Saturday , 11 July 2026

ईरान में अयातुल्ला खामेनेई सुपुर्द-ए-खाक: अंतिम विदाई में बेटे मुज्तबा समेत कई पूर्व राष्ट्रपति रहे नदारद, खड़ा हुआ बड़ा राजनीतिक संकट

तेहरान। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में गमगीन माहौल के बीच अंतिम विदाई दे दी गई है। 9 जुलाई को लाखों की नम आंखों के बीच उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी 2026 को एक भीषण अमेरिकी-इजरायली एयरस्ट्राइक में उनकी मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही ईरान में शोक का माहौल है। हालांकि, इस ऐतिहासिक जनाजे के दौरान सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई की गैरमौजूदगी रही, जिसने देश-दुनिया के विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्य इस मौके पर मौजूद रहे।

सुरक्षा कारणों से छिपे रहे मुज्तबा, कई पूर्व राष्ट्रपतियों ने भी बनाई दूरी

अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई बेहद कड़े सुरक्षा कारणों और अपनी जान के खतरे को देखते हुए पिता के जनाजे में शामिल नहीं हुए। लेकिन इस जनाजे में उमड़ी लाखों की भीड़ के बीच ईरान की कई दिग्गज राजनीतिक हस्तियों का न दिखना देश के राजनीतिक भविष्य और आंतरिक एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर गया। खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान देश के कई पूर्व राष्ट्रपति पूरी तरह गायब नजर आए। इसमें प्रमुख रूप से सुधारवादी नेता और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी और हसन रूहानी शामिल हैं। बता दें कि इन दोनों ही नेताओं के खामेनेई के साथ लंबे समय से गहरे वैचारिक मतभेद रहे थे।

अहमदीनेजाद का यू-टर्न: जुलूस में दिखे, लेकिन दफनाने के वक्त गायब

ईरान के एक और कद्दावर पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भी खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के मुख्य कार्यक्रम से नदारद रहे। उनके संबंध भी अंतिम दिनों में पूर्व सुप्रीम लीडर के साथ काफी तल्ख हो गए थे। हालांकि, दिलचस्प बात यह रही कि सोमवार (06 जुलाई) को जब खामेनेई की अंतिम विदाई का मुख्य जुलूस निकाला जा रहा था, तब वह उसमें शामिल हुए थे। सालों तक मुख्यधारा की राजनीति से दूर रहने के बाद अहमदीनेजाद का इस तरह सार्वजनिक रूप से दिखना चर्चा का विषय बना। लेकिन अंतिम विदाई के मुख्य मंच से इन बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी ने ईरानी हुकूमत के उस खोखले दावे की पोल खोल दी, जिसमें वे देश में पूरी राजनीतिक एकजुटता होने की बात दुनिया के सामने पेश करना चाहते थे।

विपक्ष को साथ लाने का सुनहरा मौका गंवाया

इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी शासन ने जानबूझकर इस आयोजन को केवल मौजूदा कट्टरपंथी नेतृत्व के करीबी लोगों तक ही सीमित रखा। अमेरिका में रहने वाले प्रसिद्ध ईरान विशेषज्ञ और ‘व्हाट ईरानियंस वांट’ के लेखक अराश अजीज़ी का कहना है कि कार्यक्रम के आयोजकों के पास यह एक शानदार मौका था, जब वे सुधारवादी विचारधारा से जुड़े पूर्व राष्ट्रपतियों को मंच पर साथ लाकर देश की अटूट राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन कर सकते थे। लेकिन उन्होंने इस ऐतिहासिक मौके को गंवा दिया और केवल सत्ता के शीर्ष व वफादार अधिकारियों को ही आगे रखा।

दुनिया को ताकत दिखाने की कोशिश, लेकिन अंदरूनी डर आया सामने

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्ट के डायरेक्टर अली वाएज़ ने इस पर अपनी गहन प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि तेहरान की हुकूमत इस भव्य जनाजे के जरिए दुनिया को यह कड़ा संदेश देना चाहती थी कि अपने सर्वोच्च नेता को खोने के बाद भी ईरान का सिस्टम कमजोर नहीं हुआ है और वह लगातार काम करता रहेगा। भारी भीड़ और बेहद सलीके से आयोजित यह कार्यक्रम इसी निरंतरता को दिखाने की एक कोशिश था। लेकिन दूसरी तरफ, देश के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरों की दूरी दुनिया को यह साफ बताती है कि ईरान का मौजूदा नेतृत्व अंदर से खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहा है और वह सबको साथ लेकर चलने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है।

 

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