अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित करोड़ों की चोरी और गबन के मामले में पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। पुलिस ने गुरुवार को एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि रामलला के दरबार में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश किया जा रहा था और बाजार में ऊंची ब्याज दरों पर उधार दिया जा रहा था। मामले की गहराई से जांच कर रही पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों के करीबियों और रिश्तेदारों के 30 बैंक खातों को फ्रीज (लेनदेन पर रोक) कर दिया है।
रिश्तेदारों के बैंक खातों से छुपाया जा रहा था ‘पाप का पैसा’
पुलिस और जांच एजेंसियों के मुताबिक, राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने एक बेहद शातिर नेटवर्क तैयार किया था। गबन की गई भारी-भरकम रकम को सीधे अपने खातों में डालने के बजाय, आरोपियों ने अपने बेहद करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। शुरुआती जांच में फ्रीज किए गए इन 30 खातों में खाताधारकों की कानूनी और ज्ञात आय के स्रोतों से कई गुना ज्यादा का संदिग्ध लेनदेन दर्ज पाया गया है। आरोपियों की चालाकी का आलम यह था कि वे पहले पैसा रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर करते थे और बाद में घुमा-फिराकर उस रकम को वापस अपने खातों में ले लेते थे ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके।
आरोपियों के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, मिला सोने-चांदी और नकदी का अंबार
मामले की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस टीम ने कोर्ट की अनुमति के बाद तीनों मुख्य आरोपियों— करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के घरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को पुलिस आरोपी अनुकल्प मिश्रा को भारी सुरक्षा के बीच उसके अयोध्या स्थित आवास पर ले गई, जहां करीब 20 मिनट तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान उसके परिवार के सदस्यों से भी बंद कमरे में पूछताछ की गई। इससे ठीक एक दिन पहले बुधवार को सह-आरोपियों लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे के घरों को भी खंगाला गया था। इन छापों में पुलिस को भारी मात्रा में नकदी के बंडल, सोने के आभूषण (लॉकेट और झुमके) तथा एक आलीशान कार बरामद हुई है। हालांकि, जांच की गोपनीयता बनाए रखने के लिए पुलिस ने अभी तक जब्त की गई नकदी के सटीक आंकड़े का खुलासा नहीं किया है।
चोरी के पैसों से खरीदी 1 एकड़ जमीन, बाजार कीमत करोड़ों में!
पूछताछ के दौरान आरोपी अनुकल्प मिश्रा और सह-आरोपी अविनाश ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उन्होंने मंदिर के दान के पैसों को न सिर्फ शेयर बाजार में मल्टीफोल्ड रिटर्न के लिए लगाया, बल्कि मोटी ब्याज पर लोगों को लोन के रूप में भी बांटा था। अनुकल्प के घर पर पड़े छापे के दौरान पुलिस के हाथ जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े कुछ बेहद अहम दस्तावेज (Registry Documents) भी लगे हैं। इन दस्तावेजों के मुताबिक, अयोध्या में ही अनुकल्प के नाम पर एक एकड़ की प्राइम लैंड (जमीन) खरीदी गई थी। कागजों पर इस जमीन की कीमत करीब 6.7 लाख रुपये दिखाई गई है, लेकिन रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं और इस एक एकड़ जमीन की मौजूदा बाजार कीमत कई गुना ज्यादा यानी करोड़ों में होने का अनुमान है।
SIT की जांच में हुआ भंडाफोड़, अब तक 8 गिरफ्तार
गौरतलब है कि इस महाघोटाले की शुरुआत जून 2026 के पहले सप्ताह में हुई थी, जब राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा चढ़ावे की राशि की गिनती के दौरान भारी वित्तीय अनियमितताएं और पैसों का अंतर पाया गया था। इसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हड़कंप मच गया और ट्रस्ट की ही सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी को अपनी शुरुआती तफ्तीश में ही बड़े पैमाने पर गबन और हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिले, जिसके बाद आनन-फानन में एफआईआर दर्ज की गई। मंदिर के दान की गिनती और प्रबंधन से जुड़े अब तक 8 कर्मचारियों और आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। अयोध्या पुलिस का कहना है कि यह एक बहुत बड़ा सिंडिकेट हो सकता है और मामले की कड़ाई से जांच अभी जारी है।
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