आगे बढ़कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस निशुल्क प्रशिक्षण योजना से जोड़ सके। मिशन निदेशक ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों से शासन के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया है ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक समय से पहुंच सके।
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