Saturday , 25 July 2026

यूपी चुनाव से पहले ‘मुस्लिम चेहरे’ की जंग: इमरान मसूद के तीखे तेवरों ने बढ़ाई सपा की टेंशन, क्या कांग्रेस का ये है मास्टरस्ट्रोक?

 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बिगुल में भले ही अभी कुछ समय बाकी हो, लेकिन सूबे की सियासी फिजां में गरमाहट अभी से महसूस होने लगी है। कांग्रेस के फायरब्रांड नेता और सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच छिड़े जुबानी दंगल ने सूबे का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सीटों के बंटवारे को लेकर शुरू हुई यह तकरार अब ‘मुस्लिम नेतृत्व’ की वर्चस्व की जंग में तब्दील होती नजर आ रही है।

सपा और इमरान मसूद में जुबानी जंग तेज, हाईकमान के पाले में गेंद

इस सियासी घमासान की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस के राज्य प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने गठबंधन में बराबरी की हिस्सेदारी का राग अलापा। इसके बाद इमरान मसूद ने भी गठबंधन की शर्तों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। इस पर पलटवार करते हुए सपा के दिग्गज नेता उदयवीर सिंह ने तंज कसा कि इमरान मसूद से क्या बात करनी, जो भी तय होगा वह दोनों दलों का हाईकमान ही तय करेगा।

सपा के इस रुख पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी चुप रहना मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने सीधे तौर पर सपा की दुखती रग पर हाथ रख दिया। मसूद ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी को मुखर होकर बोलने वाले मुस्लिम नेता रास नहीं आते हैं। बात यहीं नहीं रुकी, मसूद ने सपा को आईना दिखाते हुए यहां तक कह दिया कि आज के दौर में कांग्रेस से ज्यादा समाजवादी पार्टी को गठबंधन की दरकार है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ आने की वजह से ही सपा 37 सीटों के आंकड़े तक पहुंच पाई थी।

अखिलेश यादव की ‘चुप्पी’ पर सीधे वार, क्या है कांग्रेस की नई रणनीति?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इमरान मसूद की यह तल्खी बेवजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति है। मसूद के जरिए कांग्रेस, सपा नेतृत्व पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहती है ताकि आगामी सीटों के बंटवारे में वह मजबूत बारगेनिंग (मोलतोल) कर सके। 22 जून, 2026 को सहारनपुर में दिए अपने बयान में भी मसूद ने सीधे तौर पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव की घेराबंदी की थी।

मसूद ने बिना नाम लिए कहा था कि यूपी में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अन्याय पर बड़े नेताओं की चुप्पी समझ से परे है। उन्होंने तंज कसा कि राम मंदिर के चंदे से जुड़े मुद्दों पर तो सपा खुलकर बोलती है, लेकिन जब बात मुसलमानों पर हो रहे कथित जुल्म या बुलडोजर एक्शन की आती है, तो वहां चुप्पी साध ली जाती है। जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस रणनीति के जरिए यूपी के मुस्लिम वोट बैंक को पूरी तरह से अपनी तरफ ध्रुवीकृत करने की फिराक में है।

आजम खान जेल में और अफजाल शांत, इमरान मसूद के लिए खुला मैदान

उत्तर प्रदेश की सियासत में इस समय एक बड़ा शून्य साफ दिखाई दे रहा है। सपा के सबसे कद्दावर मुस्लिम नेता आजम खान फिलहाल जेल में हैं, जिससे पार्टी के पास राज्य स्तर पर कोई बड़ा और आक्रामक मुस्लिम चेहरा नहीं बचा है। दूसरी ओर, गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी भले ही बड़े और सीनियर नेता हैं, लेकिन हाल के दिनों में उनके तेवर बेहद संभलकर सामने आ रहे हैं। सियासी हलकों में कयास हैं कि अफजाल को सपा नेतृत्व की तरफ से संयम बरतने का कोई साफ संदेश मिला है।

सपा के भीतर बड़े मुस्लिम चेहरों की इसी खामोशी का फायदा कांग्रेस उठाना चाहती है। कांग्रेस के पास भी सूबे में फिलहाल कोई दूसरा फायरब्रांड नेता नहीं है, ऐसे में इमरान मसूद को आगे करके पार्टी एक तीर से दो निशाने साध रही है। एक तरफ वह सपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा रही है, तो दूसरी तरफ सपा के लिए मसूद जैसे आक्रामक नेता पर सीधा पलटवार करना भी भारी पड़ रहा है।

150 सीटों पर कांग्रेस की नजर, ‘ए ग्रेड’ फॉर्मूले से बदलेगा खेल!

मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने अब एक नया दांव चला है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर मुखर रहने से वे उन क्षेत्रों में सपा से आगे निकल सकते हैं। इसी भरोसे के दम पर कांग्रेस ने सूबे की करीब 150 सीटों को अपने लिए ‘ए ग्रेड’ यानी सबसे मजबूत श्रेणी में रखा है।

ये तमाम सीटें मुस्लिम आबादी के प्रभाव वाली हैं। कांग्रेस का साफ मानना है कि अगर गठबंधन के तहत उसे इन 150 सीटों पर किस्मत आजमाने का मौका मिलता है, तो वह चौंकाने वाले परिणाम दे सकती है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस के इस आक्रामक पैंतरे पर समाजवादी पार्टी का अगला कदम क्या होता है।

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