Sunday , 26 April 2026

UP ATS का बड़ा एक्शन: ISI की ‘टारगेट किलिंग’ की साजिश नाकाम, मेरठ और दिल्ली से दो गिरफ्तार; दुबई के रास्ते पाकिस्तान भागने का था प्लान

लखनऊ/नोएडा: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (UP ATS) ने सीमा पार से संचालित हो रहे एक खौफनाक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए देश को दहलाने की बड़ी साजिश को विफल कर दिया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और वहां के कुख्यात गैंगस्टर्स के इशारे पर भारत में ‘टारगेट किलिंग’ और संवेदनशील ठिकानों पर हमले की योजना बना रहे दो युवकों को नोएडा से गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों के तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स और कट्टरपंथी यूट्यूबर्स से जुड़े हुए हैं, जो सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं के दिमाग में जहर घोल रहे थे।

मेरठ और दिल्ली के युवकों को ISI ने बनाया मोहरा

एटीएस की गिरफ्त में आए इन आरोपियों की पहचान मेरठ के रहने वाले 20 वर्षीय तुषार चौहान (जो खुद को हिजबुल्लाह अली खान कहता था) और दिल्ली के ओल्ड सीमापुरी निवासी 20 वर्षीय समीर खान के रूप में हुई है। खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में इनके पास से एक पिस्टल, पांच जिंदा कारतूस और एक धारदार चाकू बरामद किया गया है। जांच में सामने आया है कि ये दोनों पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के सीधे संपर्क में थे और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।

इंस्टाग्राम बना ‘हनीट्रैप’ और रेडिकलाइजेशन का अड्डा

पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ISI के इशारे पर पाकिस्तानी यूट्यूबर्स और गैंगस्टर्स इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय युवाओं को बरगला रहे हैं। आरोपी तुषार चौहान पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से इतना प्रभावित था कि उसने उसके नाम से कई फर्जी आईडी बना रखी थीं। वीडियो और वॉयस कॉल के जरिए तुषार सीधे पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से निर्देश ले रहा था। यह मॉड्यूल पूरी तरह से ‘डिजिटल स्लीपर सेल’ की तरह काम कर रहा था।

ग्रेनेड हमले और ‘एक्स-मुस्लिमों’ की हत्या का था खौफनाक प्लान

पाकिस्तानी हैंडलर्स ने इन युवकों को बेहद सनसनीखेज टास्क सौंपे थे। मास्टरमाइंड शहजाद भट्टी ने तुषार को विशिष्ट लक्ष्यों (Targets) के घरों पर ग्रेनेड फेंकने और उनकी हत्या करने का हुक्म दिया था। इनके निशाने पर विशेष रूप से ‘एक्स-मुस्लिम’ और समाज के कुछ महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। हथियारों की खेप भी सीमा पार से ही पहुंचाई जानी थी। इतना ही नहीं, ये आरोपी कॉन्फ्रेंस कॉल पर पाकिस्तानी गैंगस्टर्स को लाइन पर लेकर लोगों को जान से मारने की धमकियां भी देते थे।

लाखों का लालच और ‘मेजर हामिद-इकबाल’ का कनेक्शन

आतंक की इस राह पर धकेलने के लिए तुषार को भारी भरकम रकम का लालच दिया गया था। उसे ₹50,000 एडवांस और काम पूरा होने पर ₹2.50 लाख नकद देने का वादा किया गया था। साजिश के मुताबिक, वारदात के बाद तुषार का पासपोर्ट बनवाकर उसे दुबई के रास्ते पाकिस्तान बुला लिया जाना था। एटीएस की जांच में ISI एजेंट मेजर हामिद, मेजर इकबाल और मेजर अनवर के नाम भी सामने आए हैं, जो पर्दे के पीछे से इस नेटवर्क को फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट दे रहे थे।

‘TTH’ के जरिए नई भर्ती और दीवारों पर नफरत की पेंटिंग

दूसरे आरोपी समीर खान को ‘TTH’ (तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान) के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दी गई थी। उसे सार्वजनिक दीवारों पर ‘TTH’ लिखने और इंस्टाग्राम के जरिए नए लड़कों को इस नेटवर्क में भर्ती (Recruit) करने का टास्क मिला था। एटीएस ने दोनों पर यूएपीए (UAPA) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब इन्हें रिमांड पर लेकर यह पता लगाया जाएगा कि इनके नेटवर्क में और कितने युवा शामिल हैं और इनके अगले निशाने पर कौन था।

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