Wednesday , 17 June 2026

Breast Cancer in India: 35 की उम्र के बाद महिलाओं में बढ़ रहा है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा, बदलती लाइफस्टाइल और तनाव हैं बड़े दुश्मन

Breast cancer symptoms in hindi

नई दिल्ली: भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। आईसीएमआर (ICMR) की हालिया स्टडी और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, देश में ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के मामलों में हर साल करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जो बीमारी पहले 50 साल की उम्र के बाद देखी जाती थी, अब वह 35 से 50 वर्ष की महिलाओं को अपनी चपेट में ले रही है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और शहरीकरण इस बीमारी के सबसे बड़े वाहक बन गए हैं।

नींद की कमी और हार्मोनल असंतुलन: एक साइलेंट किलर

वैज्ञानिकों ने इस खतरे के पीछे नींद की कमी को एक मुख्य कारण माना है। कम नींद लेने से शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर गिर जाता है, जो सीधे तौर पर एस्ट्रोजन के संतुलन को बिगाड़ देता है।

विशेषज्ञों की राय: गहरी नींद के दौरान हमारा शरीर कोशिकाओं (Cells) और डीएनए (DNA) की मरम्मत करता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो यह मरम्मत प्रक्रिया बाधित हो जाती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को पनपने का मौका मिलता है।

मोटापा और मेनोपॉज के बाद का जोखिम

बढ़ता वजन और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। दरअसल, मोटापा शरीर में सूजन (Inflammation) और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में मौजूद फैट ही एस्ट्रोजन का प्रमुख स्रोत बन जाता है। शरीर में एस्ट्रोजन का उच्च स्तर स्तन कोशिकाओं में कैंसर बनने की संभावना को तेजी से बढ़ाता है, इसलिए संतुलित वजन बनाए रखना अब केवल खूबसूरती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की जरूरत है।

देर से शादी और बदलती दिनचर्या का असर

ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई सामाजिक और व्यक्तिगत कारण भी जुड़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • देर से शादी होना और पहले बच्चे के जन्म में देरी।

  • स्तनपान (Breastfeeding) न कराना या कम समय तक कराना।

  • शारीरिक गतिविधियों (Physical Activity) की भारी कमी और जंक फूड का सेवन।

  • लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव।

बचाव के तरीके: केवल मैमोग्राफी काफी नहीं

डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ जांच या मैमोग्राफी पर निर्भर रहना समाधान नहीं है। महिलाओं को अपनी दिनचर्या में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, पर्याप्त 7-8 घंटे की नींद, और तनाव कम करने के लिए योग व ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाना अनिवार्य है। समय-समय पर खुद से स्तन परीक्षण (Self-Examination) करना और किसी भी गांठ या बदलाव को नजरअंदाज न करना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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