Thursday , 1 October 2026

एक-दूसरे को देखा तक नहीं, खूब रोए, खाना भी छोड़ा… दोषी करार होते ही जेल में कैसे बीती मुस्कान-साहिल की रात?

उत्तर प्रदेश के मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत ‘नीले ड्रम’ हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को हत्या व साक्ष्य मिटाने का दोषी करार दिया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय की अदालत ने पत्रावलियों पर मौजूद ठोस सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों को जघन्य हत्याकांड का मुजरिम माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है कि दोनों ने मिलकर पहले सौरभ की नृशंस हत्या की और फिर शव के टुकड़े-टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट भरकर साक्ष्य छिपाने की खौफनाक साजिश रची।

गोद में मासूम बच्ची लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुई मुस्कान, फैसला सुनते ही छलके आंसू सुरक्षा कारणों के चलते बुधवार को मेरठ जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से दोनों आरोपियों की अदालत में पेशी कराई गई थी। सुनवाई के दौरान मुस्कान की गोद में उसकी नन्ही बेटी भी मौजूद थी। जैसे ही न्यायाधीश ने दोनों को हत्या का दोषी ठहराने का फैसला सुनाया, दोनों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं और वे गहरे सन्नाटे में डूब गए। वीसी रूम से बाहर निकलते वक्त मुस्कान और साहिल की आंखों से आंसू बह रहे थे। हैरत की बात यह रही कि इतना बड़ा फैसला आने के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी, एक-दूसरे की ओर देखा तक नहीं और सिर झुकाए अलग-अलग अपनी बैरकों की तरफ लौट गए।

जेल में बेचैन रहे दोनों दोषी, रात का खाना खाने से किया इनकार वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, फैसले के दिन सुबह से ही दोनों काफी बेचैन और तनाव में दिख रहे थे। मुस्कान पिछले तीन दिनों से लगातार अपनी बैरक में पूजा-पाठ कर रही थी और बुधवार को भी दोनों ने नाममात्र का खाना खाया था। अदालत द्वारा मुजरिम करार दिए जाने के बाद दोनों को गहरा सदमा लगा है और वे पूरी तरह गुमसुम हो गए हैं। बुधवार की रात दोनों ने जेल में परोसा गया खाना खाने से साफ इनकार कर दिया। जेल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर दोनों की सुरक्षा और कड़ी निगरानी बढ़ा दी है। उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा रही है, जरूरत पड़ने पर काउंसिलिंग भी कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि पिछले 17 महीनों में मुस्कान से मिलने उसका कोई परिजन जेल नहीं पहुंचा, जबकि साहिल से पहले उसकी नानी और अब उसका भाई मुलाकात करने आता है।

जज की तल्ख टिप्पणी: ऐसे अपराध से समाज में फैलता है खौफ, शव के टुकड़े करना जघन्य कृत्य सुनवाई के दौरान जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वितीय ने इस वीभत्स हत्याकांड पर बेहद गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे जघन्य अपराध से समूचे समाज में भय, असुरक्षा और अविश्वास का माहौल बनता है। अदालत का दायित्व केवल मुजरिम को दंड देना ही नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने की सुरक्षा करना और कानून के प्रति आमजन का भरोसा बनाए रखना भी है। किसी इंसान की हत्या कर उसके शव के टुकड़े करना घोर अमानवीय और अक्षम्य अपराध है। अदालत ने दोषियों से कहा कि फैसला तो लिया जा चुका है कि क्या सजा मिलनी चाहिए, फिर भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें अपनी सफाई और अंतिम पक्ष रखने के लिए 15 दिन की मोहलत दी जाती है। अब सजा के निर्धारण के लिए अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।

कोर्ट रूम में फूट-फूट कर रोया पीड़ित परिवार, वकीलों ने की फांसी की मांग अदालत का फैसला आते ही मृतक सौरभ राजपूत के भाई राहुल और मां रेनू देवी की आंखें भर आईं और वे कोर्ट परिसर में ही रो पड़े। पीड़ित पक्ष की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता केके चौबे और विजय बहादुर ने निष्पक्ष फैसले के लिए अदालत के प्रति आभार व्यक्त किया। अधिवक्ताओं ने दो टूक कहा कि जिस बर्बरता के साथ सौरभ की जान ली गई और शव के टुकड़े कर ड्रम में सीमेंट से सील किया गया, वह ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ (दुर्लभतम से दुर्लभ) श्रेणी का अपराध है, इसलिए दोनों दोषियों को फांसी की सजा से कम कुछ भी मंजूर नहीं होना चाहिए।

 

Check Also

आगरा में खौफनाक वारदात: पत्नी की हत्या कर टिनशेड में फूंका शव, यमुना में बहाईं अस्थियां; खुद थाने पहुंच दर्ज कराई गुमशुदगी, ऐसे खुला राज

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के अछनेरा थाना क्षेत्र में पति-पत्नी के रिश्ते को तार-तार …