Monday , 27 July 2026

अलीगंज अग्निकांड: अलीगढ़ से सीधे ग्राउंड जीरो और अस्पताल पहुंचे सीएम योगी; 4 गिरफ्तार, 4 बड़े अफसर सस्पेंड, अब SIT के निशाने पर ‘बड़े साहब’ !

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘फुल एक्शन’ मोड में आ गए हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद सरकार की तरफ से ताबड़तोड़ और बेहद सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री ने हाईलेवल मीटिंग के बाद जहां 4 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, वहीं बिजली, फायर ब्रिगेड और एलडीए (LDA) के 4 जिम्मेदार अफसरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। शासन के इस कड़े रुख से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

मंच से ही कर दिया था कार्यक्रम रद्द करने का ऐलान

जिस वक्त अलीगंज की इस इमारत में आग की लपटों ने तांडव मचाया, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समय अलीगढ़ के दौरे पर थे और एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जैसे ही उन्हें मंच पर इस भीषण हादसे की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत अपने आगे के सभी कार्यक्रमों को रद्द करने की घोषणा की और सीधे लखनऊ के लिए रवाना हो गए। हालांकि, लखनऊ पहुंचने से पहले ही उन्होंने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और प्रशासन के आला अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य तेज करने के कड़े निर्देश दे दिए थे।

एयरपोर्ट से सीधे ग्राउंड जीरो और फिर केजीएमयू पहुंचे मुख्यमंत्री

लखनऊ पहुंचते ही सीएम योगी आदित्यनाथ का काफिला बिना रुके सीधे अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुंचा। मुख्यमंत्री ने खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया। इसके बाद वह सीधे किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) पहुंचे, जहां उन्होंने भर्ती घायलों का हाल-चाल जाना। सीएम ने मौके पर मौजूद डॉक्टरों को निर्देश दिए कि घायलों के इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए और उन्हें वीआईपी मेडिकल सुविधाएं दी जाएं। मुख्यमंत्री ने इस हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए 5-5 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का बड़ा ऐलान किया।

5 कालिदास मार्ग पर बुलाई हाईलेवल मीटिंग, SIT का गठन

अस्पताल से निकलने के बाद मुख्यमंत्री सीधे अपने सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग पहुंचे, जहां उन्होंने देर रात एक हाईलेवल इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। इस बैठक में शासन और पुलिस प्रशासन के तमाम बड़े विंग के अफसर मौजूद रहे। सीएम ने हादसे की गहराई से जांच के लिए तत्काल प्रभाव से एक दो-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया। इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी का नेतृत्व अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार को सौंपा गया है। एसआईटी को 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी होगी।

4 अभियुक्त गिरफ्तार, इन 4 अफसरों पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद पुलिस और प्रशासन ने मिलकर संयुक्त कार्रवाई की। पुलिस ने इस अग्निकांड के मुख्य जिम्मेदार 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके नाम इस प्रकार हैं:

  • रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज, लखनऊ)

  • वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर, सीतापुर रोड, लखनऊ)

  • तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ)

  • सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव, लखनऊ)

इसके साथ ही, प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने के आरोप में सरकार ने 4 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है:

  1. गौरव कुमार – अधिशासी अभियंता (XEN कलेक्शन), जानकीपुरम बिजली विभाग

  2. कमलेन्द्र कुमार सिंह – प्रभारी एफएसएसओ (FSSO), इंदिरा नगर फायर विभाग

  3. अनिल कुमार – सहायक अभियंता (AE), लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA)

  4. प्रमोद पांडे – अवर अभियंता (JE), लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA)

अब रडार पर ‘बड़े’ साहब, 7 दिन में तय होगी जवाबदेही

सूत्रों के मुताबिक, यह तो महज शुरुआत है। एसआईटी की जांच शुरू होते ही शासन के कई अन्य बड़े और रसूखदार अफसर भी रडार पर आ गए हैं। जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि सालों से रिहायशी इलाके में चल रहे इस अवैध कमर्शियल सेट-अप को किन-किन बड़े अफसरों का संरक्षण हासिल था। माना जा रहा है कि 7 दिन बाद जब एसआईटी अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी, तो लखनऊ विकास प्राधिकरण और विद्युत विभाग के कुछ और ‘बड़े नामों’ पर गाज गिरना तय है।

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