Friday , 31 July 2026

अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, दान व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए CCTV निगरानी और नई SOP लागू; जगदीश आफले बने पहले सचिव

अयोध्या (उत्तर प्रदेश)।  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरी व्यवस्था को सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे की गिनती, बैंक में जमा कराने और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया को अब आधुनिक तकनीक और कड़ी निगरानी के दायरे में लाया जा रहा है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश को खत्म करना और देश-दुनिया के करोड़ों भक्तों का विश्वास मजबूत करना है।

CCTV कैमरों की निगरानी में होगी दान की गिनती, मजबूत होगी SOP

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब मंदिर में दान पेटियों (दान पात्र) को खोलने से लेकर नकदी की छंटाई, नोट गिनने की मशीनों के इस्तेमाल, पैकेजिंग और रकम को बैंक तक पहुंचाने तक का हर चरण CCTV कैमरों की सीधी निगरानी में होगा। इसके अलावा पूरे प्रक्रिया प्रबंधन के लिए एक नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) ड्राफ्ट किया गया है। गिनती कक्ष में केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही जाने की अनुमति होगी और हर एक गतिविधि का डिजिटल दस्तावेजीकरण (Documentation) किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाबदेही तय की जा सके।

प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल: जगदीश आफले बने पहले सचिव

विशेष पर्वों और धार्मिक आयोजनों के दौरान राम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दान राशि भी काफी बढ़ जाती है। इसे सुचारू रूप से प्रबंधित करने के लिए ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर अनुभवी लोगों को आगे लाया है। इसी कड़ी में जगदीश आफले को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला सचिव नियुक्त किया गया है, जिसकी औपचारिक घोषणा 2 सितंबर की आगामी बैठक में की जाएगी। उन्हें प्रशासनिक समन्वय और दान निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि चंपत राय के पद छोड़ने के बाद फिलहाल कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

तकनीक और स्वतंत्र ऑडिट से बढ़ेगा श्रद्धालुओं का भरोसा

मंदिर प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इन बदलावों का मकसद केवल सुरक्षा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था और भरोसे को और प्रगाढ़ करना है। आने वाले दिनों में दान की डिजिटल रिकॉर्डिंग, समयबद्ध रिपोर्टिंग और निष्पक्ष स्वतंत्र ऑडिट (Independent Audit) जैसी व्यवस्थाओं को और भी सख्त किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता का उच्च मानक स्थापित हो सके।

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