कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ता का सिंहासन किसे मिलेगा? इस महायुद्ध का फैसला आज होने वाला है। बंगाल की 293 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना की प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो चुकी है। शुरुआती दौर में डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलट) की गिनती की जा रही है, जिसके तुरंत बाद ईवीएम के पिटारे खुलते ही सूबे की नई सरकार की तस्वीर साफ होने लगेगी। फिलहाल जो रुझान सामने आ रहे हैं, वे इशारा कर रहे हैं कि बंगाल में मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प होने वाला है।
कांटे की टक्कर: भाजपा और टीएमसी में ‘नैक टू नैक’ फाइट
मतगणना के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिल रही है। अभी तक मिले संकेतों के अनुसार, भाजपा 60 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि सत्ताधारी टीएमसी 58 सीटों पर आगे चल रही है। हालांकि, ये शुरुआती आंकड़े हैं और डाक मतपत्रों के हैं, इसलिए असली तस्वीर 8:30 बजे के बाद ही उभरना शुरू होगी। राज्य की फालता सीट पर 21 मई को दोबारा चुनाव होना है, इसलिए आज कुल 293 सीटों के भाग्य का फैसला होगा।
भवानीपुर में हाई वोल्टेज ड्रामा: काउंटिंग सेंटर के बाहर भिड़े समर्थक
बंगाल चुनाव में हिंसा और झड़प की खबरें मतगणना के दिन भी पीछा नहीं छोड़ रही हैं। भवानीपुर के सखावत मेमोरियल स्कूल के बाहर सुबह 6:30 बजे ही माहौल गरमा गया। यहां टीएमसी और भाजपा के एजेंटों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद झड़प हो गई। बता दें कि भवानीपुर सीट सबसे हॉट मानी जा रही है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से है। नंदीग्राम के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी प्रतिष्ठा की जंग है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।
क्या ममता लगाएंगी जीत का चौका या खिलेगा कमल?
पिछले 15 सालों से बंगाल की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी क्या चौथी बार वापसी कर पाएंगी? यह सवाल आज हर किसी की जुबां पर है। दूसरी ओर, भाजपा ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और पार्टी को उम्मीद है कि वह पहली बार बंगाल में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सरकार बनाएगी। अगर भाजपा जीतती है तो यह भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर होगा, वहीं ममता की जीत उनके सियासी कद को और मजबूती देगी।
दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
राज्य के कोने- कोने से आ रहे नतीजों में कई दिग्गजों की किस्मत का फैसला होना है। नंदीग्राम से लेकर भवानीपुर और टॉलीगंज से लेकर सिंगूर तक, हर सीट पर समीकरण बदल रहे हैं। जैसे-जैसे ईवीएम के राउंड बढ़ेंगे, हार-जीत का अंतर स्पष्ट होता जाएगा। चुनाव आयोग ने मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
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