Saturday , 7 November 2026

बंगाल में ‘मुन्नाभाइयों’ पर कसेगा शिकंजा: WBMC में रजिस्टर्ड 1.10 लाख डॉक्टरों का होगा ‘SIR’ स्टाइल में री-वेरिफिकेशन, फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और फर्जी डॉक्टरों के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल (WBMC) में पंजीकृत सभी 1.10 लाख डॉक्टरों के दस्तावेजों और डिग्रियों की सघन जांच करने का अहम फैसला किया है। यह संपूर्ण प्रक्रिया ‘SIR-स्टाइल’ (स्टेट इंस्पेक्शन एंड रीवैलिडेशन) मॉडल पर आधारित होगी। इस व्यापक सत्यापन अभियान का सीधा उद्देश्य गैर-पंजीकृत और फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाना है।

‘नो योर डॉक्टर’ (KYD) के तहत 1996 से अब तक के सभी रजिस्ट्रेशन की होगी जांच

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारदवत मुखर्जी के अनुसार, यह जांच अभियान स्टेट इंस्पेक्शन एंड रीवैलिडेशन (SIR) ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा। इसके अंतर्गत डॉक्टरों की शैक्षणिक डिग्रियों, चिकित्सा योग्यताओं और संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा जारी एक्रेडिटेशन (मान्यता) प्रमाणपत्रों का दोबारा तकनीकी व दस्तावेजी सत्यापन होगा। इसके साथ ही एक विशेष ‘Know Your Doctor’ (KYD) प्रक्रिया भी अमल में लाई जाएगी। जांच के दायरे में वर्ष 1996 से लेकर अब तक मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत सभी डॉक्टरों के दस्तावेज शामिल किए जाएंगे।

योग्य डॉक्टरों को घबराने की जरूरत नहीं, मिलेगा वर्चुअल वेरिफिकेशन का विकल्प

सत्यापन अभियान को लेकर योग्य डॉक्टरों में किसी तरह का संशय न रहे, इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट भरोसा दिया है कि प्रामाणिक और योग्य चिकित्सकों को इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा, उत्पीड़न या भागदौड़ का सामना नहीं करना पड़ेगा। डॉक्टर अपने प्रमाणपत्र स्वयं प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, बुजुर्ग चिकित्सकों, अस्वस्थ या दूरदराज के क्षेत्रों अथवा अन्य राज्यों में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों की सुविधा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल वेरिफिकेशन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी। पूरे अभियान को सुचारू, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से त्रुटिरहित बनाने के लिए राज्य सरकार एक पेशेवर निजी एजेंसी का सहयोग लेने पर भी विचार कर रही है।

मृत और विदेश जा चुके डॉक्टरों के नाम रिकॉर्ड से होंगे हमेशा के लिए बाहर

इस सघन ऑडिट का दूसरा बड़ा लक्ष्य काउंसिल के आधिकारिक रिकॉर्ड को अपडेट करना है। इसके तहत ऐसे डॉक्टरों के नाम मेडिकल काउंसिल के रजिस्टर से स्थायी रूप से हटाए जाएंगे, जिनका निधन हो चुका है, जो स्थायी रूप से विदेश में बस चुके हैं या जिन्होंने सक्रिय मेडिकल प्रैक्टिस बंद कर दी है। मौजूदा रजिस्ट्रेशन की वैधता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने साफ किया कि जब तक विभाग द्वारा नई गाइडलाइन जारी नहीं हो जाती, तब तक सभी मौजूदा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पूरी तरह वैध रहेंगे। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि इस कदम से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की साख मजबूत होगी और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले फर्जी तत्वों को पूरी तरह बेनकाब किया जा सकेगा।

 

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