अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में प्रभु राम के चढ़ावे और चंदे की रकम में हुई महा-चोरी का मामला अब हर गुजरते घंटे के साथ बेहद विस्फोटक होता जा रहा है। पुलिस द्वारा 8 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजे जाने के बाद अब इस सिंडिकेट में दो बड़े सफेदपोशों की एंट्री हुई है, जिससे हड़कंप मच गया है। पुलिस ने अब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के दो बैंक कर्मियों रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप पर शिकंजा कसने की पूरी तैयारी कर ली है। जांच एजेंसियों को इन दोनों बैंक अधिकारियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध मिली है, वहीं पहले से गिरफ्तार आरोपियों ने भी रिमांड के दौरान कबूलनामे में इन दोनों का नाम उगल कर सनसनी फैला दी है।
चढ़ावा गिनने से लेकर जमा करने तक… रक्षक ही बन गए भक्षक!
पुलिस सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, एसबीआई (SBI) अयोध्या धाम ब्रांच की तरफ से दान की रकम को गिनने और उसे सुरक्षित बैंक में जमा कराने की पूरी निगरानी (Supervision) की जिम्मेदारी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप की ही थी। मंदिर ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, इनकी मौजूदगी के बिना नोटों की गिनती या बैंक ट्रांसफर मुमकिन ही नहीं था। लेकिन जांच में सामने आया है कि ये दोनों रक्षक ही इस पूरे चोर सिंडिकेट के ‘मास्टरमाइंड’ बन बैठे और अंदर ही अंदर आरोपियों से हाथ मिला लिया।
माइंड ब्लोइंग खेल: जब चोरी नहीं कर पाते थे, तो रजिस्टर में ही कम कर देते थे 2-3 लाख रुपये
पुलिस की प्राथमिक जांच में आरोपियों और बैंक कर्मियों के बीच की जो साठगांठ सामने आई है, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये आरोपी हर बार बेहद शातिराना तरीके से 2 से 3 लाख रुपये पार कर देते थे। जिस दिन सुरक्षा व्यवस्था सख्त होती थी या सीसीटीवी (CCTV) की कड़ी निगरानी के कारण ये लोग नकदी पर हाथ साफ नहीं कर पाते थे, उस दिन बैंक कर्मी रत्नेश और गगनदीप नोटों की कुल गिनती के फाइनल आंकड़े में ही 2 से 3 लाख रुपये कम करके दिखाते थे। इसके बाद जब पूरी रकम बैंक में जमा करने के लिए ले जाई जाती थी, तो रास्ते या प्रक्रिया के दौरान उस कम दिखाए गए 2-3 लाख रुपये को चुपके से निकाल लिया जाता था। अब पुलिस इन दोनों बैंक कर्मियों के साथ-साथ एसबीआई के एक सीनियर अफसर से भी आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है।
ट्रस्ट की सिफारिश पर लगे थे आउटसोर्सिंग कर्मी, सुभाष श्रीवास्तव लगाता था ड्यूटी
जांच में इस पूरे रैकेट के सांगठनिक ढांचे का भी पर्दाफाश हुआ है। बताया जा रहा है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की विशेष सिफारिश पर अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और करुणेश पांडे को आउटसोर्सिंग कर्मचारी के रूप में चढ़ावे की गणना (Note Counting) के काम में लगाया गया था। इन सभी पर पूर्व बैंक कर्मी और गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की छत्रछाया थी, जो इन लोगों की नोट गिनने के काम में ड्यूटी लगाता था। वहीं, पूरे सिंडिकेट को संभालने, ऊपर सेटिंग करने और बैकएंड की देखरेख का जिम्मा मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के पास था।
आज एंटी करप्शन स्पेशल कोर्ट में होगी पेशी, दर्ज हुई है भ्रष्टाचार निवारण की धारा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों की आज एंटी करप्शन स्पेशल कोर्ट (भ्रष्टाचार निवारण विशेष अदालत) में पेशी होने जा रही है। आपको बता दें कि शुक्रवार को मोहर्रम की सरकारी छुट्टी होने के चलते आनन-फानन में आरोपियों को स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था, लेकिन अब इस पूरे मामले का मुकदमा एंटी करप्शन कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। दरअसल, पुलिस ने एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Anti-Corruption Act) की गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। यह धारा जनता के धन के गबन, सरकारी अधिकारियों या बैंक कर्मियों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की संलिप्तता होने पर ही लगाई जाती है, जिससे अब आरोपियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ना तय है।
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