Sunday , 14 June 2026

Ayodhya Ram Mandir Scam: 18-20 हजार की सैलरी और डेढ़ करोड़ की जमीन! ऐसे रडार पर आए राम मंदिर के चढ़ावे से ‘करोड़पति’ बने कर्मचारी

अयोध्या: देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। भगवान राम के दरबार में भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए गए सोने-चांदी, गहनों और नगदी में करोड़ों रुपये की हेराफेरी (चोरी) का एक बड़ा सिंडिकेट पकड़ा गया है। यह पूरा खेल तब उजागर हुआ जब राम मंदिर में महज 18 से 20 हजार रुपये महीने की पगार पर काम करने वाले बैंक और ट्रस्ट के कुछ मामूली कर्मचारियों ने अचानक करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीनें और कमर्शियल प्लॉट खरीदने शुरू कर दिए। मामले के तूल पकड़ते ही उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है, जिसने अयोध्या में डेरा डाल दिया है।

पूर्व सीएम अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हड़कंप

यह बेहद संवेदनशील मामला तब देश भर की सुर्खियों में आया, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर इस महाघोटाले का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। अखिलेश यादव ने इस हेराफेरी को सबसे पहले उजागर करते हुए सीधे सरकार और प्रशासन को घेरा। शनिवार को उन्होंने एक्स पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा:

“इस षड्यंत्र का मूल दूर नहीं है, इसलिए सच में कार्रवाई करने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि दोषी के बारे में पता करने में पुलिस अक्षम है तो हम सहायता कर दें।”

उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में बड़ी कार्रवाई शुरू की गई।

₹20 हजार पाने वाले कर्मियों के पास मिलीं करोड़ों की संपत्तियां

राम मंदिर में हर दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और दिल खोलकर दानपात्रों (दान पेटियों) में चढ़ावा चढ़ाते हैं। इन भारी-भरकम बक्सों से पैसे निकालने, उन्हें सुरक्षित रखने और गिनने की एक बेहद जिम्मेदारी भरी जिम्मेदारी कुछ चुनिंदा कर्मियों को दी गई थी। लेकिन जब खुफिया और जांच एजेंसियों ने इन बैंक कर्मियों के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले, तो जमीन-आसमान का अंतर देखकर उनके होश उड़ गए। पता चला कि महज 18-20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले एक कर्मचारी ने हाल ही में करीब 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी थी, जबकि एक दूसरे कर्मचारी ने ₹40 लाख का आलीशान प्लॉट अपने नाम कराया था।

गोबर के ढेर और अलमारी से मिले 10 लाख कैश, आरोपी लवकुश हिरासत में

इस पूरे भ्रष्टाचार के सिंडिकेट में सबसे पहला और बड़ा नाम लवकुश मिश्रा का सामने आया है। लवकुश अयोध्या के पास रुदौली के शुजागंज इलाके के मीनापुर फगौली गांव का रहने वाला है। उसकी ड्यूटी राम मंदिर के दानपात्रों से पैसे निकालने और गिनने की थी। जब स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और स्थानीय पुलिस की 6 सदस्यीय संयुक्त टीम (जिसमें दो वर्दीधारी और चार सादे कपड़ों में थे) ने लवकुश के पैतृक घर पर छापा मारा, तो वहां की हकीकत देख सब दंग रह गए। जांच टीम को घर की अलमारी और घर के पीछे बने गोबर के ढेर में छुपाकर रखे गए ₹10 लाख रुपये नगद बरामद हुए। गांव वालों के मुताबिक, राम मंदिर में ड्यूटी लगने के बाद से लवकुश की लाइफस्टाइल और आर्थिक स्थिति रॉकेट की रफ्तार से बदली थी।

पिता का अजीब दावा: जमीन गिरवी रखकर जुटाए थे ₹10 लाख

लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए एक अजीबोगरीब दलील दी है। उन्होंने घर से ₹10 लाख कैश मिलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन दावा किया कि यह पैसा उन्होंने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखकर जुटाया था। पिता का यह भी कहना है कि फैजाबाद (अयोध्या शहर) में जो उनका नया मकान बन रहा है, उससे उनके बेटे लवकुश का कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, एसओजी (SOG) ने लवकुश को हिरासत में ले लिया है और उससे गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है कि नोटों की गिनती के दौरान वे किस तकनीक या जुगाड़ से रोज लाखों की नगदी पार करते थे। पुलिस अब मंदिर परिसर के महीनों पुराने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और बैंक के वित्तीय ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक जांच कर रही है।

मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में बनी हाई-लेवल SIT

मामले की गंभीरता और करोड़ों भक्तों की आस्था को चोट पहुंचती देख ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ ने तुरंत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की सिफारिश की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर यूपी सरकार ने एक बेहद पावरफुल विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस SIT का अध्यक्ष लखनऊ के मंडलायुक्त (Commissioner) विजय विश्वास पंत को बनाया गया है। इसके अलावा तेजतर्रार आईपीएस (IPS) अफसर किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को इसका सदस्य नियुक्त किया गया है। सरकार ने सख्त हिदायत दी है कि एसआईटी को 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और 15 दिनों के अंदर फाइनल क्लोजर रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।

नृपेंद्र मिश्रा का मौन, कैबिनेट मंत्री और विनय कटियार की तीखी प्रतिक्रिया

इस बड़े विवाद के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा 5 दिनों के भीतर दूसरी बार अचानक अयोध्या पहुंचे। उन्होंने मंदिर के बाकी बचे निर्माण कार्यों का जायजा लिया। हालांकि, जब मीडिया ने उनसे दान चोरी घोटाले पर सवाल पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका काम केवल निर्माण कार्य देखना है, इस विवाद पर वे कुछ नहीं बोलेंगे। दूसरी तरफ, यूपी के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि ट्रस्ट इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और किसी भी सूरत में भक्तों की आस्था से खिलवाड़ करने वाले जेल की सलाखों के पीछे होंगे। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर आंदोलन का मुख्य चेहरा रहे विनय कटियार ने भारी नाराजगी जताते हुए कहा, “यह मंदिर लाखों लोगों के बलिदान और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सत्ता की आहुति का प्रतीक है। यहां चमड़ी का एक पैसा भी भ्रष्टाचार में गया तो बर्दाश्त नहीं होगा। मैं खुद इस मामले में एसएसपी और डीआईजी से मिलकर दोषियों को कड़ी सजा दिलवाऊंगा।”

सपा की बड़ी मांग: नैतिक जिम्मेदारी लेकर पद छोड़ें ट्रस्ट के पदाधिकारी

समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर लगातार हमलावर है। पूर्व विधायक और सपा के वरिष्ठ नेता तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मांग की है कि जब तक एसआईटी (SIT) की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए ताकि जांच निष्पक्ष हो सके। पवन पांडे ने यह भी याद दिलाया कि ट्रस्ट से जुड़े महिपाल सिंह ने काफी पहले ही चढ़ावे और खातों में गड़बड़ी की आशंका जताई थी, जिसे तब ट्रस्ट के बड़े लोगों ने हल्के में लेकर दबा दिया था। विपक्ष का कहना है कि अगर ट्रस्ट के पदाधिकारी सचमुच साफ-सुथरे हैं, तो उन्हें खुद आगे आकर इस स्वतंत्र जांच का स्वागत करना चाहिए।

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