
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या एक बार फिर आस्था और आधुनिकता के संगम से पूरी दुनिया को चमत्कृत करने के लिए तैयार है। दीपोत्सव 2026 के दसवें संस्करण को ऐतिहासिक और भव्य रूप देने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार रामनगरी में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए राम की पैड़ी पर 30 लाख और पूरे अयोध्या जनपद में करीब 50 लाख दीप प्रज्वलित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं, दीयों की इस जमीनी जगमगाहट के साथ-साथ आसमान में 2100 स्वदेशी ड्रोन रोशनी और तकनीक के सहारे अलौकिक आकृतियां उकेरते नजर आएंगे।
20 जोन और 53 सेक्टर में बंटा पूरा क्षेत्र, 6000 पुलिसकर्मियों के हवाले सुरक्षा
दीपोत्सव की दिव्यता के साथ सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके। पूरे मेला क्षेत्र को 20 जोन और 53 सेक्टरों में विभाजित कर कड़ा पहरा बैठाया गया है। सुरक्षा की सीधी कमान 20 अपर पुलिस अधीक्षक (ADSP) और 45 क्षेत्राधिकारी (CO) के हाथों में रहेगी, जिनकी अगुवाई में लगभग 6000 पुलिसकर्मी चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहेंगे।
एटीएस कमांडो, आरएएफ और पीएसी का कड़ा पहरा, सरयू पर फ्लड यूनिट की नजर
आपातकालीन परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है। इसमें पीएसी (PAC) की 9 कंपनियां, आरएएफ (RAF) की 3 कंपनियां और यूपी एटीएस (ATS) की 2 विशेष कमांडो टीमें तैनात की गई हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमें भी मौजूद रहेंगी। वहीं, सरयू नदी के घाटों और तटबंधों पर जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पीएसी की फ्लड रेस्क्यू कंपनी को तैनात किया गया है।
35 हजार वॉलंटियर्स सजाएंगे घाट, जनभागीदारी से बना जन-उत्सव
इस बार आयोजन को व्यापक जनसहभागिता का रूप दिया गया है। करीब 35 हजार युवा स्वयंसेवक घाटों पर दीपों को व्यवस्थित ढंग से सजाने में जुटे हैं। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के अनुसार, ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय मंदिरों को सीधे इस अभियान से जोड़ा गया है। शहर के प्रमुख चौराहों को सजाने और रोशन करने का दायित्व स्थानीय उद्यमियों व व्यापारिक संगठनों ने स्वयं आगे बढ़कर उठाया है।
लोकल इकॉनमी को मिली नई रफ्तार, कुम्हारों और कारोबारियों के खिले चेहरे
दीपोत्सव की इस अलौकिक चमक ने अयोध्या और उसके आसपास के जनपदों की स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। 50 लाख दीयों की भारी मांग पूरी करने के लिए पारंपरिक कुम्हार परिवार महीनों से चाक पर मिट्टी के दीये तैयार कर रहे हैं, जिससे उन्हें बड़े पैमाने पर आजीविका मिली है। इसके अलावा रामनगरी में जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं के चलते होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, परिवहन और स्थानीय खुदरा व्यापारियों का कारोबार भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
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